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हरिद्वार की दो महिला शिक्षकों के प्रमाणपत्र निकले फर्जी
Updated Thu, 06 Sep 2018 02:04 AM IST
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हरिद्वार की दो महिला शिक्षकों के प्रमाणपत्र निकले फर्जी
ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। फर्जी दस्तावेजों के जरिये शिक्षक की नौकरी हासिल करने वाले दो और लोगों के नाम सामने आए हैं। एसआईटी की जांच में हरिद्वार में तैनात इन शिक्षकों में से एक के हाईस्कूल के और दूसरे के स्नातक के प्रमाणपत्र फर्जी पाए गए हैं। एसआईटी ने दोनों शिक्षकों के विरुद्ध विभागीय और विधिक कार्रवाई की संस्तुति की है। एसआईटी जांच में अब तक 57 शिक्षकों के नाम सामने आ चुके हैं।
एसआईटी प्रभारी एसपी सीबीसीआईडी श्वेता चौबे ने बताया कि अब तक मिली शिकायतों में हरिद्वार जिले के पदार्था गांव स्थित प्राथमिक विद्यालय में तैनात सहायक अध्यापिका मुनेशवती और प्राथमिक विद्यालय बहादराबाद में तैनात सहायक अध्यापिका सीमा गुप्ता के दस्तावेजों की जांच की गई थी। इनमें मुनेशवती ने नियुक्ति के समय 1978 में हाईस्कूल और 1997 में इंटरमीडिएट (यूपी बोर्ड), 2002 में बीए व्यक्तिगत (चौधरी चरण सिंह विवि, मेरठ) और 2014 में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विवि से डिप्लोमा इन एलीमेंट्री एजुकेशन के दस्तावेज जमा किए थे। जब इनकी जांच की गई तो चौधरी चरण सिंह विवि मेरठ के गोपनीय विभाग से पता चला कि 2002 में उनके यहां से किसी मुनेशवती ने बीए की परीक्षा नहीं दी थी।
इसके अलावा सीमा गुप्ता ने नियुक्ति के समय 1983 में दिया गया आर्य इंटर कॉलेज मेरठ (यूपी बोर्ड) हाईस्कूल का प्रमाणपत्र फर्जी पाया गया है। जांच में पता चला है कि सीमा गुप्ता ने 1983 में हाईस्कूल की परीक्षा उस स्कूल से दी जरूर थी मगर वह 600 अंकों में से महज 185 अंक प्राप्त ही कर पाईं थी। इससे वह अनुत्तीर्ण घोषित हुईं। बावजूद इसके सीमा गुप्ता ने मार्कशीट व प्रमाणपत्र को फर्जी तरीके से बनवाया और 1985 में इंटरमीडिएट दर्शाया और बीए व बीएड पास भी दिखाया। दोनों महिला शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति की गई है।
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ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। फर्जी दस्तावेजों के जरिये शिक्षक की नौकरी हासिल करने वाले दो और लोगों के नाम सामने आए हैं। एसआईटी की जांच में हरिद्वार में तैनात इन शिक्षकों में से एक के हाईस्कूल के और दूसरे के स्नातक के प्रमाणपत्र फर्जी पाए गए हैं। एसआईटी ने दोनों शिक्षकों के विरुद्ध विभागीय और विधिक कार्रवाई की संस्तुति की है। एसआईटी जांच में अब तक 57 शिक्षकों के नाम सामने आ चुके हैं।
एसआईटी प्रभारी एसपी सीबीसीआईडी श्वेता चौबे ने बताया कि अब तक मिली शिकायतों में हरिद्वार जिले के पदार्था गांव स्थित प्राथमिक विद्यालय में तैनात सहायक अध्यापिका मुनेशवती और प्राथमिक विद्यालय बहादराबाद में तैनात सहायक अध्यापिका सीमा गुप्ता के दस्तावेजों की जांच की गई थी। इनमें मुनेशवती ने नियुक्ति के समय 1978 में हाईस्कूल और 1997 में इंटरमीडिएट (यूपी बोर्ड), 2002 में बीए व्यक्तिगत (चौधरी चरण सिंह विवि, मेरठ) और 2014 में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विवि से डिप्लोमा इन एलीमेंट्री एजुकेशन के दस्तावेज जमा किए थे। जब इनकी जांच की गई तो चौधरी चरण सिंह विवि मेरठ के गोपनीय विभाग से पता चला कि 2002 में उनके यहां से किसी मुनेशवती ने बीए की परीक्षा नहीं दी थी।
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इसके अलावा सीमा गुप्ता ने नियुक्ति के समय 1983 में दिया गया आर्य इंटर कॉलेज मेरठ (यूपी बोर्ड) हाईस्कूल का प्रमाणपत्र फर्जी पाया गया है। जांच में पता चला है कि सीमा गुप्ता ने 1983 में हाईस्कूल की परीक्षा उस स्कूल से दी जरूर थी मगर वह 600 अंकों में से महज 185 अंक प्राप्त ही कर पाईं थी। इससे वह अनुत्तीर्ण घोषित हुईं। बावजूद इसके सीमा गुप्ता ने मार्कशीट व प्रमाणपत्र को फर्जी तरीके से बनवाया और 1985 में इंटरमीडिएट दर्शाया और बीए व बीएड पास भी दिखाया। दोनों महिला शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति की गई है।
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