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एचबीएक्स-एमकैप नाम से चला रहे थे अपनी मुद्राएं
Updated Sat, 05 May 2018 02:16 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
आभासी मुद्रा को सिक्कों में बदलने वाला गिरोह बिटकॉइन और इथेरियम से अलग अपनी मुद्राएं भी देश में चलाने लगा था। पुलिस की छानबीन में पता चला है कि आरोपी एचबीएक्स और एमकैप नाम से अपनी दो मुद्राएं भी बाजार में चलाते हैं।
दून पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक, दिल्ली पुलिस की साइबर सेल ने 25 अप्रैल को दिल्ली यूनिवर्सिटी के ग्रेजुएट कमल सिंह और इंजीनियर विजय कुमार को गिरफ्तार किया था। दोनों का तीसरा साथी एसएस अलघ भी है, जो पुलिस की पकड़ में नहीं आ सका। आरोप है कि तीनों अपनी वेबसाइट www.bits2btc.com के माध्यम से फर्जी तरीके से आभासी मुद्रा इथेरियम और बिटकॉइन बेच रहे थे। इस तरह उन्होंने लोगों से करीब 100 करोड़ रुपये की ठगी की। ठगी के इस पैसे को वे दून और अन्य शहरों में विभिन्न माध्यमों से निवेश कर रहे थे। पूछताछ में पता चला है कि ये आभासी मुद्रा के साथ-साथ फिजिकल करेंसी भी तैयार कर उसे गोल्ड मार्केट में बेचते हैं। इसके लिए उन्होंने देहरादून में एक यूनिट लगाई है।
इस जानकारी के आधार पर दिल्ली पुलिस बीते सप्ताह बुधवार रात कमल और विजय को लेकर क्लेमेंटटाउन क्षेत्र पहुंची थी। उन्होंने स्थानीय पुलिस की मदद से यहां लगभग 4000 वर्गफीट के एक कांप्लेक्स में छापा मारा और वहां से जरूरी सामान को कब्जे में लेकर कांप्लेक्स को सील कर दिया। दिल्ली पुलिस ने यहां से 500 ग्राफिक्स कार्ड, आठ कंप्यूटर, सर्वर और 100 इथेरियम रिग्स बरामद की हैं। यह कांप्लेक्स किसी अमित अग्रवाल का बताया जा रहा है, जिसे उन्होंने किराये पर लिया था। आरोपी इस धंधे में इतने माहिर हो चुके थे कि उन्होंने अपनी अलग से मुद्रा भी लांच कर दी है। इन मुद्राओं के नाम उन्होंने hbx और mcap रखा हुआ है। आरोप है कि तीनों इन मुद्राओं को बेचकर भी ठगी कर रहे हैं।
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क्या होता है इथेरियम
इथेरियम को इथर भी कहा जाता है। इसे साल 2013 में बिटकॉइन प्रोग्रामर विटालिक बटेरिन ने तैयार किया था। यह बिटकॉइन के बाद सबसे महंगी आभासी मुद्रा है। इसका वर्तमान मूल्य लगभग 500 डॉलर है और बाजार करीब 4600 करोड़ डॉलर का है। यह इथेरियम ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी पर काम करती है। साल 2015 के बाद से अब तक इसके बाजार में 6800 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। जबकि, बिटकॉइन का मूल्य लगभग नौ हजार डॉलर प्रति कॉइन है।
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2017 में लिया था किराये पर कांप्लेक्स
आरोपियों ने यह कांप्लेक्स मार्च 2017 में किराए पर लिया था। यहां उन्होंने आठ लोगों को काम पर भी रखा था, जो उनके लिए इथेरियम कॉइन छापने का काम करते थे। इसके अलावा एक शख्स मशीनों और कंप्यूटर की रखरखाव के लिए भी रखा था।
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दून यूनिट से करेंसी बेच 70 लाख की कमाई
इस यूनिट के बारे में पड़ोसियों को गुमराह किया गया था। उन्हें बताया गया था कि यह एक बड़ी कंपनी का सर्वर रूम है। दिल्ली पुलिस को जानकारी मिली है कि इस यूनिट के माध्यम से करेंसी बेचकर उन्होंने एक साल में करीब 70 लाख रुपये की कमाई की है। --
तीनों पार्टनरों के झगड़े में खुला मामला
आभासी मुद्रा के इस धंधे में तीनों पार्टनर काफी समय से काम कर रहे थे। इसी बीच इनका तीसरा साथी एसएस अलघ पूरे धंधे काम अपना होल्ड चाहता था। इसी के चक्कर में उसने अपने साथियों की शिकायत पुलिस से कर दी। इसके बाद दिल्ली पुलिस की साइबर टीम इस धंधे की परत दर परत खोलती चली गई।
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आभासी मुद्रा को सिक्कों में बदलने वाला गिरोह बिटकॉइन और इथेरियम से अलग अपनी मुद्राएं भी देश में चलाने लगा था। पुलिस की छानबीन में पता चला है कि आरोपी एचबीएक्स और एमकैप नाम से अपनी दो मुद्राएं भी बाजार में चलाते हैं।
दून पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक, दिल्ली पुलिस की साइबर सेल ने 25 अप्रैल को दिल्ली यूनिवर्सिटी के ग्रेजुएट कमल सिंह और इंजीनियर विजय कुमार को गिरफ्तार किया था। दोनों का तीसरा साथी एसएस अलघ भी है, जो पुलिस की पकड़ में नहीं आ सका। आरोप है कि तीनों अपनी वेबसाइट www.bits2btc.com के माध्यम से फर्जी तरीके से आभासी मुद्रा इथेरियम और बिटकॉइन बेच रहे थे। इस तरह उन्होंने लोगों से करीब 100 करोड़ रुपये की ठगी की। ठगी के इस पैसे को वे दून और अन्य शहरों में विभिन्न माध्यमों से निवेश कर रहे थे। पूछताछ में पता चला है कि ये आभासी मुद्रा के साथ-साथ फिजिकल करेंसी भी तैयार कर उसे गोल्ड मार्केट में बेचते हैं। इसके लिए उन्होंने देहरादून में एक यूनिट लगाई है।
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इस जानकारी के आधार पर दिल्ली पुलिस बीते सप्ताह बुधवार रात कमल और विजय को लेकर क्लेमेंटटाउन क्षेत्र पहुंची थी। उन्होंने स्थानीय पुलिस की मदद से यहां लगभग 4000 वर्गफीट के एक कांप्लेक्स में छापा मारा और वहां से जरूरी सामान को कब्जे में लेकर कांप्लेक्स को सील कर दिया। दिल्ली पुलिस ने यहां से 500 ग्राफिक्स कार्ड, आठ कंप्यूटर, सर्वर और 100 इथेरियम रिग्स बरामद की हैं। यह कांप्लेक्स किसी अमित अग्रवाल का बताया जा रहा है, जिसे उन्होंने किराये पर लिया था। आरोपी इस धंधे में इतने माहिर हो चुके थे कि उन्होंने अपनी अलग से मुद्रा भी लांच कर दी है। इन मुद्राओं के नाम उन्होंने hbx और mcap रखा हुआ है। आरोप है कि तीनों इन मुद्राओं को बेचकर भी ठगी कर रहे हैं।
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क्या होता है इथेरियम
इथेरियम को इथर भी कहा जाता है। इसे साल 2013 में बिटकॉइन प्रोग्रामर विटालिक बटेरिन ने तैयार किया था। यह बिटकॉइन के बाद सबसे महंगी आभासी मुद्रा है। इसका वर्तमान मूल्य लगभग 500 डॉलर है और बाजार करीब 4600 करोड़ डॉलर का है। यह इथेरियम ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी पर काम करती है। साल 2015 के बाद से अब तक इसके बाजार में 6800 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। जबकि, बिटकॉइन का मूल्य लगभग नौ हजार डॉलर प्रति कॉइन है।
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2017 में लिया था किराये पर कांप्लेक्स
आरोपियों ने यह कांप्लेक्स मार्च 2017 में किराए पर लिया था। यहां उन्होंने आठ लोगों को काम पर भी रखा था, जो उनके लिए इथेरियम कॉइन छापने का काम करते थे। इसके अलावा एक शख्स मशीनों और कंप्यूटर की रखरखाव के लिए भी रखा था।
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दून यूनिट से करेंसी बेच 70 लाख की कमाई
इस यूनिट के बारे में पड़ोसियों को गुमराह किया गया था। उन्हें बताया गया था कि यह एक बड़ी कंपनी का सर्वर रूम है। दिल्ली पुलिस को जानकारी मिली है कि इस यूनिट के माध्यम से करेंसी बेचकर उन्होंने एक साल में करीब 70 लाख रुपये की कमाई की है। --
तीनों पार्टनरों के झगड़े में खुला मामला
आभासी मुद्रा के इस धंधे में तीनों पार्टनर काफी समय से काम कर रहे थे। इसी बीच इनका तीसरा साथी एसएस अलघ पूरे धंधे काम अपना होल्ड चाहता था। इसी के चक्कर में उसने अपने साथियों की शिकायत पुलिस से कर दी। इसके बाद दिल्ली पुलिस की साइबर टीम इस धंधे की परत दर परत खोलती चली गई।