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साउथ इंडियन टप्पेबाजों के गिरोह का भंडाफोड़
Updated Sun, 25 Mar 2018 02:27 AM IST
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ब्यूरो/ अमर उजाला, देहरादून
पुलिस ने एक ही दिन में पांच अलग-अलग स्थानों पर वाहनों के शीशे तोड़कर सामान उड़ाने वाले साउथ इंडियन टप्पेबाजों के गिरोह के आठ सदस्यों को गिरफ्तार किया है। रेलवे स्टेशन के पास से गिरफ्तार किए गए आठों टप्पेबाज आम लोगों के साथ घुलमिल कर रह रहे थे। उनके कब्जे से टप्पेबाजी कर उड़ाया गया सारा सामान भी बरामद कर लिया गया है। इनमें से दो टप्पेबाज 2015 में ज्वालापुर में हुई 42 लाख की टप्पेबाजी में भी वांछित थे।
शनिवार को एसएसपी निवेदिता कुकरेती ने घटनाओं का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि बुधवार 21 मार्च को उनके कार्यालय के आसपास के पांच स्थानों से वाहनों के शीशे तोड़कर लैपटॉप और कैमरे समेत अन्य सामान उड़ा लिया गया था। सीसीटीवी फुटेज के आधार पर इसमें किसी गैंग के संलिप्त होने के संकेत मिल रहे थे। इसके आधार पर पुलिस ने जांच आगे बढ़ाई और शुक्रवार शाम आठों टप्पेबाजों को रेलवे स्टेशन के पास से गिरफ्तार कर लिया। उनके पास से उड़ाए गए तीन लैपटॉप, मोबाइल फोन, कैमरा, रबर बैंड, लोहे की छोटी गोलियां समेत अन्य सामान मिला है। आरोपियों की पहचान जिला तृच्चि, तमिलनाडु निवासी दीपू, मितरान, अनवालगन, मुरली, उदया कुमार, साक्ची बेल, शिवा और उमानाथ के रूप में हुई।
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सेकेंडों में सामान गायब कर देते हैं टप्पेबाज
पकड़े गए सभी टप्पेबाज बेहद शातिर हैं। गिरोह के मुखिया दीपू ने पुलिस पूछताछ में बताया कि पहले रेकी कर सुनसान जगह पर खड़ी गाड़ियों को चिन्हित करते थे। फिर एक टप्पेबाज रबर बैंड को हाथ पर फंसाकर गुलेल बना लेता और लोहे की बहुत छोटी गोली से शीशे पर वार करता। इससे शीशे पर दरारें पड़ जाती। इसके बाद दूसरा टप्पेबाज हाथ पर कपड़ा लपेटकर शीशे पर वार करता और अंदर से सामान उड़ा लेता।
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आम लोगों के साथ रहते थे टप्पेबाज
टप्पेबाजी कर महंगा-महंगा सामान उड़ाने वाले टप्पेबाज पहचान छुपाने के लिए आम लोगों की बीच रहते थे। वह धर्मशालाओं व आश्रमों में रहते और ज्यादातर लंगर में खाना खाते थे। वह विक्रम और सिटी बस में सफर करते। आठों लोग वारदात को अंजाम देने के बाद अलग-अलग हो जाते थे।
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हरिद्वार में उड़ाए थे 42 लाख
ज्वालापुर, हरिद्वार में 2015 में एक निजी बैंक की कैश वैन से 42 लाख की टप्पेबाजी हो गई थी। कैश वैन से कर्मचारी 20 लाख रुपये का बैग लेकर निकले। जैसे ही वह गाड़ी से दूर गए टप्पेबाजों ने गाड़ी में रखा 42 लाख रुपये का बैग पार कर लिया। पुलिस ने इसी गैंग के ज्यादातार टप्पेबाजों को दबोच लिया था। दीपू और अनवालगन इस मामले में वांछित चल रहे थे।
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पुलिस ने एक ही दिन में पांच अलग-अलग स्थानों पर वाहनों के शीशे तोड़कर सामान उड़ाने वाले साउथ इंडियन टप्पेबाजों के गिरोह के आठ सदस्यों को गिरफ्तार किया है। रेलवे स्टेशन के पास से गिरफ्तार किए गए आठों टप्पेबाज आम लोगों के साथ घुलमिल कर रह रहे थे। उनके कब्जे से टप्पेबाजी कर उड़ाया गया सारा सामान भी बरामद कर लिया गया है। इनमें से दो टप्पेबाज 2015 में ज्वालापुर में हुई 42 लाख की टप्पेबाजी में भी वांछित थे।
शनिवार को एसएसपी निवेदिता कुकरेती ने घटनाओं का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि बुधवार 21 मार्च को उनके कार्यालय के आसपास के पांच स्थानों से वाहनों के शीशे तोड़कर लैपटॉप और कैमरे समेत अन्य सामान उड़ा लिया गया था। सीसीटीवी फुटेज के आधार पर इसमें किसी गैंग के संलिप्त होने के संकेत मिल रहे थे। इसके आधार पर पुलिस ने जांच आगे बढ़ाई और शुक्रवार शाम आठों टप्पेबाजों को रेलवे स्टेशन के पास से गिरफ्तार कर लिया। उनके पास से उड़ाए गए तीन लैपटॉप, मोबाइल फोन, कैमरा, रबर बैंड, लोहे की छोटी गोलियां समेत अन्य सामान मिला है। आरोपियों की पहचान जिला तृच्चि, तमिलनाडु निवासी दीपू, मितरान, अनवालगन, मुरली, उदया कुमार, साक्ची बेल, शिवा और उमानाथ के रूप में हुई।
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सेकेंडों में सामान गायब कर देते हैं टप्पेबाज
पकड़े गए सभी टप्पेबाज बेहद शातिर हैं। गिरोह के मुखिया दीपू ने पुलिस पूछताछ में बताया कि पहले रेकी कर सुनसान जगह पर खड़ी गाड़ियों को चिन्हित करते थे। फिर एक टप्पेबाज रबर बैंड को हाथ पर फंसाकर गुलेल बना लेता और लोहे की बहुत छोटी गोली से शीशे पर वार करता। इससे शीशे पर दरारें पड़ जाती। इसके बाद दूसरा टप्पेबाज हाथ पर कपड़ा लपेटकर शीशे पर वार करता और अंदर से सामान उड़ा लेता।
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आम लोगों के साथ रहते थे टप्पेबाज
टप्पेबाजी कर महंगा-महंगा सामान उड़ाने वाले टप्पेबाज पहचान छुपाने के लिए आम लोगों की बीच रहते थे। वह धर्मशालाओं व आश्रमों में रहते और ज्यादातर लंगर में खाना खाते थे। वह विक्रम और सिटी बस में सफर करते। आठों लोग वारदात को अंजाम देने के बाद अलग-अलग हो जाते थे।
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हरिद्वार में उड़ाए थे 42 लाख
ज्वालापुर, हरिद्वार में 2015 में एक निजी बैंक की कैश वैन से 42 लाख की टप्पेबाजी हो गई थी। कैश वैन से कर्मचारी 20 लाख रुपये का बैग लेकर निकले। जैसे ही वह गाड़ी से दूर गए टप्पेबाजों ने गाड़ी में रखा 42 लाख रुपये का बैग पार कर लिया। पुलिस ने इसी गैंग के ज्यादातार टप्पेबाजों को दबोच लिया था। दीपू और अनवालगन इस मामले में वांछित चल रहे थे।