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थानों में महिला दारोगाओं की कमी, कैसे हो विवेचना

Sat, 12 May 2018 02:24 AM IST
Updated Sat, 12 May 2018 02:24 AM IST
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थानों में महिला दारोगाओं की कमी, कैसे हो विवेचना
ब्यूरो/ अमर उजाला, देहरादून
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राजधानी में जिस तरह महिला अपराधों में बढ़ोतरी हो रही है, उनके सापेक्ष पुलिस की तैयारियां आधी अधूरी हैं। हालात यह है कि महिला अपराधों से संबंधित मुकदमों की विवेचना के लिए शहर के नौ थानों में केवल 11 महिला दारोगाओं की तैनाती की गई है। जबकि दो थानों में तो विवेचना के लिए महिला दारोगा है ही नहीं। इन थानों में ऐसे मुकदमों की जांच को इधर-उधर (दूसरे थानों) से महिला दारोगाओं को बुलाना पड़ रहा है। जहां केवल एक महिला दरोगा है वहां उनकी अनुपस्थिति में भी किसी तरह काम चलाया जा रहा है। इन हालात में चुनिंदा महिला दारोगाओं पर विवेचनाओं का बोझ बढ़ गया है। जिससे मुकदमों की जांच में देरी हो रही है। जानकारों की माने तो इस तरह देरी से जांच होने का लाभ पीड़ित पक्ष को नहीं, बल्कि आरोपी पक्ष को मिलता है। बाल आयोग की रिपोर्ट के अनुसार राज्य में पिछले चार साल में पोक्सो जैसे गंभीर मामलों में पुलिस महज एक चौथाई मामलों में ही सजा दिला पाई है। 20 फीसदी मुकदमों में आरोपी बरी हुए हैं। जबकि 55 फीसदी मामले अभी विचाराधीन हैं।
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केस-1:: चार दिन बाद हुआ पीड़िता का मेडिकल
एक मई को रायपुर क्षेत्र से एक बच्ची का अपहरण हुआ था। बकौल पुलिस बच्ची को पांच मई को बरामद कर लिया गया और दो दिन बाद सात मई को बच्ची की मां ने एक आरोपी के खिलाफ दुराचार और अपहरण का मुकदमा दर्ज कराया था। चूंकि रायपुर थाने की महिला दारोगा मेटरनिटी लीव पर चली गई है, तो वहां अब कोई महिला दारोगा नहीं है। दो दिन बाद नौ मई को डालनवाला थाने की एक महिला दारोगा को बुलाकर मामले की जांच शुरू कराई गई। घटना के चार दिन बाद गुरुवार को पीड़िता का मेडिकल हो सका। इसके बाद शुक्रवार को उसके मजिस्ट्रेटी बयान कराए गए। आरोपी अब भी पुलिस की पकड़ से बाहर है।
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केस-2:: कोतवाली की महिला दारोगा को दी जांच
30 अप्रैल को प्रेमनगर में एक बच्ची के साथ दुराचार करने का मामला सामने आया था। मामले की जांच को प्रेमनगर थाने में महिला दारोगा नहीं है। लिहाजा थाना पुलिस ने कैंट थाने से महिला दरोगा को बुलाना चाहा, लेकिन वहां की महिला दारोगा एविडेंस के लिए हाईकोर्ट गई हुईं थी। ऐसे में शहर कोतवाली में तैनात एक महिला दारोगा को मामले की जांच सौंपी गई। दो दिन बाद मामले में आरोपी कारोबारी को गिरफ्तार किया गया।
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ये है नियम
नियमों के अनुसार महिला अपराधों की जांच केवल महिला अधिकारी ही कर सकेगी। इसमें छेड़छाड़, दहेज प्रताड़ना, दुराचार, घरेलू हिंसा आदि अपराध शामिल हैं। नियम यह भी हैं कि थाने में इन अपराधों के संबंध में महिलाओं से जानकारी भी महिला अधिकारी ही ले सकती है। इसके लिए पुरुष अधिकारी अधिकृत नहीं हैं। जबकि राजधानी के कई थाने ऐसे हैं जहां या तो महिला दारोगा है ही नहीं और हैं भी तो सिर्फ एक ही। ऐसी सूरत में यदि अकेली महिला सब इंस्पेक्टर किसी काम से बाहर है तो वह स्थान भी खाली हो जाता है। इस तरह इन थानों में महिला दारोगाओं को इधर-उधर से बुलाकर जांच सौंपी जा रही है।
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थानों में ये है महिला दारोगाओं की स्थिति
प्रेमनगर-0
रायपुर-0
राजपुर-1
क्लेमेंटटाउन-02
डालनवाला-02
कैंट-01
नेहरू कॉलोनी-01
शहर कोतवाली-03
वसंत विहार-01
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इस साल में 60 से ज्यादा महिला अपराध पंजीकृत
मौजूदा साल की बात करें तो अब तक शहर के सभी थानों में 60 से ज्यादा महिला संबंधित अपराध पंजीकृत हुए हैं। जबकि इनकी जांच के लिए सिटी के नौ थानों थानों में 11 महिला दारोगा ही उपलब्ध हैं। वहीं, जांच के लिए कभी-कभार पुलिस के अन्य विंगों में तैनात महिला सब इंस्पेक्टरों को भी बुला लिया जाता है।
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क्या कहते हैं विशेषज्ञ
महिला अपराधों की जांच में देरी का फायदा आरोपियों को मिलता है। नियमों के तहत जितनी जल्दी हो सके पीड़िता का मेडिकल (दुराचार के मामलों में) और फिर मजिस्ट्रेटी बयान कराए जाने चाहिए। यदि देर होती है तो आरोपी पक्ष के पीड़ित को डराने धमकाने का डर बना रहता है। इससे अदालतों में मामले कमजोर पड़ जाते हैं।

आरएस राघव, अधिवक्ता
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महिलाओं से संबंधित अपराधों को तत्काल दर्ज किया जाता है। ये बात जरूर है कि मुकदमे बढ़ने से विवेचनाओं का बोझ महिला विवेचकों पर बढ़ रहा है। जहां तक महिला सब इंस्पेक्टरों की तैनाती की बात है तो जिले को जैसे ही महिला सब इंस्पेक्टर मिलेंगी उन्हें थानों में तैनात किया जाएगा। ताकि मुकदमों की जांच प्रभावित न हो।
निवेदिता कुकरेती, एसएसपी
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