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सात टप्पेबाज चढ़े हत्थे, बरामद नहीं हुई फूटी कौड़ी

Thu, 03 Aug 2017 10:26 PM IST
Updated Thu, 03 Aug 2017 10:26 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
बयालीस लाख की रकम ले उड़े दक्षिण भारत के टप्पेबाज गैंग के सरगना और छह सदस्य पुलिस के हत्थे चढ़ गए हैं। हालांकि पुलिस उनसे फूटी कौड़ी भी बरामद नहीं कर पाई है। अब बताया जा रहा है कि गैंग के दो सदस्य रकम लेकर फरार हैं। उनकी धरपकड़ के फिर से हरिद्वार पुलिस दक्षिण भारत का रुख करने की तैयारी कर रही है।
कांवड़ यात्रा के दौरान चंद्राचार्य चौक के पास आईसीआईसीआई बैंक शाखा कैंपस से 42 लाख की रकम से भरा बैग लेकर टप्पेबाज फरार हो गए थे। सीसीटीवी फुटेज में पूरी वारदात कैद हुई थी। ज्वालापुर पुलिस, सीआईयू ने जब पड़ताल की थी तब शिवमूर्ति चौक के पास नटराज होटल में दक्षिण भारत के गैंग के ठहरने की बात सामने आई थी। वारदात के बाद वे होटल से चेक आउट कर फरार हो गए थे। पीछा करते करते शिर्डी महाराष्ट्र पहुंची पुलिस ने तमिलनाडु के त्रिचनापल्ली से ताल्लुक रखने वाले टप्पेबाज गैंग के पांच सदस्य दबोचे थे, जबकि गैंग सरगना समेत चार सदस्यों के दक्षिण भारत रवाना होने की बात सामने आई थी। हत्थे चढ़े आरोपियों को ट्रांजिट रिमांड पर यहां लाकर कोर्ट में पेश करने के बाद जेल भेज दिया था। वहीं, गैंग सरगना समेत चार आरोपियों की धरपकड़ के लिए टीम दक्षिण भारत रवाना हो गई थी। कोतवाली प्रभारी अमरजीत सिंह ने बताया कि गैंग सरगना वी मोथी पुत्र सुब्रमणयम एवं अधिथन पुत्र तेंदा यूथावानी को गिरफ्तार कर लिया, जबकि जगन एवं दीपक अभी फरार हैं। बताया कि गैंग सरगना ने कबूला कि 42 लाख की रकम जगन एवं दीपक लेकर चले गए हैं।
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वेट एंड वॉच की रणनीति पर करते हैं काम
हरिद्वार। पूरे देश में टप्पेबाजी के लिए कुख्यात तमिलनाडु के त्रिचनापल्ली के गैंग वारदात को अंजाम देने के बाद वेट एंड वॉच की रणनीति पर काम करते हैं। वे बखूबी जानते हैं कि बड़ी वारदात के बाद पुलिस बुरी तरह पीछे पड़ जाती है। हरिद्वार में जब वी मोथी के गैंग ने बड़ी वारदात को अंजाम दिया तब इनके गांव के ही दूसरे गैंग ने मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र में दो बड़ी वारदात घटित की थी। ये बात शीशे की तरह अब साफ हो चुकी है कि यदि टप्पेबाजी की बड़ी वारदात घटी है तो पुलिस का पहला संदेह सीधे दक्षिण भारत के गैंग पर ही जाता है। लिहाजा ये गैंग खुद को पुलिस से बचाने के लिए रणनीति के तहत ही कार्य करते हैं। वारदात को अंजाम देने के बाद पूरा गैंग अलग-अलग हो जाते हैं और रकम सुरक्षित ठिकाने पर पहुंचा देते हैं। ये ठिकाने तमिलनाडु, महाराष्ट्र, बिहार, दिल्ली में है। वे जानते है कि पुलिस पीछे ही लगी होगी लिहाजा रकम का बंटवारा करने में जल्दबाजी नहीं करते है। एक से दो महीने बाद बंटवारे का समय निश्चित होता है जब तक माहौल शांत न हो जाए।
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