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दून के पूर्व जेलर पर 20 लाख के गबन का आरोप
Updated Wed, 23 May 2018 01:52 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
वर्ष 2008 से 2013 के बीच देहरादून जेल में सुप्रीटेंडेंट रहे बीपी पांडेय द्वारा फर्जी समिति बनाकर करीब 20 लाख रुपये के गबन का मामला प्रकाश में आया है। इस बाबत आईजी जेल ने जांच के बाद कानूनी और विभागीय कार्रवाई के लिए प्रमुख सचिव गृह को पत्र भेजा है। बीपी पांडेय वर्तमान में हरिद्वार जिला जेल में तैनात हैं।
जानकारी के अनुसार बीपी पांडेय वर्ष 2008 से 2013 के बीच देहरादून जेल में बतौर जेलर और जेल सुप्रीटेंडेंट तैनात रहे। आरोप है कि जेल में कैदियों को आत्मनिर्भर बनाने की योजना के तहत कैदियों द्वारा द्वारा बनाई गई सामग्री एक समिति के माध्यम से बेच दी गई। समिति पूर्व जेल सुप्रीटेंडेंट की निगरानी में ही बनाई गई थी। इसी समिति के माध्यम से सामग्री विभिन्न मेलों और हाट में बेची गई। आईजी जेल पीवीके प्रसाद को जब इस अनियिमतता की भनक लगी तो उन्होंने जांच कराई। जांच में पाया गया कि जो समिति पूर्व सुप्रीटेंडेंट बीपी पांडेय ने बनाई थी वह फर्जी है। इसके अलावा सामग्री से संबंधित बिल भी फर्जी हैं। जांच में करीब 20 लाख रुपये की हेराफेरी की बात सामने आई। इस जांच रिपोर्ट के आधार पर आईजी जेल पीवीके प्रसाद ने बीपी पांडेय के खिलाफ कानूनी और विभागीय कार्रवाई की संस्तुति का पत्र प्रमुख सचिव गृह को भेजा है। आईजी जेल पीवीके प्रसाद ने बताया कि मामला वित्तीय अनियमितताओं का है। पूर्व जेलर बीपी पांडेय के खिलाफ कार्रवाई के लिए गृह विभाग को पत्र भेजा गया है, लेकिन जांच के बिंदुओं के बारे में अभी कुछ जानकारी नहीं दी जा सकती है। वहीं बीपी पांडेय ने इस संबंध में कुछ भी कहने से इनकार कर दिया।
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वर्ष 2008 से 2013 के बीच देहरादून जेल में सुप्रीटेंडेंट रहे बीपी पांडेय द्वारा फर्जी समिति बनाकर करीब 20 लाख रुपये के गबन का मामला प्रकाश में आया है। इस बाबत आईजी जेल ने जांच के बाद कानूनी और विभागीय कार्रवाई के लिए प्रमुख सचिव गृह को पत्र भेजा है। बीपी पांडेय वर्तमान में हरिद्वार जिला जेल में तैनात हैं।
जानकारी के अनुसार बीपी पांडेय वर्ष 2008 से 2013 के बीच देहरादून जेल में बतौर जेलर और जेल सुप्रीटेंडेंट तैनात रहे। आरोप है कि जेल में कैदियों को आत्मनिर्भर बनाने की योजना के तहत कैदियों द्वारा द्वारा बनाई गई सामग्री एक समिति के माध्यम से बेच दी गई। समिति पूर्व जेल सुप्रीटेंडेंट की निगरानी में ही बनाई गई थी। इसी समिति के माध्यम से सामग्री विभिन्न मेलों और हाट में बेची गई। आईजी जेल पीवीके प्रसाद को जब इस अनियिमतता की भनक लगी तो उन्होंने जांच कराई। जांच में पाया गया कि जो समिति पूर्व सुप्रीटेंडेंट बीपी पांडेय ने बनाई थी वह फर्जी है। इसके अलावा सामग्री से संबंधित बिल भी फर्जी हैं। जांच में करीब 20 लाख रुपये की हेराफेरी की बात सामने आई। इस जांच रिपोर्ट के आधार पर आईजी जेल पीवीके प्रसाद ने बीपी पांडेय के खिलाफ कानूनी और विभागीय कार्रवाई की संस्तुति का पत्र प्रमुख सचिव गृह को भेजा है। आईजी जेल पीवीके प्रसाद ने बताया कि मामला वित्तीय अनियमितताओं का है। पूर्व जेलर बीपी पांडेय के खिलाफ कार्रवाई के लिए गृह विभाग को पत्र भेजा गया है, लेकिन जांच के बिंदुओं के बारे में अभी कुछ जानकारी नहीं दी जा सकती है। वहीं बीपी पांडेय ने इस संबंध में कुछ भी कहने से इनकार कर दिया।
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