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Crime Literature Festival: बोले फिल्म निर्देशक प्रकाश झा...अपराध न होता तो कोई कहानी संभव नहीं होती

Fri, 29 Nov 2024 10:50 PM IST
अलका त्यागी माई सिटी रिपोर्टर, देहरादून
माई सिटी रिपोर्टर, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Fri, 29 Nov 2024 10:50 PM IST
सार

पूर्व डीजीपी एबी लाल ने कहा कि अपराध और साहित्य का रिश्ता बहुत गहरा है। अगर आप गौर करें तो हर पांचवीं किताब किसी न किसी रूप में अपराध पर आधारित होती है। हम सभी, चाहे प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से, अपराध से घिरे हुए हैं।

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Crime Literature Festival 2nd Edition in Dehradun Film director Prakash Jha Told About Crime Stories
क्राइम लिटरेचर फेस्टिवल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अपराध न होता तो कोई भी कहानी न होती। यह कहना है प्रसिद्ध फिल्म निर्देशक प्रकाश झा का। झा शुक्रवार को क्राइम लिटरेचर फेस्टिवल के दूसरे संस्करण में शिरकत करने दून पहुंचे थे। उन्होंने अपराध और समाज के बीच जटिल संबंधों पर विचार रखे।

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उन्होंने कहा कि अपराध समाज का हिस्सा है। व्यवस्थित समाज में भी अपराध होते हैं, लेकिन उनका स्तर कम होता है। हम अपराध को अक्सर पहचानते नहीं, क्योंकि यह हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा है। प्रकाश झा के सत्र से पहले राजपुर रोड स्थित होटल में कार्यक्रम का हंस फाउंडेशन की संस्थापक माता मंगला, पूर्व डीजीपी अशोक कुमार, पूर्व डीजीपी उत्तर प्रदेश एबी लाल और निर्देश प्रकाश झा ने शुभारंभ किया। माता मंगला ने कहा कि अपराध जागरूकता आज के समय और समाज की सबसे बड़ी जरूरत है, खासकर देवभूमि उत्तराखंड जैसे पवित्र स्थान पर। हमें यह समझने की जरूरत है कि हम युवा पीढ़ी की नकारात्मक सोच को सकारात्मक दिशा में बदल सकते हैं। अक्सर परिस्थितियां लोगों को अपराधी बना देती हैं। उनके उत्थान और समर्थन के लिए कोई कदम नहीं उठाया जाता।
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पूर्व डीजीपी एबी लाल ने कहा कि अपराध और साहित्य का रिश्ता बहुत गहरा है। अगर आप गौर करें तो हर पांचवीं किताब किसी न किसी रूप में अपराध पर आधारित होती है। हम सभी, चाहे प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से, अपराध से घिरे हुए हैं। साहित्य में अपराध को केंद्र में रखकर हम समाज को न केवल अपराध की जटिलताओं को समझाने का प्रयास करते हैं, बल्कि जागरूकता बढ़ाने का भी काम करते हैं। होटल में क्राइम लिटरेचर फेस्टिवल तीन दिनों तक चलेगा। हर दिन नए-नए विषयों पर सत्रों का आयोजन किया जाएगा।
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पूर्व डीजीपी और फेस्टिवल के अध्यक्ष अशोक कुमार ने कहा कि समाज में अक्सर पुलिस को लेकर नकारात्मक धारणा होती है, लेकिन फिल्मों के माध्यम से यह दिखाने का अवसर मिलता है कि पुलिस असल में समाज की हीरो है। इस फेस्टिवल ने एक ऐसा मंच प्रदान किया है, जहां अपराध, न्याय और समाज के मुद्दों पर व्यापक चर्चा हो सकती है।

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Crime Literature Festival 2nd Edition in Dehradun Film director Prakash Jha Told About Crime Stories
क्राइम लिटरेचर फेस्टिवल - फोटो : अमर उजाला

आठ साल में 13 बार लिखी गंगाजल
अपराध के बिना कोई कहानी संभव ही नहीं है। झा ने इसके लिए महाभारत का उदाहरण दिया। कहा कि इस महाकाव्य में सभी तत्व हैं। भाईयों के बीच झगड़ा और अत्याचार जो एक बेहतरीन कहानी है। प्रकाश झा ने कहा कि वह निर्देशक और निर्माता से पहले एक लेखक हैं। उन्होंने आठ सालों में गंगाजल 13 बार लिखी है। आगे कहा कि वह समाजसेवी नहीं, बल्कि समाज का हिस्सा हैं। कहा कि अब मैं जनादेश पर लिख रहा हूं। समाज से अपराध के रिश्ते के बारे में उन्होंने कहा कि हम अक्सर अपराधियों के लिए प्रार्थना करते हैं। पुलिस के पास जाने के बजाय हम उन शक्तिशाली व्यक्तियों जिन्हें बाहुबली कहा जाता है के पास जाते हैं। बाहुबली समाज में अपनी धाक और प्रभुत्व से व्यवस्था को प्रभावित करते हैं। यही कारण है कि समाज इनकी इस ताकत को उत्सव की तरह मनाता है। एआई के बारे में उन्होंने कहा कि यह अब जीवन में घुस चुका है। इससे आने वाले समय में नए-नए अपराध हो सकते हैं।

वोट बैंक का हिस्सा बन गई थी बाटला हाउस की घटना : करनैल सिंह
दूसरा सत्र बाटला हाउस एनकाउंटर का नेतृत्व करने वाले पूर्व आईपीएस करनैल सिंह के नाम रहा। उन्होंने बाटला हाउस मुठभेड़ की सच्चाई पर चर्चा करते हुए कहा कि यह घटना वोट बैंक राजनीति का हिस्सा बन गई थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि आतंकवाद किसी विशेष समुदाय का हिस्सा नहीं है, और फिल्मों में जो चित्रण किया जाता है, वह पूरी तरह से सत्य नहीं होता। इसलिए, उन्होंने इस मुद्दे पर अपनी किताब लिखी, जिसमें पुलिस के कठिन कार्य और परिवारों की पीड़ा को उजागर किया। पूर्व आईपीएस करनैल सिंह ने कहा कि पुलिसकर्मियों का काम कठिन होता है और लोग इसे पूरी तरह से समझते नहीं हैं। पूर्व डीजीपी अशोक कुमार ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा कि बाटला हाउस मुठभेड़ एक बड़ी चुनौती थी। उन्होंने करनैल सिंह की किताब को सराहा और कहा कि यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण किताब है, जो देश की वास्तविक स्थिति को उजागर करती है।

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