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अब सरकारी विभागों में आया कॉरपोरेट कल्चर

Fri, 17 Apr 2015 03:30 PM IST
नलिनी गुसाईं/ अमर उजाला, देहरादून
नलिनी गुसाईं/ अमर उजाला, देहरादून Updated Fri, 17 Apr 2015 03:30 PM IST
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corporate culture in uttarakhand government department.

पेयजल निगम के अधिकारियों ने वर्षभर में कितना काम किया, कहां कितने भ्रमण किए, कितने प्रोजेक्ट बनाए और कितनी छुट्टियां ली। इन सबका बारीकी से हिसाब देने पर ही प्रमोशन हो सकेगा।

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इस बार विभाग में अप्रेजल का नया पैटर्न लागू किया गया है। इसी के साथ यहां कॉरपोरेट कल्चर पहुंच गया है। हालांकि अधिकारी दबी जुबान इसका विरोध कर रहे हैं।
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पेयजल निगम के अधिकारियों पर अक्सर काम के बारे में सुस्ती का आरोप लगता रहा है, लेकिन इससे उन्हें खास फर्क इसलिए नहीं पड़ता था, क्योंकि उनकी सुस्ती उनकी पदोन्नति में बाधा नहीं बनती थी। लेकिन इस बार पेयजल निगम अधिकारियों को अपने कार्य के संबंध में पूरा हिसाब-किताब देना पड़ रहा है। कनिष्ठ अभियंता से लेकर मुख्य अभियंता तक को अपने कार्य का स्वमूल्यांकन करना है।
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नए पैटर्न के अनुसार अधिकारियों को अपने वर्षभर के काम से लेकर छुट्टी तक का पूरा ब्योरा देना होगा। अगर बीमारी के लिए छुट्टी की बात बताते हैं तो किस बीमारी के लिए कितने दिन की छुट्टी ली गई, इसका भी हिसाब देना होगा। इससे पहले सिर्फ कुछ कॉलम में टिक का निशान लगाकर ही काम चल जाता था।

पेयजल निगम के प्रबंध निदेशक भजन सिंह का कहना है कि नया पैटर्न पूरी तरह से लागू कराया जाएगा। आखिर पता तो चले कि वर्षभर में किस अधिकारी ने कितना काम किया है। यदि अधिकारी खुद अपने कार्य का मूल्यांकन नहीं कर पाएंगे तो प्रमोशन की उम्मीद कैसे कर सकते हैं?

ये आ रहे दायरे में
कनिष्ठ अभियंता, सहायक अभियंता, अधिशासी अभियंता, अधीक्षण अभियंता और मुख्य अभियंता।

ऐसे हैं सवाल
- कितने लिए चिकित्सा अवकाश और अवकाश पर रहे तो बीमारी का उल्लेख करें
- साइट पर कितने इंस्पेक्शन किए?
- कितना भ्रमण किया गया?
- साइटों पर रात्रि विश्राम हुआ कि नहीं?
- कितने प्रोजेक्ट वर्षभर में बने और कितनों पर क्या कार्य हुए?

स्वास्थ्य विभाग, कलक्ट्रेट में व्यवस्था लागू

स्व मूल्यांकन की व्यवस्था स्वास्थ्य विभाग और कलक्ट्रेट में पहले से ही लागू की गई है। डॉक्टरों से उनके वर्ष भर के कार्य के संबंध में अप्रेजल भराया जाता है।

अप्रेजल के आधार पर भी संविदा डॉक्टरों को सेवा विस्तार मिलता है। इसी तरह कलक्ट्रेट में व्यवस्था की गई है कि प्रत्येक कर्मचारी अपने दिन भर के कार्य का मूल्यांकन करे। अवकाश लेने पर कारण समेत इसका पूरा ब्योरा देने की व्यवस्था है।


प्रोन्नति डिपार्टमेंटल प्रमोशन कमेटी (डीपीसी) करती है। इसमें कर्मचारी की चरित्र पंजिका देखी जाती है। प्रोन्नति देने में कर्मचारी की ज्येष्ठता और कार्य श्रेष्ठता का आकलन किया जाता है।
- ठाकुर प्रह्लाद सिंह, प्रदेश अध्यक्ष, राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद

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