Lockdown Uttarakhand: मां की अर्थी को कंधा भी नहीं दे सका बेटा, याद कर भर आई आंखें
- हरिद्वार के लिए निकले संतोष को गौचर में किया क्वारंटीन
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उत्तराखंड में लॉकडाउन के कारण एक बेटा अपनी मां की अर्थी को कंधा भी नहीं दे सका। वह बार-बार चमोली पुलिस, स्वास्थ्य विभाग और प्रशासनिक कर्मचारियों से गुहार लगाता रहा, लेकिन किसी ने उसकी एक न सुनी।
आखिर जिलाधिकारी तक बात पहुंची तो वह अपने गांव तो पहुंच गया, लेकिन मां को आखिरी विदाई भी न दे सका। यह दर्द भरी कहानी कनखल की राधिका एन्क्लेव कालोनी में रहने वाले संतोष प्रसाद पुरोहित की है।
मूल रूप से चमोली जिले के गांव पुरोहित बुरसाड़ी निवासी संतोष एक पेट्रोल पंप पर कार्यरत हैं। बुधवार की सुबह उसकी मां सावित्री देवी का निधन हो गया। मां की अंतिम यात्रा में शामिल होने के लिए संतोष ने बाकायदा एसपी सिटी कार्यालय से अनुमति भी ली।
जब वे गौचर (चमोली) पहुंचे तो स्वास्थ्य विभाग की टीम ने संतोष और उसकी पत्नी को क्वारंटीरन कर दिया। वह सिस्टम से गिड़गिड़ाता रहा, लेकिन किसी ने उसकी नहीं सुनी। संतोष ने अमर उजाला से मदद मांगी।
अमर उजाला ने चमोली की जिलाधिकारी स्वाति भदौरिया, पुलिस कप्तान यशवंत सिंह को इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी तो सिस्टम हरकत में आया। आखिर में गेस्ट हाउस में बंद संतोष को गांव जाने की इजाजत दी गई।
संतोष ने अमर उजाला से बातचीत में बताया कि उसके गांव पहुंचने से पहले उसकी मां की चिता को उसके बड़े भाई राजन प्रसाद पुरोहित ने मुखाग्नि दे दी थी। संतोष का कहना है कि मां को आखिरी बार न देख पाने का मलाल जिंदगी भर रहेगा।