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उत्तराखंड में कोरोना: तीसरी लहर में 10 वर्ष तक के बच्चों को संक्रमण का कम खतरा 

Wed, 19 May 2021 11:30 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Wed, 19 May 2021 11:30 PM IST
सार

उत्तराखंड में बुधवार को सभी जिलों से बाल रोग विशेषज्ञों, सीएमओ, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक और मेडिकल कलेजों के 95 बाल रोग विशेषज्ञों ने वेबिनार में हिस्सा लिया।

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Coronavirus in Uttarakhand News: Children up to 10 years less risk of infection in Corona third wave
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कोरोना की दूसरी लहर के बाद अब सबको तीसरी लहर की चिंता सता रही है। यह चिंता इसलिए भी है क्योंकि वैश्विक स्तर पर इस लहर का असर बच्चों पर होने की आशंका जताई गई है। बुधवार को स्वास्थ्य विभाग की ओर से आयोजित वेबिनार में विशेषज्ञों ने संभावना जताई है कि जन्म से 10 वर्ष तक के बच्चों में कोरोना संक्रमण से खतरा अपेक्षाकृत कम होगा।

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स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. तृप्ति बहुगुणा, एचएनबी मेडिकल विवि के कुलपति डॉ. हेम चंद्र और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन निदेशक सोनिका भी शामिल हुईं। विशेषज्ञों ने कहा कि बच्चों के स्वास्थ्य के प्रति पूर्ण गंभीरता के साथ स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करना आवश्यक होगा। कोविड महामारी के दौरान सर्वप्रथम बच्चों एवं माता-पिता के लिए एक मानक प्रचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार की जाए, ताकि कोविड का मुकाबला करते समय किसी भी प्रकार की असुविधा न हो। माता-पिता एवं अभिभावकों में किसी भी प्रकार की घबराहट एवं भय का वातावरण उत्पन्न न हो, इसके लिए टेली मॉनिटरिंग एवं टेली कंसलटेशन को बढ़ावा दिया जाए।
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जनपद, तहसील एवं ब्लॉक स्तर पर सरकारी अस्पतालों में बच्चों के स्वास्थ्य उपचार से संबंधित समुचित संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित कर ली जाए। जैसे नवजात शिशुओं की देखभाल के लिए इनक्यूबेटर, निक्कू वार्ड आदि सुविधाओं को सुदृढ़ करना होगा। इस के लिए प्रत्येक जिला अस्पताल में कम से कम 20 बेड आरक्षित रखने होंगे। वेबिनार में कहा गया कि जन्म से 10 वर्ष तक के बच्चों को अधिक खतरे से बाहर माना जा सकता है, क्योंकि उनकी प्रतिरोधक क्षमता बेहतर होती है और नियमित टीकाकरण के कारण वह कोविड के हल्के लक्षणों से स्तर पर प्रभावित होकर आसानी से ठीक हो जाएंगे। इस आयु वर्ग में कोविड का प्रभाव कम रहेगा और साधारण लक्षण जैसे दस्त व श्वसन तंत्र संक्रमण जैसी स्थितियां हो सकती है।

10-18 वर्ष का आयु वर्ग कोविड संक्रमण के लिए अधिक संवेदनशील हैं और इनमें संक्रमण की गंभीरता भी देखने को मिलेगी। इस आयु के लिए उपचार की समुचित व्यवस्थाएं करनी होंगी और बड़े अस्पतालों, मेडिकल कॉलेज एवं एम्स जैसे संस्थानों को पूर्णत: आधुनिक उपकरणों एवं सुविधाओं से मजबूत बनाना होगा। कोविड मरीज की देखभाल के लिए बच्चों के मामलों में तीमारदार अथवा बच्चों की मां के लिए भी अधिक सतर्कता दिखानी होगी, क्योंकि बच्चों के साथ एक तीमारदार को देखभाल की अनुमति देना आवश्यक होगा। इस प्रकार तीमारदार के लिए भी उपचार के दौरान अलग कक्ष की व्यवस्था करनी होगी। कोविड संक्रमित मां से पैदा होने वाले बच्चों को बचाने के लिए विशेष व्यवस्था करनी होगी, ताकि प्रसव के उपरांत शिशु की देखभाल के लिए निर्धारित एसओपी के अनुसार उपचार आदि उपलब्ध कराया जा सके। इस कार्य के लिए अलग देखभाल कक्ष एवं प्रसव कक्ष की सुविधा भी आवश्यक है।

उपचार के लिए बच्चों को बड़े अस्पतालों में रैफर करने के दौरान उचित स्तर के ट्रांसपोर्टेशन की सुविधा बनानी होगी, जिसमें बच्चों वाला वेंटीलेटर सपोर्ट एवं स्मार्ट फोन के माध्यम से बच्चे की जीवन रक्षा संबंधी निगरानी हो सके और उसे सुरक्षित उच्च चिकित्सा इकाई तक पहुंचाया जा सके। स्वास्थ्य विभाग के पास उपलब्ध स्टॉफ का प्रशिक्षण प्राथमिकता का विषय है, ताकि बच्चों के उपचार से संबंधित प्रशिक्षण अभी से आरंभ कर दिया जाए और विपरीत परिस्थितियों में महामारी के दौरान बच्चों को उपचार मिल सके या घर पर ही देखभाल हो सकें। सुझाव दिया कि कोविड मामलों में कतई पैनिक की स्थिति उत्पन्न न की जाए, क्योंकि सामान्य लक्षणों में इसका उपचार निचले स्तर पर ही हो जाएगा।

तीसरी लहर में 10 से 18 वर्ष के बच्चों में संक्रमण का ज्यादा खतरा

कोरोना की तीसरी लहर की आशंका को देखते हुए विशेषज्ञों ने बच्चों और माता-पिता के लिए मानक प्रचालन प्रक्रिया तैयार करने पर जोर दिया है। इसी के साथ जिला, ब्लॉक और तहसील स्तर पर बच्चों के उपचार से संबंधित सभी स्वास्थ्य सुविधाएं जुटाने का सुझाव भी दिया गया है। 

स्वास्थ्य विभाग की ओर से आयोजित वेबिनार में विशेषज्ञों ने कहा कि कोरोना संक्रमण की तीसरी लहर में दस से 18 साल तक के बच्चों के प्रभावित होने की आशंका अधिक रहेगी। दस साल तक के बच्चों को खतरे से बाहर माना जा सकता है क्योंकि उनकी प्रतिरोधक क्षमता अधिक होती है और संक्रमण का उन पर कम प्रभाव होगा। 
यह भी कहा गया कि बच्चों की देखभाल करने वाले माता-पिता और अन्य किसी तीमारदार के लिए भी अलग से व्यवस्था करनी होगी। वेबिनार में गढ़वाल विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. हेमचंद्र पांडे ने कहा कि तीसरी लहर से बचाव की रणनीति में विशेषज्ञों के सुझाव महत्वपूर्ण हैं। 

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन निदेशक डॉ. सरोज नैथानी ने बताया कि बच्चों के स्वास्थ्य, उपचार और देखभाल को लेकर हिमालयन अस्पताल की ओर से एसओपी तैयार की जाएगी। इसके साथ ही अस्पताल के स्तर से प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। वेबिनार में कई बाल रोग विशेषज्ञ भी शामिल हुए। 

उत्तरकाशी में सभी पंचायत प्रतिनिधियों को टीके लगे
पंचायतीराज विभाग ने प्रदेश में ग्राम प्रधानों का टीकाकरण का पहला चरण पूरा कर लिया है। सचिव हरि चंद्र सेमवाल ने बताया कि सभी पंचायत प्रतिनिधियों का टीकाकरण होना है और इसके लिए जिलाधिकारियों को निर्देश दिए जा चुुके हैं। उत्तरकाशी में सभी पंचायत प्रतिनिधियों का टीकाकरण किया चुका है।

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