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दिल्ली-चंडीगढ़ समेत कई प्रदेशों से देहरादून पहुंच रहे मरीज, बेहतर इलाज और सुविधा की आस में रेफर करा रहे लोग

Sat, 01 May 2021 02:37 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal मनीष चंद्र भट्ट, अमर उजाला, देहरादून
मनीष चंद्र भट्ट, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Sat, 01 May 2021 02:37 PM IST
सार

हालत यह है कि राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली जहां पर अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), सफदरजंग जैसे बड़े अस्पताल हैं। 

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coronavirus in uttarakhand latest news : other state patients reach dehradun for better treatment
अस्पताल - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो

विस्तार

कोरोना संक्रमण के भयंकर रूप से स्वास्थ्य और चिकित्सा सुविधाओं को लेकर पुराने तमाम ट्रेंड भी बदल रहे हैं। हालत यह है कि राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली जहां पर अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), सफदरजंग जैसे बड़े अस्पताल हैं।

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वहां से भी मरीजों को देहरादून और अन्य छोटे शहरों के लिए रेफर किया जा रहा है। कई मरीज खुद भी दिल्ली से छोटे शहरों के लिए रेफर करने का अनुरोध डॉक्टरों से कर रहे हैं। ऐसा वहां पर व्यवस्थाएं कम पड़ने के कारण हो रहा है, लेकिन देहरादून या अन्य शहरों में आकर उन्हें बेड, ऑक्सीजन या वेंटिलेटर जैसी सुविधाएं न मिलकर मायूसी हाथ लग रही है।
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केस एक : कर्णप्रयाग, चमोली निवासी राजीव चौंकियाल दिल्ली में नौकरी करते हैं। पिछले दिनों वह कोरोना संक्रमित हो गए। दिल्ली में कई जगह अस्पतालों में बेड की तलाश की, बेड बड़ी मुश्किल से मिला। बेड तो मिल गया, लेकिन ऑक्सीजन और वेंटिलेटर नहीं मिला। वहां से थक हार कर परिजनों ने देहरादून स्थित अपने परिचितों से देहरादून में अस्पताल में बेड और वेंटिलेटर उपलब्ध करवाने की गुहार लगाई। साथ ही डॉक्टरों से मरीज को देहरादून रेफर करने का अनुरोध किया। अभी भी वह संक्रमण से जूझ रहे हैं।

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केस दो :  देहरादून निवासी एक व्यक्ति को कोरोना संक्रमण होने पर परिजन बेहतर इलाज की आस में दिल्ली लेकर पहुंचे। वहां बड़े-बड़े अस्पतालों के चक्कर काटे, लेकिन बेड तक नहीं मिला। बमुश्किल दिल्ली के बत्रा अस्पताल में बाहर कुर्सी पर बैठा कर उन्हें ऑक्सीजन दी गई। तब देहरादून के अस्पताल में आने के लिए वह एंबुलेंस की तलाश कर रहे थे, लेकिन ऑक्सीजन वाली एंबुलेंस नहीं मिली। इसके चलते देहरादून से परिजन ऑक्सीजन वाली एंबुलेंस ले जाकर उन्हें लाने के लिए तैयार हुए। इसी बीच बेड मिला, लेकिन डॉक्टर लगातार उन्हें वेंटिलेटर की व्यवस्था के लिए ले जाने के लिए कह रहे हैं। परिजन अब मरीज को देहरादून लाने की बात कह रहे हैं।

वर्तमान में इन शहरों में भी हालात बदतर

आमतौर पर उत्तराखंड के विभिन्न जिलों से देहरादून, हल्द्वानी या ऊधमसिंह नगर के अस्पतालों के लिए मरीजों को रेफर किया जाता है। इन जगह से भी दिल्ली के बड़े अस्पतालों के अलावा रोहतक व चंडीगढ़ पीजीआई में मरीज रेफर किए जाते हैं। वर्तमान में इन शहरों में भी हालात बद से बदतर हैं।

चिकित्सकीय सुविधाएं बेमानी साबित हो रही हैं। ऐसे में कई मरीजों को देहरादून समेत उत्तराखंड के अन्य शहरों के लिए रेफर किया जा रहा है। दिल्ली से चंपावत रेफर की गई कोरोना संक्रमित महिला इसका ताजा उदाहरण है। दिल्ली निवासी कोरोना संक्रमित महिला को वहां वेंटिलेटर न मिलने पर ऑनलाइन दूरस्थ जनपद चंपावत में उपलब्धता का पता चला। आनन-फानन परिजनों ने महिला को दिल्ली से चंपावत के अस्पताल रेफर कराया, लेकिन वेंटिलेटर मिलने के बावजूद महिला की मौत हो गई।

सरकार का स्टैंड समझ में नहीं आ रहा : डॉ. चौधरी

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं उत्तराखंड के प्रदेश महासचिव वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. डीडी चौधरी ने बताया कि बड़े-शहरों में अस्पतालों में जगह नहीं बची है। देहरादून में भी वेंटिलेटर ऑक्सीजन, रेमडेसिविर और जरूरी चिकित्सा सुविधाओं का घोर अकाल हो गया है। सरकार की स्थिति समझ में नहीं आ रही है। सब कुछ अव्यवस्थित हो गया है।

सरकार को इसे ठोस कदम उठाकर ठीक करना होगा। ऑक्सीजन सिलेंडर, जीवन रक्षक दवाओं आदि के जमाखोरी और कालाबाजारी रोकने के साथ ही मरीजों को समुचित चिकित्सा व्यवस्था उपलब्ध कराने के लिए सरकार को सभी चीजों का नियंत्रण अपने हाथ में लेना होगा।

उन्होंने बताया कि उनके क्लीनिक में भी दिल्ली, मुंबई जैसे बड़े शहरों से लोगों के चिकित्सीय परामर्श के लिए फोन आ रहे हैं। कई लोग बेड और ऑक्सीजन की उपलब्धता के बारे में भी पूछ रहे हैं। अन्य निजी अस्पतालों में भी इसी तरह की स्थितियां हैं। कोरोना संक्रमण के तेजी से हो रहे प्रसार को रोकने के लिए सरकार को कठोर कदम उठाने की सख्त आवश्यकता है।

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