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उत्तराखंड : ऑक्सीजन सहित अन्य सुविधाओं के उचित प्रबंधन पर सरकार से हाईकोर्ट ने किया जवाब तलब
Thu, 13 May 2021 01:39 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल
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Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal
Updated Thu, 13 May 2021 01:39 PM IST
सार
नैनीताल हाईकोर्ट ने हल्द्वानी में ऑक्सीजन और आईसीयू बेड की कमी और टीकाकरण, आरटीपीसीआर, प्लाज्मा बैंक के उचित प्रबंधन के लिए दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद सरकार को जवाब दाखिल करने के निर्देश देते हुए मामले की अगली सुनवाई के लिए 20 मई की तिथि नियत की।
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नैनीताल हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
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विस्तार
नैनीताल हाईकोर्ट ने हल्द्वानी में ऑक्सीजन और आईसीयू बेड की कमी और टीकाकरण, आरटीपीसीआर, प्लाज्मा बैंक के उचित प्रबंधन के लिए दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद सरकार को जवाब दाखिल करने के निर्देश देते हुए मामले की अगली सुनवाई के लिए 20 मई की तिथि नियत की।
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मुख्य न्यायाधीश आरएस चौहान एवं न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार हल्द्वानी निवासी दीपक बल्यूटिया ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि हल्द्वानी में ऑक्सीजन व आईसीयू बेड की भारी कमी है, जबकि संपूर्ण कुमाऊं में कोविड के गंभीर मरीजों का इलाज हल्द्वानी में ही हो रहा है।
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इससे हल्द्वानी के अस्पतालों में अत्यधिक दबाव है और व्यवस्थाओं की कमी है। याचिकाकर्ता की ओर से आरटीपीसीआर टेस्ट करने के लिए उचित योजना बनाने, हल्द्वानी में बढ़ते दबाव व प्लाज्मा की जरूरत को देखते हुए प्लाज्मा बैंक बनाने की प्रार्थना की गई। याचिका में कहा गया कि सरकार ने टीकाकरण अभियान के कुशल प्रबंधन के लिए कोई कदम नहीं उठाए हैं।
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प्राइवेट व सरकारी अस्पतालों में टीकाकरण के लिए बैठने की उचित व्यवस्था तक नहीं है और टीकाकरण के लिए भारी भीड़ जमा हो रही है। इससे संक्रमण का खतरा है। टीकाकरण के लिए एक दिन में 150 से 200 व्यक्ति अस्पताल में बुलाए जाते हैं। आम जनमानस को पहले तो 250 रुपये की पर्ची के लिए लंबी लाइन लगानी पड़ती है। इसके बाद रजिस्टर में उनकी लिस्ट बनाई जाती है। ऐसी परिस्थिति से निपटने के लिए सरकारी व गैर सरकारी स्कूल जो बंद पडे़ हैं उनमें कोविड टीकाकरण किया जाए।
चयन और पदोन्नत वेतनमान पर हाईकोर्ट के आदेश को सभी शिक्षकों पर लागू करे विभाग
राजकीय एलटी समायोजित, पदोन्नत शिक्षक संघर्ष मंच ने मुख्यमंत्री से चयन और पदोन्नत वेतनमान पर हाईकोर्ट के आदेश को समस्त शिक्षकों पर समान रुप से लागू करने की मांग की है। शिक्षक संघर्ष मंच के प्रदेश अध्यक्ष दिगम्बर फुलोरिया ने कहा कि एलटी में समायोजित, पदोन्नत शिक्षकों को उनकी पुरानी सेवाओं का लाभ नहीं दिया जा रहा है।
राजकीय एलटी समायोजित, पदोन्नत शिक्षक संघर्ष मंच ने कहा कि जिन शिक्षकों का बेसिक से सहायक अध्यापक एलटी में समायोजन, पदोन्नत हुआ है। उन शिक्षको को न तो प्रमोशन का लाभ मिला न समायोजन का। इतना जरूर हुआ कि जिन शिक्षकों ने इसके लिए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की, हाईकोर्ट के आदेश के बाद उन शिक्षकों को उनकी बेसिक की पुरानी सेवाओं को जोड़कर इसका लाभ दिया गया।
जबकि अन्य शिक्षकों को छोड़ दिया गया। शिक्षक संघर्ष मंच ने कहा कि सचिवालय सेवा में विभिन्न विभागों से जो कर्मचारी आए हैं उनकी पुरानी सेवाओं को जोड़कर उन्हें चयन और पदोन्नत वेतनमान दिया गया, लेकिन शिक्षा विभाग में ऐसा नहीं है। यहां एक ही विभाग में वर्षों की सेवा के बावजूद जो शिक्षक बेसिक से एलटी में समायोजित, पदोन्नत हुए उन्हें उनकी पुरानी सेवाओं का लाभ नहीं दिया जा रहा है।