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Dehradun News: दवा डालकर धनिया की फसल को नष्ट कर रहे किसान
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मंडी में नहीं जौनसार के धनिया की मांग, 10 गुना तक गिरे दाम
पिछले साल 50 से 60 रुपये प्रति किलोग्राम बिका था धनिया
जौनसार बावर क्षेत्र में धनिया की खेती इस बार किसानों के लिए नुकसान का सौदा साबित हो रही है। धनिया के दाम पिछले साल के मुकाबले 10 फीसदी तक गिर गए है। फसल को बेचकर किसानों को ढुलान का किराया भाड़ा भी नहीं मिल पा रहा है। कई किसानों ने खेतों में धनिया की खड़ी फसल छोड़ दी है। वहीं कुछ किसान ऐसे भी है जो दवा डालकर फसल को नष्ट कर रहे हैं।
जौनसार बावर जनजातीय क्षेत्र के साहिया और आसपास के सैकड़ों गांवों में धनिया प्रमुख नकदी फसल है। किसान छह महीने गोबर की खाद बनाकर फसल के लिए तैयारी करते हैं। अप्रैल माह में फसल की बुवाई शुरू होती है। अगस्त महीने में खेतों से धनिया निकलना शुरू हो जाता है। किसान साहिया, विकासनगर और देहरादून स्थित कृषि उत्पादन मंडी में धनिया बेचने के लिए लाते है।
पिछले साल धनिया का भाव 60 रुपए प्रति किलो से 80 रुपए प्रति किलो तक था। पिछले बार जबरदस्त मुनाफे के चलते किसानों ने इस बार और अधिक मात्रा में धनिया की खेती की, लेकिन दाम निचले स्तर तक पहुंचने के चलते किसानों के चेहरे पर मायूसी छाई हुई है। किसानों को धनिया के लिए प्रति किलोग्राम पांच से सात रुपये ही मिल पा रहे हैं।
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किसान कमल सिंह, नारायण सिंह, भीम सिंह चौहान, दीवान सिंह, भोपाल राठौर आदि का कहना है कि धनिया की इतनी मंदी हमने पहले कभी नहीं देखी। हरी मिर्च और बीन के भी वाजिब दाम नहीं मिल पा रहा है। धनिया की फसल बेचकर लागत तो दूर माल भाड़ा भी वसूल नहीं हो पा रहा है।
कहा कि फसल को मंडी तक ले जाने में किसानों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। धनिया की फसल को खेत में खड़ा छोड़ना और नष्ट करना ही अब किसानों के पास अंतिम विकल्प बचा है।
इंदौर का धनिया पड़ रहा भारी
कृषि मंडी साहिया के उपाध्यक्ष मनोज पंवार का कहना है कि मध्यप्रदेश के इंदौर और अन्य प्रदेशों का धनिया भारी मात्रा में मंडियों में पहुंच रहा है। यही कारण है कि स्थानीय धनिया की मांग कम है। मानसून सीजन में चकराता क्षेत्र के किसान धनिया की फसल का इंतजार करते है।
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पिछले साल 50 से 60 रुपये प्रति किलोग्राम बिका था धनिया
जौनसार बावर क्षेत्र में धनिया की खेती इस बार किसानों के लिए नुकसान का सौदा साबित हो रही है। धनिया के दाम पिछले साल के मुकाबले 10 फीसदी तक गिर गए है। फसल को बेचकर किसानों को ढुलान का किराया भाड़ा भी नहीं मिल पा रहा है। कई किसानों ने खेतों में धनिया की खड़ी फसल छोड़ दी है। वहीं कुछ किसान ऐसे भी है जो दवा डालकर फसल को नष्ट कर रहे हैं।
जौनसार बावर जनजातीय क्षेत्र के साहिया और आसपास के सैकड़ों गांवों में धनिया प्रमुख नकदी फसल है। किसान छह महीने गोबर की खाद बनाकर फसल के लिए तैयारी करते हैं। अप्रैल माह में फसल की बुवाई शुरू होती है। अगस्त महीने में खेतों से धनिया निकलना शुरू हो जाता है। किसान साहिया, विकासनगर और देहरादून स्थित कृषि उत्पादन मंडी में धनिया बेचने के लिए लाते है।
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पिछले साल धनिया का भाव 60 रुपए प्रति किलो से 80 रुपए प्रति किलो तक था। पिछले बार जबरदस्त मुनाफे के चलते किसानों ने इस बार और अधिक मात्रा में धनिया की खेती की, लेकिन दाम निचले स्तर तक पहुंचने के चलते किसानों के चेहरे पर मायूसी छाई हुई है। किसानों को धनिया के लिए प्रति किलोग्राम पांच से सात रुपये ही मिल पा रहे हैं।
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किसान कमल सिंह, नारायण सिंह, भीम सिंह चौहान, दीवान सिंह, भोपाल राठौर आदि का कहना है कि धनिया की इतनी मंदी हमने पहले कभी नहीं देखी। हरी मिर्च और बीन के भी वाजिब दाम नहीं मिल पा रहा है। धनिया की फसल बेचकर लागत तो दूर माल भाड़ा भी वसूल नहीं हो पा रहा है।
कहा कि फसल को मंडी तक ले जाने में किसानों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। धनिया की फसल को खेत में खड़ा छोड़ना और नष्ट करना ही अब किसानों के पास अंतिम विकल्प बचा है।
इंदौर का धनिया पड़ रहा भारी
कृषि मंडी साहिया के उपाध्यक्ष मनोज पंवार का कहना है कि मध्यप्रदेश के इंदौर और अन्य प्रदेशों का धनिया भारी मात्रा में मंडियों में पहुंच रहा है। यही कारण है कि स्थानीय धनिया की मांग कम है। मानसून सीजन में चकराता क्षेत्र के किसान धनिया की फसल का इंतजार करते है।