{"_id":"65f4a71ffe4929e74e0b3454","slug":"contract-workers-who-were-on-strike-for-a-year-were-removed-dehradun-news-c-5-1-drn1030-372032-2024-03-16","type":"story","status":"publish","title_hn":"Dehradun News: एक साल से धरने पर बैठे नौकरी से हटाए गए संविदाकर्मी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Dehradun News: एक साल से धरने पर बैठे नौकरी से हटाए गए संविदाकर्मी
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
I
II
I
I
I
Iनौकरी से हटाए जाने के बाद सेवा विस्तार की मांग को लेकर धरने पर बैठे कोरोना कर्मचारियों को एक साल पूरा हो गया है। कोरोना काल में कार्यरत रहे संविदा कर्मचारी नौकरी में सेवा विस्तार को लेकर पिछले एक साल से एकता विहार में धरने पर बैठे हैं। कर्मचारियों ने 110 दिन की भूख हड़ताल भी की है।
I
Iशुक्रवार को धरना स्थल एकता बिहार में धरने पर बैठे कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और स्वास्थ्य मंत्री, मुख्यमंत्री से नाराजगी व्यक्त की। संगठन के अध्यक्ष संतोष राणा ने बताया कि सभी कोविड कर्मचारी अपने क्षेत्र में जाकर चुनाव बहिष्कार करेंगे। घर-घर जाकर अपना दुख सभी गांव वालों को बताएंगे कि सरकार ने उनकी दुविधा बिल्कुल नहीं सुनी। आज भी कोरोना कर्मचारियों का भविष्य अंधकार में डूबा हुआ है। वह कर्मचारी जिन्होंने आपदा के समय अपने घरों से निकलकर सरकार का साथ दिया था। आज सरकार उनकी मांग नहीं सुन रही है।I
विज्ञापन
II
I
I
I
Iनौकरी से हटाए जाने के बाद सेवा विस्तार की मांग को लेकर धरने पर बैठे कोरोना कर्मचारियों को एक साल पूरा हो गया है। कोरोना काल में कार्यरत रहे संविदा कर्मचारी नौकरी में सेवा विस्तार को लेकर पिछले एक साल से एकता विहार में धरने पर बैठे हैं। कर्मचारियों ने 110 दिन की भूख हड़ताल भी की है।
I
Iशुक्रवार को धरना स्थल एकता बिहार में धरने पर बैठे कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और स्वास्थ्य मंत्री, मुख्यमंत्री से नाराजगी व्यक्त की। संगठन के अध्यक्ष संतोष राणा ने बताया कि सभी कोविड कर्मचारी अपने क्षेत्र में जाकर चुनाव बहिष्कार करेंगे। घर-घर जाकर अपना दुख सभी गांव वालों को बताएंगे कि सरकार ने उनकी दुविधा बिल्कुल नहीं सुनी। आज भी कोरोना कर्मचारियों का भविष्य अंधकार में डूबा हुआ है। वह कर्मचारी जिन्होंने आपदा के समय अपने घरों से निकलकर सरकार का साथ दिया था। आज सरकार उनकी मांग नहीं सुन रही है।I
विज्ञापन