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कांग्रेस कर सकती है अपने सहयोगी मंत्रियों से किनारा

Thu, 09 Oct 2014 02:12 PM IST
अनूप वाजपेयी/ अमर उजाला, देहरादून
अनूप वाजपेयी/ अमर उजाला, देहरादून Updated Thu, 09 Oct 2014 02:12 PM IST
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congress left pdf in uttarakhand.

उत्तराखंड में कांग्रेस अब प्रोग्रेसिव डेमोक्रेटिव फ्रंट (पीडीएफ) कोटे के चार सहयोगी मंत्रियों से किनारा कर सकती है।

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गढ़वाल दौरे पर निकले प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष किशोर उपाध्याय और प्रदेश सहप्रभारी संजय कपूर को सहयोगी मंत्रियों के क्षेत्र में अपनों की आवाज गठबंधन समाप्त करने की ओर ले जा सकती है।

हालांकि सीएम हरीश रावत कतई नहीं चाह रहे हैं कि सहयोगियों से किनारा किया जाए। कांग्रेस बसपा के तीन विधायकों (दो निलंबित) के साथ अगले ढाई साल पूरे करना चाहती है।
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प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पर पार्टी के अंदर दोहरा दबाव बन रहा है। एक ओर तीन बार जीत चुके वरिष्ठ विधायकों को सरकार में मंत्री बनाने का दबाव है, वहीं चुनाव के ढाई साल रह जाने पर उन वरिष्ठ नेताओं की चिंता बढ़ गई है जिन्हें हराकर सहयोगी मंत्री बने हैं।

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किशोर उपाध्याय को झेलनी पड़ी नाराजगी

congress left pdf in uttarakhand.

प्रदेश अध्यक्ष खुद भी इस सूची में शामिल हैं। पर्यटन मंत्री दिनेश धनै ने किशोर को मामूली अंतर से हराया था। हाल केदौरे में किशोर उपाध्याय को पार्टी कार्यकर्ताओं की नाराजगी झेलनी पड़ी।

कांग्रेसी नेताओं व कार्यकर्ताओं का आरोप था कि उनकी सरकार में उन्हें ही उपेक्षा का सामना करना पड़ रहा है। सहयोगी मंत्री इलाके में उन्हीं लोगों को महत्व दे रहे हैं, जो उनके साथ जुड़े हैं।

मंत्री प्रसाद नैथानी से हारे पूर्व मंत्री शूरवीर सिंह सजवाण और प्रीतम पंवार से हारे केदार सिंह रावत ने भी अपने इलाके में कांग्रेस की जमीन उखड़ने और कार्यकर्ताओं का मनोबल टूटने की शिकायत प्रदेश अध्यक्ष और मुख्यमंत्री से की है।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं का तर्क है कि ढाई साल अगर हमें उनकी जरूरत थी तो इस दौरान उनके पास भी मंत्री पद रहा है। अब जब कांग्रेस के पास पर्याप्त विधायक हैं और अगले चुनाव में पार्टी को फिर से मैदान में उतरना है तो फ्र्रैंडली मैच अब ज्यादा लंबा नहीं चलना चाहिए।

कांग्रेस कार्यकर्ताओं में असंतोष

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गढ़वाल दौरे में प्रदेश प्रभारी और प्रदेश अध्यक्ष के साथ मौजूद धीरेंद्र प्रताप सीधे तौर पर गठबंधन टूटने की बात तो नहीं करते, लेकिन उनका कहना है कि अब रिश्तों की समीक्षा जरूर होनी चाहिए।

उधर, मुख्यमंत्री खेमा कतई नहीं चाहता कि फिलहाल मंत्रिमंडल में किसी प्रकार का बदलाव हो। दरअसल सहयोगियों के हटने के बाद पार्टी में घमासान तेज होने के आसार बढ़ जाएंगे।

यह हैं पीडीएफ में शामिल

मंत्री प्रसाद नैथानी, प्रीतम पंवार (यूकेडी), दिनेश धनै और हरीशचंद्र दुर्गापाल के अलावा फ्रंट में बसपा के निलंबित विधायक सुरेंद्र राकेश और हरिदास के अलावा विधायक सरवत करीम अंसारी शामिल हैं।

जिन इलाकों से सहयोगी नेता जीत कर आए हैं, वहां के कांग्रेस कार्यकर्ताओं में असंतोष है, उनका कहना है कि उनकी सुनी नहीं जा रही है। मैंने इस दौरान कई क्षेत्रों का दौरा किया है, हमारी कोशिश है कि कोई रास्ता निकाला जाए ताकि कार्यकर्ता अपने को कतई उपेक्षित न समझें।
- किशोर उपाध्याय, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष

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