अपनी गर्दन फंसती देख सीएम रावत ने खेला स्कैम खुलासे का दांव
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उत्तराखंड मुख्यमंत्री हरीश रावत स्टिंग मामले में अपनी गर्दन फंसती देख भाजपा राज में हुए घोटालों की जांच सार्वजनिक कर सकते हैं। उन्होंने कई प्रकरणों को गिनाते हुए जांच के खुलासे के संकेत भी दिए।
इसे उनकी सोची समझी रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। जांच आयोग पहले ही इन जांच रिपोर्टों को सरकार को सौंप चुका है। समझा जा रहा है कि अब चुनाव से पहले इन्हें सार्वजनिक कर भाजपा को राजनीतिक नुकसान पहुंचाया जा सकता है।
पूर्ववर्ती भाजपा सरकार में इक्का दुक्का नहीं, बल्कि 58 कथित घोटालों की जांच आयोग को सौंपी गई थी। इसमें करोड़ों की भूमि से संबंधित स्टर्डिया प्रकरण, बीज घोटाले सहित कई मामलों की जांच डेढ़ साल पहले पूरी हो चुकी है और इसके लिए गठित जांच आयोग इसे सरकार को सौंप चुका है, लेकिन अब चुनाव से ठीक पहले सरकार को इन प्रकरणों की याद आई है। जिसे सरकार सार्वजनिक करने का मन बना रही है। मुख्यमंत्री का कहना है कि जनता को भी जांच में आए तथ्यों को जानने का अधिकार है।
सीबीआई के सामने पेशी से ठीक एक दिन पहले खोले पत्ते
स्टिंग मामले में सीबीआई के सामने पेशी से ठीक एक दिन पहले मुख्यमंत्री ने इन प्रकरणों के खुलासे के संकेत देते हुए कहा कि वे समझते हैं कि जनता भी यह जाने कि जांच में क्या तथ्य आए हैं? मुख्यमंत्री ने कहा कि एनएचएम प्रकरण की उन्होंने सीबीआई से जांच की संस्तुति करने को कहा था, वहीं आपदा के मामले में भी सरकार जांच को तैयार हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इन प्रकरणों को सार्वजनिक करने में कोई दिक्कत नहीं है। मुख्यमंत्री ने कांग्रेस के बागी विधायक और पूर्व मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत का नाम लिए बगैर उन पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि देहरादून के सेलाकुई जैसे क्षेत्र में सौ बीघा जमीन यूं ही किसी को नहीं मिलती।
इन प्रकरणों की दबी है जांच
सरकारी उद्यानों को लीज पर दिए जाने, शीतगृह से संबंधित, पर्यटन व आबकारी घोटाला, फर्जी तरीके से पॉलीटेक्निक में प्रवेश, नैनीताल व अल्मोड़ा में जमीन खरीद व भू उपयोग परिवर्तन में बरती अनियमितता, दैवी आपदा मद, दवाओं की खरीद, फार्मेसिस्टों की भर्ती, नेता प्रतिपक्ष रहे हरक सिंह पर वर्ष 2002-07 के बीच घोटालों के आरोपों की जांच, कंप्यूटर खरीद मामला।
सबसे कम खर्च करने वाला सीएम हूं
मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों को सरकार में दायित्व देकर उन्होंने उनका सम्मान किया है। जिसकी जहां उपयोगिता समझी, उसे वहां दायित्व दिया गया। अब तक जितने भी मुख्यमंत्री रहे हैं, इस मद में वे सबसे कम खर्च करने वाले सीएम हैं।