सीएम रावत के 'छापामार' अंदाज ने सबको चौंकाया
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नए साल के दूसरे दिन भी मुख्यमंत्री हरीश रावत औचक निरीक्षण के लिए निकले। दोपहर में राजकीय नारी निकेतन केदारपुरम, बाल सदन और बाल सुधार गृह गए। कंबल, साड़ियां और मिठाइयां बांट उनको नए साल का तोहफा दिया। रात में ठंड से ठिठुरते लोगों का हाल जानने रैनबसेरों में गए। शहर में अलाव जलते नहीं मिले तो सख्ती भी दिखाई।
पहले मुख्यमंत्री का बाल बनिता आश्रम, तिलक रोड जाना तय था पर अचानक वे राजकीय नारी निकेतन केदारपुरम पहुंच गए। हरीश रावत ने शुक्रवार को भी पुलिस, अधिकारियों और मीडियाकर्मियों को अपने अंदाज में चौंका दिया।
दोपहर करीब तीन बजे अचानक वायरलेस पर सूचना प्रसारित हुई कि मुख्यमंत्री केदारपुरम की तरफ मुड़ गए हैं। यह सुनते ही तिलक रोड पर जमे अधिकारी व अन्य सभी नारी निकेतन की तरफ दौड़ पड़े। इससे पहले उन्होंने दिन की शुरुआत मुख्यमंत्री आवास पर आये फरियादियों से मिलकर की।
संवासिनियों से पूछी समस्याएं
समय तीन बजकर अड़तालीस मिनट पर मुख्यमंत्री का काफिला केदारपुरम स्थित नारी निकेतन पहुंचा। दाखिल होते ही मुख्यमंत्री ने प्रभारी को बुला कर संवासिनियों की संख्या पूछी। उसके बाद संवासिनियों के रहने, रसोई, दवाखाना और प्रशिक्षण गृह का निरीक्षण किया और उनकी समस्याएं भी पूछी। खराब मिली रोटी बनाने वाली इलेक्ट्रानिक मशीन को ठीक कराने के निर्देश दिए।
सीएम ने कहा ‘किम छो? रामरो?’
कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री को तीस वर्षीय तुलसी से मिलाते हुए बताया कि यह नेपाल की रहने वाली है और घर जाना चाहती है। मुख्यमंत्री ने तुलसी से नेपाली भाषा में पूछा, ‘किम छो, रामरो?’ फिर समाज कल्याण अधिकारी से कहा कि घरवालों का पता कर तुलसी को घर तक पहुंचाने की व्यवस्था की जाए।
सोनी को बनाया केयर टेकर
वहां मौजूद 21 वर्षीय सोनी भट्ट से मुख्यमंत्री ने नाम पूछा तो उसने अंग्रेजी में जवाब दिया। प्रभारी सरला रावत ने बताया कि सोनी रुद्रप्रयाग जिले की है और उसके मां-बाप नहीं हैं। रिश्तेदार यहां छोड़ गए हैं। इस पर निर्देश दिए कि विक्षिप्त महिलाओं की देखभाल के लिए सोनी को केयर टेकर और मीनाक्षी व प्रभा को सहायक केयर टेकर के रूप में तैनात किया जाय।
पंद्रह हजार का कन्यादान
लगभग साढ़े चार बजे वे नारी निकेतन से सटे शिशु सदन (बाल अनाथालय) में गए। वहां शादी का मंडप सजा था। बताया गया कि बारात कुछ देर पहले विदा हुई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ओह, मैं समय पर पहुंचता तो कन्या की विदाई में शामिल हो जाता। निर्देश दिए कि इस कन्या को मेरी ओर से पंद्रह हजार रुपए कन्यादान के रूप में दे दें। इस दौरान बच्चों ने स्वागत गीत भी गाए।
अपने पैरों पर खड़े होने की ख्वाहिश
बाल सदन की लड़कियों ने मुख्यमंत्री से कहा कि ‘सर, हम बालिग होने पर अपने पैरों पर खड़ा होना चाहते हैं। यहां पर प्रशिक्षण की कुछ व्यवस्था करा दें ताकि हम बाद में नौकरी कर सकें।’ मुख्यमंत्री ने जल्द इस दिशा में कुछ करने का भरोसा दिया।
बच्चों के साथ कैरम खेला
उसके बाद मुख्यमंत्री केदारपुरम में बने बाल सुधार गृह पहुंचे। यहां पर बच्चों के साथ कैरम खेला। बच्चों से कहा कि अच्छे इंसान बनो, कोई गलत काम न करना। यहां कई कमरों में बिजली की उचित व्यवस्था नहीं थी। कहीं ट्यूब लाइट खराब थीं तो कुछ शीशे टूटे मिले। छत पर गंदे कपड़ों का ढेर पड़ा हुआ है।
इस मौके पर विधायक उमेश शर्मा ‘काऊ’, मुख्यमंत्री के मीडिया प्रभारी सुरेंद्र कुमार, मीडिया समन्वयक जसवीर रावत, जिला समाज कल्याण अधिकारी राम अवतार, बाल कल्याण समिति की सदस्या किरण उल्फत आदि मौजूद थे।
‘अरे ये तो मुख्यमंत्री हैं’
करीब पांच बजे मुख्यमंत्री का काफिला हरिद्वार बाइपास से धर्मपुर की तरफ चला। तभी दून स्टेशन से शताब्दी एक्सप्रेस दिल्ली के लिए रवाना हो रही थी। इसलिए माता मंदिर फाटक बंद था। काफिला करीब पांच मिनट रुका रहा। इस दौरान मुख्यमंत्री कार से ही लोगों को हाथ हिलाते हुए नजर आए। तभी वहां मौजूद कुछ बच्चे बोल पड़े ‘अरे ये तो मुख्यमंत्री हैं।’
अधिकारियों को फोन पर दिए निर्देश
: नारी निकेतन में मानसिक विक्षिप्त संवासिनियों को नहलाने और देखरेख के लिए दो अन्य कर्मचारी नियुक्त किए जाएं।
: जो बच्चे पढ़ाई में अच्छे हैं उन्हें आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों के मानदेय पर दूसरे बच्चों को पढ़ाने के लिए नियुक्त किया जाए।
: नारी निकेतन में प्रशिक्षित नर्स की व्यवस्था की जाए।
: अस्पताल ले जाने के लिए वाहन की व्यवस्था हो।
: नारी निकेतन की अधीक्षिका का पद भरा जाए।
: जिला प्रोबेशन अधिकारी के एक अतिरिक्त पद का प्रस्ताव तैयार किया जाए।
: साफ सफाई पर विशेष ध्यान दिया जाए और इन स्थानों का नियमित निरीक्षण करें।