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भागीरथी इको सेंसिटिव जोन के चलते चीन सीमा और असुरक्षित

Sun, 16 Jul 2017 12:05 PM IST
रजा शास्त्री/ अमर उजाला, देहरादून
रजा शास्त्री/ अमर उजाला, देहरादून Updated Sun, 16 Jul 2017 12:05 PM IST
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china border more sensitive due to bhagirathi eco sensitive zone
china border

उत्तरकाशी जिले में भागीरथी इको सेंसिटिव जोन के ‘भंवर’ में फंसी चीन सीमा और असुरक्षित हो गई है। इको सेंसिटिव जोन की वजह से इन क्षेत्रों में न तो सड़क बन पा रही है और न कोई विकास कार्य हो पा रहा है।

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इस वजह से चीन की नापाक हरकतों की सूचना सेना और प्रशासन को देने वाले गांव लगभग खाली हो गए हैं। जोन का मामला जल्द  सुलझवाने में मदद करने के लिए प्रदेश शासन ने रक्षा मंत्रालय को पत्र लिखा था, लेकिन उसका भी जवाब नहीं आया। इको सेंसिटिव जोन की वजह से चारधाम आल वेदर रोड भी जोन क्षेत्र में अटक गई है।
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यह उम्मीद की जा रही थी कि ‘डबल इंजन’ की सरकार से भागीरथी इको सेंसिटिव जोन का मसला जल्दी सुलझ जाएगा, लेकिन ऐसा कुछ हो नहीं पा रहा है। इको सेंसिटिव जोन का हल न निकलने से सबसे अधिक असर चीन सीमा वाले क्षेत्र पर आ रहा है। यहां असुरक्षा बढ़ रही है। चीन की गतिविधियां की जानकारी देने वाले मुखवा और जातुंग गांव लगभग खाली हो गए हैं। क्षेत्र के खुशाल सिंह नेगी और अन्य लोगों ने बताया कि ये गांव 80 फीसदी खाली हो गए हैं।
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चीन की सरहद से बिल्कुल सटे गांव जातुंग में भोटिया जाति के लोग अब साल में एक बार मेले में जाते हैं। यह गांव चीन सीमा की गतिविधियों की जानकारी के लिहाज से बहुत अहम है। वर्ष 1962 के युद्ध के बाद गांववालों को बगोरी गांव शिफ्ट कर दिया गया था। नेगी का कहना है कि कूटनीतिक कारणों से अब इन्हें फिर जातुंग में बसाने की योजना बनाई जा रही है। लेकिन हालात ये हैं कि वर्ष 1983 में स्वीकृत चीन सरहद तक जाने वाली मुखवा रोड अभी तक नहीं बन पाई है। अगर किसी को जाना होता है तो पैदल जाता है। क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि इको सेंसिटिव जोन पर निर्णय न होने से यहां अभी तक ऑल वेदर रोड का सर्वे तक रुका हुआ है।

चीन ने बना लीं शानदार सड़कें
उत्तरकाशी में जहां सरहद के नजदीक जाने वाले गांवों में ढंग के संपर्क मार्ग तक नहीं हैं, वहीं चीन ने अपनी सीमा में शानदार सड़कें बना ली हैं। इस संबंध में प्रदेश शासन के अधिकारियों ने केंद्रीय वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की विशेषज्ञ समिति के समक्ष लिखित रूप से अपनी बात रखी थी। इसमें चीन की सड़कों का भी जिक्र किया गया था।


एनजीटी के फैसले का इंतजार
शासन के सचिव अरविंद सिंह हयांकी का कहना है कि शासन ने अपनी बात केंद्र समक्ष रख दी है। अंतरराष्ट्रीय सरहद की वजह से इस संबंध में रक्षा मंत्रालय को भी पत्र भेजा गया था। इको सेंसिटिव जोन के जोनल मास्टर प्लान में जो खामियां बताई गई थीं, उन्हें दुरुस्त कर दिया गया है। एनजीटी में मामला विचाराधीन है। अब फैसले का इंतजार है।

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