Chardham Yatra: यात्रा के लिए 12 भाषाओं में SOP जारी, चिकित्सीय मदद के लिए 104 नंबर, जानें जरूरी सलाह
Chardham Yatra 2025: धामी सरकार ने सुरक्षित, सुगम यात्रा के साथ ही तीर्थयात्रियों की स्वास्थ्य सुरक्षा पर विशेष जोर दिया है। जिसके लिए आज सरकार ने एसओपी (मानक प्रचालन प्रकिया) जारी कर दी है।
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आगामी चारधाम यात्रा के लिए सरकार ने एसओपी (मानक प्रचालन प्रकिया) जारी कर दी है। यात्री किसी भी तरह की स्वास्थ्य संबंधी परेशानी होने पर तत्काल 104 नंबर पर कॉल कर सकेंगे। यह एसओपी 12 भाषाओं में जारी की गई है।
सचिव स्वास्थ्य डॉ.आर राजेश कुमार की ओर से जारी एसओपी में तीर्थयात्रियों की स्वास्थ्य सुरक्षा पर विशेष जोर दिया गया है। राज्य सरकार ने विभिन्न भौगोलिक और जलवायु संबंधी चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए 12 भाषाओं (हिंदी, अंग्रेजी, तेलुगु, मणिपुरी, गुजराती, मलयालम, बांग्ला, कन्नड़, मराठी, पंजाबी, उड़िया व तमिल) में स्वास्थ्य परामर्श व एसओपी जारी की है। डॉ.कुमार ने बताया कि सभी राज्यों के स्वास्थ्य सचिवों को पत्र के माध्यम से आग्रह किया है कि यात्रा से पूर्व स्वास्थ्य जांच, सतर्कता और चिकित्सकीय तैयारियों का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए।
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हर जगह मिलेगी सहायता
स्वास्थ्य सचिव डॉ.राजेश ने बताया कि स्क्रीनिंग प्वाइंट, आपातकालीन सेवाएं और हेलीपैड जैसे महत्वपूर्ण स्थानों पर तीर्थयात्रियों की सहायता सुनिश्चित की जाएगी। यात्रियों की सुविधा और स्वास्थ्य की देखभाल के लिए डॉक्टरों, मेडिकल स्टाफ, ऑक्सीजन सिलिंडर और दवाइयों की पूरी व्यवस्था की गई है। बताया कि राज्य सरकार ने चारधाम यात्रा से संबंधित स्वास्थ्य सुरक्षा के प्रचार-प्रसार के लिए क्या करें, क्या न करें और अन्य स्वास्थ्य देखभाल सामग्री भी तैयार की है।
यात्रा पर आने से पहले पैदल चलें, प्राणायाम करें
एसओपी में बताया गया है कि यात्रा से पूर्व अनिवार्य स्वास्थ्य जांच कराएं। कम से कम दो माह पूर्व पैदल चलने, प्राणायाम एवं हृदय संबंधी व्यायाम अपनाएं। आवश्यक दवाओं की पर्याप्त मात्रा साथ रखें। स्वास्थ्य एवं पर्यटन पंजीकरण एप पर अनिवार्य पंजीकरण करें। पर्याप्त जल, संतुलित आहार एवं हल्के गर्म पेय पदार्थों का सेवन करें। स्क्रीनिंग केंद्र एवं चिकित्सा राहत पोस्ट का लाभ उठाएं। हल्की परतों वाले कपड़े, गरम वस्त्र, दस्ताने और ऊनी सामग्री साथ रखें।
दूसरे राज्यों से डॉक्टर सेवा देने आएं
सभी राज्यों के स्वास्थ्य सचिवों को पत्र भेजकर कहा गया है कि वह अपने राज्य के चिकित्सा विशेषज्ञ, विशेषकर हृदय रोग, अस्थि रोग, सर्जन जैसे चिकित्सकों को स्वैच्छिक रूप से चारधाम यात्रा मार्ग पर स्थित चिकित्सालयों में योगदान देने के लिए प्रेरित करें। विशेषज्ञों से अपेक्षित योगदान कम से कम 15 दिनों के लिए होगा।