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चारधाम 2021 : केदारनाथ पहुंची बाबा केदार की डोली, 17 मई को विधि-विधान से खोले जाएंगे मंदिर के कपाट

Sat, 15 May 2021 04:15 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, ऊखीमठ
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, ऊखीमठ Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Sat, 15 May 2021 04:15 PM IST
सार

बाबा केदार की डोली शनिवार को अपने धाम पहुंच गई है। 17 मई को सुबह 5 बजे विधि-विधान से मंदिर के कपाट खोले जाएंगे। इसके बाद छह माह तक धाम में ही बाबा केदार की पूजा-अर्चना होगी।

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Char dham yatra 2020: baba kedarnath doli will reach dham today
भगवान केदारनाथ की चल उत्सव विग्रह डोली - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भगवान केदारनाथ की चल उत्सव विग्रह डोली अपने शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ से धाम कैलाश के लिए प्रस्थान करते हुए रात्रि प्रवास के लिए गौरीकुंड पहुंच गई।

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वैश्विक महामारी कोरोना संक्रमण के कारण लगातार दूसरी बार प्रशासन व पुलिस की निगरानी में डोली को वाहन से पहुंचाया गया। बाबा केदार की डोली शनिवार को अपने धाम पहुंच गई है। 17 मई को सुबह 5 बजे विधि-विधान से मंदिर के कपाट खोले जाएंगे। इसके बाद छह माह तक धाम में ही आराध्य की पूजा-अर्चना होगी।
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शुक्रवार सुबह 5.30 बजे से शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर के गर्भगृह में बाबा केदार की भोगमूर्तियों का सामूहिक अभिषेक किया गया। इस मौके पर पुजारियों ने बाबा को महाभोग लगाते हुए आरती उतारी। इसके बाद गर्भगृह से भगवान केदारनाथ की भोगमूर्तियों को मंदिर के पुजारी टी. गंगाधर लिंग एवं शिव शंकर लिंग द्वारा पंचकेदार गद्दीस्थल में विराजमान किया गया।

यहां पर रावल भीमाशंकर लिंग ने केदारनाथ धाम के लिए नियुक्त पुजारी बागेश लिंग को भोगमूर्ति एवं नाग ताला सौंपा। साथ ही अचकन व पगड़ी पहनाकर छह माह की पूजा का संकल्प कराया। इसके बाद विधि-विधान से भोगमूर्तियों को चल उत्सव विग्रह डोली में विराजमान किया गया।

ओंकारेश्वर मंदिर एवं भैरवनाथ मंदिर की परिक्रमा के बाद डोली ने अपने धाम केदारनाथ के लिए प्रस्थान किया। परंपरानुसार डोली समाधिस्थल की परिक्रमा करते कुुंड-ऊखीमठ-चोपता-गोपेश्वर हाईवे पर पहुंची। जहां पर प्रशासन, पुलिस और देवस्थानम बोर्ड के अधिकारियों की मौजूदगी में डोली को वाहन में विराजमान करते हुए करते हुए केदारनाथ धाम के लिए विदा किया गया।

चुन्नी बैंड से विद्यापीठ होते हुए बाबा केदार की चल उत्सव विग्रह डोली वाहन से सुबह 8.30 बजे विश्वनाथ मंदिर प्रवेश द्वार पर पहुंची। यहां पर मंदिर के पुजारी ने आराध्य की पूजा-अर्चना करते हुए आरती उतारी। आराध्य की डोली नारायणकोटी, बडासू, फाटा, रामपुर, सीतापुर, सोनप्रयाग होते हुए रात्रि प्रवास के लिए सुबह 10.30 बजे गौरीकुंड पहुंची। जहां पर मुख्य पुजारी बागेश लिंग ने डोली की पूजा-अर्चना की।

न जयकारे गूंजे न बैंड बाजा, घरों की छत से ही किए भक्तों ने दर्शन 

हे.. केदार तख बटिन भी हम पर अपणी कृपा बणै रखी...तेरू सहारो च, मनोकामनाओं के बीच के केदारघाटी के शिव भक्तों ने दूर अपने घरों से ही हाथ जोड़कर भगवान केदारनाथ की चल विग्रह डोली को धाम के लिए विदा किया।

कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए इस वर्ष भी भगवान और भक्त के बीच दूरी रही। बाबा केदार की डोली के धाम प्रस्थान के दौरान पूर्व के वर्षों में जो उल्लास व उमंग होती थी, वह बीते दो वर्षों से गायब है। बाबा केदार की डोली के धाम प्रस्थान में न बाबा के जयकारों की गूंज रही और वाद्य यंत्रों की थाप और धुनें।

सुबह 10.30 बजे गौरीकुंड में भी सन्नाटे के बीच डोली पहुंची। जहां पर सिर्फ धार्मिक परंपराओं का निर्वहन किया गया। 

छावनी में तब्दील रहे मंदिर व आसपास के क्षेत्र

बाबा केदार की डोली के धाम प्रस्थान के दौरान और बीते गुरुवार को भैरवनाथ पूजा में ओंकारेश्वर मंदिर को छावनी में तब्दील किया गया। पुलिस व पीएससी के जवान तैनात रहे। मंदिर में सीमित लोगों को ही प्रवेश दिया गया। शुक्रवार को डोली प्रस्थान के दौरान भी ओंकारेश्वर मंदिर से लेकर विश्वनाथ मंदिर मार्ग पर भी पुलिस का पहरा रहा। 

केदारघाटी के लिए नववर्ष जैसा होता केदार धाम का कपाटोद्घाटन

वयोवृद्ध तीर्थ पुरोहित श्रीनिवास पोस्ती बताते हैं कि भगवान केदारनाथ धाम के कपाट खुलने का दिन केदारघाटी के ग्रामीणों के लिए नववर्ष के पहले दिन जैसा होता है। इसी पावन दिन पर वे अपनी वर्षभर की आजीविका का लेखाजोखा तैयार करते हुए नए कार्य का श्रीगणेश करते हैं।

यात्रा से घाटी के 80 से अधिक गांवों के हजारों परिवार जुड़े हैं। यात्रा में बच्चा हो चाहे बड़ा, हर कोई किसी ने किसी रूप से जुड़ा होता है, लेकिन कोरोना संक्रमण के कारण बीते दो वर्षों से हालात काफी बदले हुए हैं। यात्रा स्थगित होने से केदारघाटी से लेकर धाम तक सिर्फ परंपराओं का निर्वहन हो रहा है।

बाजारों में सन्नाटा पसरा पड़ा और दुकानों पर ताले लटके हुए हैं। केदार सभा के अध्यक्ष विनोद शुक्ला का कहना है कि बाबा केदार इस मुश्किल घड़ी से मुक्ति दिलाएंगे और फिर से क्षेत्र व धाम में रौनक होगी।

सैनिटाइज करने के बाद ही बदरीनाथ धाम में प्रवेश कर रहे वाहन

कोरोना संक्रमण को देखते हुए बदरीनाथ धाम में व्यापक स्तर पर साफ-सफाई और सैनिटाइजर का छिड़काव किया जा रहा है। धाम में पहुंचने वाले हर एक वाहन को सैनिटाइज किया जा रहा है। नगर पंचायत बदरीनाथ की ओर से बदरीनाथ के प्रवेश देव दर्शनी में बैरियर लगाकर वाहनों को सैनिटाइज करने के बाद ही आगे भेजा जा रहा है।

बदरीनाथ धाम के कपाट 18 मई को खोल दिए जाएंगे, धाम में कोरोना संक्रमण न फैले इसके लिए पहले से ही जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। इन दिनों देश के अंतिम गांव माणा के साथ ही बदरीनाथ और बामणी गांव के ग्रामीण अपने ग्रीष्मकालीन प्रवास स्थलों में पहुंच रहे हैं।

नगर पंचायत के साथ ही पांडुकेश्वर के युवा टीम बनाकर बदरीनाथ के प्रवेश द्वार पर वाहनों को सैनिटाइज करने के बाद ही आगे भेज रहे हैं। बदरीनाथ मंदिर परिसर, तप्तकुंड व अन्य स्थलों को भी सैनिटाइज किया जा रहा है। 
 

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