उच्च शिक्षण संस्थानों में होंगे ये बदलाव, मॉडल पेपर पर लग सकती है रोक
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उच्च शिक्षण संस्थानों में शिक्षा की गुणवत्ता को बढ़ाने के लिए प्रदेश सरकार एक जनवरी से मॉडल पेपर और गेस पेपर पर रोक लगा सकती है। इसके लिए शिक्षाविदें और छात्रसंघ के पदाधिकारियों की राय ली जाएगी। मॉडल पेपर पर रोक लगाए जाने से पहले सरकार महाविद्यालयों में पुस्तकों और फर्नीचर की शत प्रतिशत उपलब्धता सुनिश्चित कराएगी।
इस बात की जानकारी प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत दी। डॉ. रावत सोमवार को विधानसभा स्थित अपने कक्ष में प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित कर रहे थे। डॉ. रावत ने कहा कि प्रदेश सरकार उच्च शिक्षा में कई बड़े बदलाव लाना चाहती है। इसका मकसद शिक्षा को रोजगार के साथ जोड़ना है। इसके लिए प्रदेश सरकार लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों में संशोधन करने पर विचार कर रहीहै।
लिंगदोह कमेटी ने अपनी सिफारिश पांच साल के लिए दी थीं। साथ ही यह कहा था कि अगर कोई राज्य चाहे तो अपने हिसाब से इसमें बदलाव कर सकता है। उन्होंने कहा कि अगर लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों को रिवाइज किया गया तो ऐसा करने वाला उत्तराखंड देश का पहला राज्य होगा। उच्च शिक्षा राज्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के कालेजों में सभी विद्यार्थियों के लिए एनसीसी और एनएसएस को अनिवार्य करने पर विचार किया जा रहा है।
पढ़ाई के अलावा अन्य गतिविधियों के साथ जुड़ेंगे युवा
उच्च शिक्षा राज्यमंत्री ने कहा कि इसका फायदा यह होगा कि विद्यार्थी पढ़ाई के अलावा अन्य गतिविधियों के साथ जुड़ेंगे। उन्होंने कहा कि प्रदेश के सभी 25 पीजी कॉलेजों का आडिट भी कराया जाएगा। उच्च शिक्षा की गुणवत्ता पर दो दिवसीय सेमीनार 20 से उच्च शिक्षा की गुणवत्ता पर दो दिवसीय सेमीनार का आयोजन 20 और 21 नवंबर को दून यूनिवर्सिटी में किया जा रहा है। 20 को सेमीनार का उद्घाटन राज्यपाल केके पाल करेंगे।
21 को सेमीनार के दूसरे दिन के सत्र का आगाज मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत करेंगे। सेमीनार में प्रदेश के सभी 31 विश्वविद्यालयों के वाइस चांसलर और 119 महाविद्यालयों के प्रिंसिपल सहित कई विश्वविद्यालयों के पूर्व वाइस चांसलर भाग लेंगे।
सेमीनार में शिक्षा क्षेत्र के माहिर 10 विषयों पर दो दिनों तक मंथन करेंगे। डॉ.रावत ने बताया कि इसके बाद प्रदेश के सभी जनपदों में भी शिक्षा की गुणवत्ता को सेमीनार का आयोजन किया जाएगा।
सेमीनार में इन बिंदुओं पर होगी चर्चा
-रूसा और नैक पर प्रस्तुतीकरण
-उच्च शिक्षा को कौशल विकास और उद्योग के साथ जोड़ना।
-उच्च शिक्षा के क्षेत्र में सरकार के निर्णयों की समीक्षा।
-स्व वित्त पाठ्यक्रम में बदलाव।
-प्रत्येक यूनिवर्सिटी को अंबेडकर चेयर के लिए करना होगा आवेदन।
-केंद्र पोषित योजनाओं को महाविद्यालय स्तर पर लागू किया जाना।
उच्च शिक्षा के क्षेत्र में नया क्या करेगी सरकार
-एसी-एसटी विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के लिए कोचिंग।
-टॉपर्स को लैपटॉप उपलब्ध कराएगी सरकार।
-प्रदेश के 13 कॉलेजों में आईएएस, पीसीएस की कोचिंग
-प्रदेश के 22 कॉलेजों की बिल्डिंग का कराया जाएगा निर्माण।
एक साल के अंदर साक्षरता की दर को शत प्रतिशत करने का लक्ष्य
प्रदेश के शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने एक साल के अंदर राज्य की साक्षरता दर को 100 फीसदी के स्तर पर पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। डॉ. रावत के मुताबिक अभी प्रदेश की साक्षरता 88 फीसदी है। इसको शत प्रतिशतकरने के लिए विद्यार्थियों को प्रेरित किया जाएगा कि वह एक साल के अंदर कम से कम एक व्यक्ति को साक्षर बनाए। ऐसा करके इस लक्ष्य को आसानी से प्राप्त किया जा सकेगा।