केंद्र की सुस्त चाल ने छीना गरीबों का आशियाना
- प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत केंद्र से नहीं मिली फूटी कौड़ी
- सरकार, ग्राम्य विकास विभाग को केंद्र की गाइड लाइन का इंतजार
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केंद्र सरकार की लेटलतीफी के चलते प्रधानमंत्री आवास योजना योजना ठप पड़ गई है। योजना को लेकर केंद्र की ओर से गाइड लाइन जारी नहीं होने और बजट आवंटन नहीं होने से पिछले तीन माह में राज्य के किसी गरीब को आशियाना नहीं मिल पाया है।
सरकार और ग्राम्य विकास विभाग के अफसरों को केंद्र से योजना को लेकर गाइड लाइन मिलने का इंतजार है। योजना ठप होने से राज्य के 66,000 गरीब परिवारों के सामने आशियाने की मुसीबत तो खड़ी हो गई है।
गरीबों को आशियाना मुहैया कराने के लिए केंद्र की ओर से इंदिरा आवास योजना संचालित की जा रही थी। केंद्रीय बजट से संचालित योजना के तहत पिछले साल उत्तराखंड के 6400 गरीबों को आशियाना मुहैया कराया गया।
राज्य के 66 हजार परिवारों को आशियाने की दरकार
पिछले जनवरी माह में केंद्र ने इंदिरा आवास योजना का नाम बदलकर प्रधानमंत्री आवास योजना कर दिया। साथ ही बजट पर यह कहते हुए रोक लगा दी कि योजना की नई गाइड लाइन जारी की जाएगी। लेकिन, अभी तक केंद्र सरकार की ओर से न तो गाइड लाइन और न ही बजट आवंटित किया गया।
केंद्र की ओर से साल 2011 में कराए गए सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण के आंकड़ों पर नजर डाले तो राज्य में 66,000 ऐसे गरीब परिवार हैं, जिन्हें एक अदद आशियाने की दरकार है।
हालांकि ग्राम्य विकास के अफसरों का दावा है कि 2011 के बाद 40,000 गरीबों को आशियाना मुहैया कराया जा चुका है, लेकिन अफसरों की बातों में कितनी सच्चाई है यह तो वही बता सकते हैं। ज्ञात हो कि यह स्थिति तब है कि जबकि प्रधानमंत्री मोदी साल 2019 तक देश के सभी गरीब परिवारों को आशियाना मुहैया कराने के दावे कर रहे हैं।