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सुस्ती पड़ी भारी, केंद्र ने उत्तराखंड के 317 प्रस्ताव किए खारिज
विजेंद्र श्रीवास्तव/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Wed, 11 Oct 2017 10:43 AM IST
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राज्य सरकार की वन भूमि हस्तांतरण को लेकर सुस्ती भारी पड़ी है। केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने वन भूमि से जुड़े 317 प्रस्तावों को खारिज कर दिया है। इसमें दो सौ से अधिक सड़क के प्रस्ताव शामिल हैं। इसके अलावा बिजली, पेयजल, शिक्षा समेत कई विभागों की योजनाओं को भी झटका लगा है। प्रस्तावों के खारिज होने के बाद खलबली मची हुई है।
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सरकारी महकमे विकास योजनाओं में वन भूमि को लेकर केंद्रीय वन विभाग पर अड़ंगा लगाने का आरोप लगाते रहे हैं, लेकिन स्थिति उलट है। केंद्रीय वन मंत्रालय वन भूमि देने को राजी है, लेकिन प्रयोक्ता एजेंसी (संबंधित विभाग) को सूचना देने की फुर्सत नहीं है। इसके अलावा जिन योजनाओं के लिए केंद्रीय वन मंत्रालय ने सैद्धांतिक सहमति दे दी थी, उसकी शर्तों को पूरा नहीं किया गया है।
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मंत्रालय ने इन सभी प्रस्तावों से जुड़ी शर्तों, सूचनाओं को देने के लिए अगस्त में एक पत्र लिखा था। इसमें कहा गया था कि अगर 90 दिन के भीतर जानकारी नहीं दी गई तो प्रस्ताव को खारिज कर दिया जाएगा। इसके बाद भी संबंधित विभाग सोये रहे। इसके बाद भी केंद्रीय मंत्रालय ने 30 दिन का अतिरिक्त समय दिया। लेकिन राज्य सरकार इस मोहलत का भी सदुपयोग नहीं कर पाई।
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इसके बाद केंद्रीय वन मंत्रालय ने 293 प्रस्तावों को खारिज कर दिया। इसके अलावा 24 उन प्रस्तावों पर भी कैंची चला दी, जिनकी सैद्धांतिक सहमति दिए पांच साल हो गए थे और उससे जुड़ी शर्तों को पूरा नहीं किया गया। इस संबंध में केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के वन संरक्षक एमएस नेगी ने पत्र जारी किया है, इसमें कहा गया है कि नियत समय में राज्य सरकार ने प्रस्तावों से जुड़ी वांछित सूचनाएं, दस्तावेज कार्यालय को उपलब्ध नहीं कराए हैं, ऐसे में वन संरक्षण अधिनियम के मार्गदर्शी के पैरा 4.14 के तहत प्रस्तावों को बंद किया जाता है। मंत्रालय ने साफ कर दिया है कि अगर प्रस्तावित प्रकरणों में कोई भी कार्य किया जाता है, तो उसकी जिम्मेदारी संबंधित विभागों की होगी।
दो सौ से अधिक सड़कें
जो प्रस्ताव खारिज हुए हैं, उसमें लोक निर्माण विभाग और पीएमजीएसवाई की 207 सड़क योजनाओं के प्रस्ताव थे। इसके अलावा पांच ट्रांसमिशन लाइन, चार लघु जल विद्युत परियोजनाएं, दो सेना, एक एयरपोर्ट अथारिटी, सात पेयजल, एक स्कूल समेत अन्य विभागों की योजनाएं थीं।
अफसर ही तैनात नहीं
वन भूमि हस्तांतरण से जुड़ी जानकारी आनलाइन देने का नियम है। इसके लिए वन विभाग का दक्ष अफसर होना चाहिए। शुरुआत में शासन ने वन भूमि हस्तांतरण, एनजीटी के मामलों को लेकर अपर सचिव वन पर वन विभाग के अफसरों को तैनात करना शुरू किया, जो जानकार होने के साथ वन विभाग और शासन दोनों में समन्वय भी बनाते थे। पर लंबे समय से शासन में कोई भी अधिकारी अपर सचिव वन के पद पर तैनात ही नहीं है। इसके चलते भी कई तरह की तकनीकी दिक्कत आ रही हैं।