फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   central and uttarakhand government Face to face on agriculture policy

कृषि क्षेत्र की योजनाओं को लेकर केंद्र-उत्तराखंड आमने-सामने

Mon, 28 Nov 2016 08:18 AM IST
कृष्णेंदु कुमार/ अमर उजाला, देहरादून
कृष्णेंदु कुमार/ अमर उजाला, देहरादून Updated Mon, 28 Nov 2016 08:18 AM IST
विज्ञापन
central and uttarakhand government Face to face on agriculture policy
किसान - फोटो : amar ujala

कृषि योजनाओं को लेकर केंद्र और राज्य आमने-सामने आ गए हैं। केंद्रीय कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह ने उत्तराखंड में कृषि मद के बजट अटकने के लिए सीधे तौर पर राज्य सरकार को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि केंद्र की कार्यप्रणाली स्पष्ट है।

विज्ञापन


राज्य सरकार मिले बजट से हुए काम का उपयोगिता प्रमाणपत्र (यूसी) दे और पैसा ले जाए। राज्य अपनी खामियां तो ठीक नहीं करता और पैसा न मिलने की तोहमत केंद्र पर लगाता है। इस पर राज्य के कृषि मंत्री राजेंद्र भंडारी ने केंद्र सरकार पर पलटवार किया और कहा कि राजनीतिक वजह से पैसा जारी नहीं किया जा रहा है और प्रदेश सरकार को गलत ठहराया जा रहा है। 
विज्ञापन

 
बिना यूसी दिए पैसा मांग रही प्रदेश सरकार : राधा मोहन
कृषि क्षेत्र की जितनी भी योजनाएं हैं, उनकी प्रगति रफ्तार प्रदेश में धीमी है। किसानों को स्वायल कार्ड बनाए जाने का लक्ष्य अभी तक प्रदेश सरकार ने पूरा नहीं किया है। 7.5 लाख के मुकाबले 4.22 किसानों के ही स्वायल कार्ड बन सके हैं। इसी तरह प्रदेश में जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए वित्त वर्ष 2015-16 के दौरान 19.63 करोड़ रुपये दिए गए थे। 2016-17 में इस मद में 26.24 करोड़ रुपये आवंटित किए गए। प्रदेश में जैविक खेती के 24 समूह बनाने के लिए भी निधि आवंटित की गई है। राज्य सरकार की ओर से वार्षिक कार्य योजना की अभी प्रतीक्षा की जा रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन


प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के मद में राज्य सरकार को 8.56 करोड़ रुपये की राशि आवंटित की गई है प्रदेश सरकार द्वारा व्यय की जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है। कृषि क्षेत्र की कई योजनाओं का उपयोगिता प्रमाणपत्र राज्य सरकार द्वारा उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है। राज्य सरकार द्वारा बार-बार आग्रह करने के बाद भी वित्त वर्ष 2016-17 की कार्ययोजना से अवगत नहीं कराया गया है और ना ही उपयोगिता प्रमाणपत्र दिए जा रहे हैं। इस वजह से योजनाओं की अगली किस्त जारी नहीं की जा सकी है। 

राजनीतिक वजह से पैसा रिलीज नहीं कर रहा केंद्र: भंडारी 
केंद्रीय कृषि मंत्री गलतबयानी कर रहे हैं। कृषि क्षेत्र की जितनी भी योजनाएं हैं, सबकी विस्तृत परियोजना (डीपीआर) और उपयोगिता प्रमाणपत्र केंद्र सरकार को भेजा जा चुका है। केंद्र सरकार राजनीतिक वजह से प्रदेश की उपेक्षा कर रही है। बात सिर्फ चालू वित्त वर्ष की नहीं है, पिछले ढाई सालों से केंद्र सरकार का यही रवैया है। तब से केंद्र के एक भी मंत्री ने प्रदेश का रुख नहीं किया।


अब जब प्रदेश में विधानसभा के चुनाव होने वाले हैं तो केंद्रीय मंत्रियों की फौज उतार दी गई है। इन केंद्रीय मंत्रियों ने अब तक तो प्रदेश को कुछ दिया नहीं। अब गलत बयानबाजी कर जनता को भ्रमित करने का काम कर रहे हैं। जनता को हकीकत का पता है। उत्तराखंड कृषि प्रधान राज्य है। किसानों का हित प्रदेश सरकार की प्राथमिकता है। प्रदेश सरकार ने किसानों के हित में कई योजनाएं चला रखी हैं। केंद्रीय कृषि मंत्री को चाहिए कि वह प्रदेश की योजनाओं के लिए पैसा जारी करें। ताकि अन्य प्रदेशों की तरह यहां के किसान भी लाभांवित हो सकें।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed