फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   center denied help to develop new blocks in uttarkhand.

सीएम रावत की घोषणाओं को मोदी सरकार ने दिया झटका

Sat, 27 Aug 2016 03:31 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून Updated Sat, 27 Aug 2016 03:31 AM IST
विज्ञापन
center denied help to develop new blocks in uttarkhand.
हरीश रावत - फोटो : AmarUjala

राज्य में कई नए विकास खंडों के सृजन के लिए केंद्र ने किसी भी प्रकार की वित्तीय सहायता देने से साफ इनकार कर दिया है। दूसरी ओर इनके गठन को लेकर सचिव पंचायतीराज की अध्यक्षता में गठित कमेटी भी अभी अपनी रिपोर्ट तैयार नहीं कर पायी है। ऐसे में यह मामला लटकता दिखाई दे रहा है।

विज्ञापन


मुख्यमंत्री ने बेशक कई इलाकों में नए विकास खंडों के सृजन को लेकर घोषणाएं कर दी हों, लेकिन उनके कार्यकाल में इनका सृजन हो जाएगा, इसकी उम्मीद अब बहुत ही कम है। राज्य में वर्तमान में 95 विकास खंड हैं और राज्य गठन के साथ ही विषम भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए तमाम जिलों में नए विकास खंडों के सृजन की मांग उठती रही है।
विज्ञापन


बता दें कि सीएम हरीश रावत ने अपने दो साल के कार्यकाल में तल्लादेश, दुग नाकुरी समेत कई क्षेत्रों को नए विकास खंड बनाने की घोषणा की थी। उन्होंने पंचायतीराज विभाग के अफसरों को निर्देश भी दिए कि घोषणाओं पर तेजी से अमल किया जाए। लेकिन इन घोषणाओं में केंद्र सरकार ने अड़ंगा लगा दिया है।
विज्ञापन
विज्ञापन


समिति कर रही मूल्यांकन
उधर, नए विकास खंडों के सृजन और पुर्नगठन को लेकर सचिव पंचायतीराज की अध्यक्षता में गठित कमेटी भी अभी तमाम पहलुओं पर विचार-विमर्श ही कर रही है। उत्तराखंड ब्लाक प्रमुख संगठन के प्रदेश अध्यक्ष एमएस राणा ने बताया कि जिस अनुपात में नए जिलों का गठन किया गया, उस अनुपात में नए विकास खंड नहीं बनाए गए। ऐसे में जरूरत इस बात की है कि राज्य सरकार केंद्र की अनुमति से नए विकास खंडों का सृजन करें, ताकि आमजन की मुसीबतेें कम हो। 

क्या हैं नए विकास खंडों के सृजन की प्रक्रिया

center denied help to develop new blocks in uttarkhand.
harish rawat

उत्तराखंड पंचायतीराज अधिनियम -2016 के मुताबिक राज्य को नए विकास खंडों के सृजन का अधिकार है। लेकिन इनके सृजन के बाद येाजनागत और प्रशासनिक मद में भारी भरकम बजट की जरूरत होती है। ऐसे में तमाम सरकारें केंद्र पर आश्रित होती हैं। केंद्र से वित्तीय मदद के आश्वासन के बाद ही सरकारें नए विकास खंडों का सृजन करती है। पंचायती विभाग के अफसरों के मुताबिक पिछले डेढ़ दशक में पूरे देश में अपवादस्वरूप एक दो विकास खंडों का गठन हुआ है। उत्तराखंड गठन से पूर्व यूपी की ओर से पर्वतीय इलाकों में नए विकास खंडों के गठन का प्रस्ताव केंद्र को भेजा गया था, लेकिन केंद्र ने बजट देने से इंकार कर दिया था। ऐसे में प्रस्ताव ठंडे बस्ते में चला गया था।

राज्य में नए विकास खंडों के गठन का प्रस्ताव केंद्र को भेजा गया है। अभी तक केंद्र ने कोई जवाब नहीं दिया है। विकास खंडों के  सृजन को लेकर केंद्र से दिशा निर्देश भी मांगा गया है। राज्य सरकार नए पंचायतीराज अधिनियम के तहत विकास खंडों का सृजन तो कर सकती है, लेकिन इनके गठन के बाद योजनागत और प्रशासनिक मद में भारी भरकम बजट की जरूरत पड़ेगी, जो केंद्र के सहयोग के बिना संभव नहीं है।
--सुशील कुमार, अपर सचिव/निदेशक, पंचायतीराज विभाग, उत्तराखंड

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed