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सरकारी सुस्ती से गरीबों के इलाज पर संकट

Wed, 30 Sep 2015 04:23 PM IST
अनिल चंदोला/ अमर उजाला, देहरादून
अनिल चंदोला/ अमर उजाला, देहरादून Updated Wed, 30 Sep 2015 04:23 PM IST
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careless uttarakhand health department.

उत्तराखंड सरकार की सुस्ती की वजह से प्रदेश के गरीबों के सामने इलाज का संकट पैदा होने वाला है।

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मुख्यमंत्री हरीश रावत की महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना की मियाद एक अक्तूबर को पूरी होने जा रही है। लेकिन इसको आगे बढ़ाने या वैकल्पिक व्यवस्था करने के लिए सरकार ने अभी तक कोई कदम नहीं उठाये हैं। बीमा कंपनी को पिछले छह माह चली योजना के दौरान का लगभग दस करोड़ रुपए का भुगतान नहीं हुआ है।

इस वजह से कंपनी ने योजना की अवधि बढ़ाये जाने से हाथ खड़े कर दिए हैं। कंपनी का कहना है कि पहले एडवांस दिया जाए तभी योजना को आगे बढ़ाया जाएगा। ऐसे में इस योजना पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं, जिसका खामियाजा इसके लाभार्थियों को भुगतना पड़ेगा।
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मुख्यमंत्री हरीश रावत ने 26 जनवरी को मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना लागू करने की घोषणा की। 26 फरवरी को इसका शासनादेश जारी होने के बाद 15 मार्च को वर्क ऑर्डर जारी हुए। इसके 15 दिन बाद एक अप्रैल से प्रदेश में योजना की विधिवत शुरुआत हुई। योजना के तहत प्रदेश में करीब साढ़े दस लाख परिवारों के कार्ड बनाये गये।
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सरकार को प्रत्येक कार्ड पर बीमा कंपनी को 168 रुपए के हिसाब से लगभग 16 करोड़ 80 लाख रुपए प्रीमियम का भुगतान करना था। लेकिन सरकार ने केवल साढ़े छह करोड़ रुपए के प्रीमियम का भुगतान किया है।

गुरुवार को योजना की छह माह की मियाद पूरी हो रही है। सरकार योजना के तहत उपचार की धनराशि बढ़ाने जा रही है, लेकिन अभी इस पर काफी काम होना बाकी है। सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर इसकी घोषणा कर सकते हैं। तब तक लोगों को उपचार कैसे मिलेगा, इस संबंध में स्थिति स्पष्ट नहीं है।

आरबीएसवाई का भी 20 करोड़ बकाया
कंपनी इसलिए भी बिना प्रीमियम के क्लेम सेटलमेंट करने से इंकार कर रही है, क्योंकि उसे अभी राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना के 20 करोड़ का भुगतान नहीं हुआ है। कंपनी सूत्रों के अनुसार योजना के तहत राज्य सरकार को करीब दो करोड़ और केंद्र सरकार को करीब 18 करोड़ रुपए का भुगतान करना है। राज्य सरकार ने डेढ़ साल और केंद्र सरकार ने तीन साल से इसका भुगतान नहीं किया है।

यू-हेल्थ योजना भी बदहाल
इससे पहले साल 2013 में सरकार ने करीब ढाई लाख सरकारी कर्मियों के लिए यू-हेल्थ योजना शुरू की। पुणे की एमएस इंडिया के साथ एमओयू किया। एक साल में केवल 15 से 20 फीसदी कर्मियों के ही कार्ड बन सके।

तब सरकार की शर्तों पर नाराजगी जताते हुए कंपनी ने करार तोड़ दिया। इसके बाद सरकार ने योजना का संचालन अपने हाथ में ले लिया, लेकिन सरकारी सिस्टम में यह योजना अपेक्षित तरीके से चल नहीं पा रही है।

कंपनी ने अभी तक कोई क्लेम नहीं रोका है। अस्पतालों के स्तर से डॉक्यूमेंटेशन में देरी के कारण क्लेम सेटलमेंट में समय लग रहा है। 30 सितंबर के बाद योजना का क्या होगा, इस संबंध में हमें फिलहाल कोई दिशा-निर्देश नहीं मिले हैं। शासन के निर्देशानुसार आगे की कार्रवाई होगी।

- संजय जोशी, नोडल अधिकारी, यूनाईटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी

मौजूदा करा को दो और माह बढ़ाने की प्रक्रिया चल रही है। इस दौरान नई बीमा कंपनी से करार के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी कर ली जायेगी। योजना को किसी भी तरह प्रभावित नहीं होने दिया जायेगा।
- ओमप्रकाश, प्रमुख सचिव, स्वास्थ्य

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