नागफनी, उत्तराखंड को बना सकती है धनी
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उत्तराखंड में बहुतायत से पाई जाने वाली नागफनी (यूफोरबिया रॉयलीना) राज्यवासियों को धनी बना सकती है।
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बाल वैज्ञानिक अनुजा का कहना है कि पौधे को मरुस्थल से लेकर पहाड़ी क्षेत्रों कहीं भी उगाया जा सकता है। यह राज्यवासियों को मालामाल बना सकता है।
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यही नहीं इससे निकलने वालेलैटेक्स (चिपचिपा पदार्थ) का पर्यावरण संरक्षण एवं आर्थिक विकास में भी बहुत योगदान हो सकता है। अनुजा के अनुसार इस पौधे का सीधा उपयोग न तो मनुष्य करते हैं न ही पशु।
आग से बचाएगा वनों को
लकड़ी या चारे के तौर पर उपयोग नहीं होने से मनुष्य ही नहीं वन्यजीव अथवा पालतू पशु भी इसे नष्ट नहीं करते। ये पौधे अग्निरोधक होते हैं। इनके उचित रोपण, प्रसार और प्रबंधन द्वारा वनों को आग से भी बचाया जा सकता है।
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इनके प्लांटेशन द्वारा हरियाली एवं जैव विविधता को भी संरक्षित किया जा सकता है। इसके तने पर हल्का चीरा लगाने पर प्राकृतिक रबड़ की भांति सफेद कोलाइडी पदार्थ (लेटेक्स) निकलता है।
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इस लेटेक्स में रेजिन, रबड़, प्रोटीन एवं लवण विद्यमान रहते हैं। पौधे पर लगाए गए चीरे कुछ समय बाद ही विलुप्त हो जाते हैं। जिससे पौधे को कोई नुकसान भी नहीं पहुंचता है। खास बात यह है कि पौधा जीवन पर्यंत हरा-भरा रहता है।
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अनुजा ने लेटेक्स के रासायनिक विश्लेषण के जरिए उसमें औषधीय और कीटनाशक गुण ढूंढे थे। यूफोरबिया रायलीना के सूखे हुए तनों से निर्धारित नमी एवं तापमान में स्वादिष्ट एवं प्रोटीनयुक्त मशरूम उत्पन्न होती है।
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मध्य हिमालय के ग्रामीण क्षेत्रों प्राकृतिक रूप से उत्पन्न इस मशरूम का इस्तेमाल सब्जी के तौर पर होता है।
आईआईटी रुड़की के वैज्ञानिकों ने लिया संज्ञान
नागफनी प्रजाति के पौधे (बॉटनिकल नाम यूफोरबिया रॉयलीना) के लैटेक्स से एंटी बैक्टीरिया टर्पिनायड का आविष्कार कर अपनी वैज्ञानिक प्रतिभा का परचम लहराने वाली अनुजा डुकलान के अविष्कार का आईआईटी रुड़की के वैज्ञानिकों ने संज्ञान लिया है।
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पेटेंट के लिए भेजे गए इस अविष्कार को मूर्त रूप देने के लिए अनुजा को वित्तीय मदद के लिए संस्थान ने अनुजा के पिता सुरेंद्र डुकलान से संपर्क कर प्रोजेक्ट प्रपोजल मांगा है। इस प्रपोजल पर संस्थान की एक्सपर्ट कमेटी विचार करेगी।
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गहन जांच और अध्ययन के बाद संस्थान इस प्रपोजल को वित्तीय सहायता हेतु अपनी संस्तुति वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान विभाग (डीएसआईआर) भारत सरकार को करेगी।
अनुजा से मांगा प्रोजेक्ट प्रपोजल
अमर उजाला के बुधवार के अंक में ‘गढ़वाल की बेटी को मिला यंग माइंड अवार्ड-2014’ खबर के प्रकाशन के बाद आईआईटी रुड़की के आईपीआर सेल के वैज्ञानिकों ने अनुजा के पिता सुरेंद्र डुकलान से संपर्क साधा।
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सुरेंद्र ने बताया कि संस्थान ने अनुजा द्वारा किए गए आविष्कार का विस्तृत प्रोजेक्ट मांगा है। जिसे वह छह मार्च को होने वाली विषय विशेषज्ञों की कमेटी में रखेंगे।
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जहां गहन जांच और अध्ययन के बाद यह प्रस्ताव वित्तीय सहायता हेतु डीएसआईआर नई दिल्ली को अग्रसारित करेंगे। प्रपोजल के साथ बायोएशिया अवार्ड का पूरा ब्यौरा भी भेजा जाएगा।
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बाल वैज्ञानिक अनुजा डुकलान का कहना है कि उसने अपने अविष्कार से जुड़ी उन्नत शोध के लिए वित्तीय सहायता के लिए आवेदन किया है।