फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   budget problem in uttarakhand 60 thousand employee seventh pay commission salary slab

उत्तराखंड में 60 हजार कर्मचारियों के सातवें वेतन में फंसा पेंच

Thu, 02 Mar 2017 11:43 AM IST
राकेश खंडूड़ी/ अमर उजाला, देहरादून
राकेश खंडूड़ी/ अमर उजाला, देहरादून Updated Thu, 02 Mar 2017 11:43 AM IST
विज्ञापन
budget problem in uttarakhand 60 thousand employee seventh pay commission salary slab
money

राज्य सरकार के निगमों और सार्वजनिक उपक्रमों में तैनात करीब 60 हजार कर्मचारियों के सातवें वेतन में घाटे का पेंच फंस गया है। नई पगार के बारे में निगमों के निदेशक मंडलों को फैसला लेना है।

विज्ञापन


मगर गंभीर वित्तीय संकट से जूझ रहे निगमों पर नए वेतनमान का अतिरिक्त बोझ लादने को लेकर इनका प्रबंधन पसोपेश की स्थिति में है। सरकार की नजरें इनायत न होने और कुप्रबंधन के चलते कई निगमों और उपक्रमों में नए वेतन की तो छोड़िये कायदे से पगार तक नहीं मिल रही है। कर्मचारियों का धैर्य टूट रहा है और वे आंदोलन के मूड में नजर आ रहे हैं।
विज्ञापन

 
शासन स्तर पर भी निगमों की माली हालत सुधारने के कई बार दावे हुए, मगर हालात बद से बदतर हो चुकी है। प्रबंधकीय खामियों की वजह से हिल्ट्रान सरीखी संस्था बंद कर दी गई। प्रदेश के सबसे प्रतिष्ठित परिवहन निगम की माली हालत खराब है। यहां कर्मचारियों को वेतन के लाले पड़े हैं। निगम 240 करोड़ रुपये के घाटे में है।

विज्ञापन
विज्ञापन

यहां फंस रहा है पेंच

budget problem in uttarakhand 60 thousand employee seventh pay commission salary slab
zd - फोटो : Getty Images

निगम को हर महीने सिर्फ वेतन खर्च के लिए करीब 14 करोड़ रुपये चाहिए। प्रबंधन के हाल ये हैं कि 200 से ज्यादा नई बसें खरीदने के बाद निगम प्रबंधन चालक व परिचालकों का इंतजाम कर रहा है। पिछले करीब तीन महीने से नई और पुरानी बसें खड़ी हैं, जिससे करीब नौ करोड़ रुपये महीना का घाटा हो रहा है।

यही कहानी पेयजल निगम की है, जहां पिछले तीन महीने से कर्मचारियों को पगार नहीं मिली है। निगम 30 करोड़ के घाटे में है। करीब 200 करोड़ रुपये की एफडी के ब्याज से वेतन जुटाने वाले वन विकास निगम की माली हालत भी खासी पतली है। वहां कर्मचारियों को वेतन पर घाटे का पेंच फंस रहा है।

गढ़वाल मंडल विकास निगम में अलग-अलग श्रेणियों के कर्मचारियों को कई-कई महीनों से वेतन नहीं मिल रहा है। 16 जून 2013 की आपदा के बाद निगम उबर नहीं पाया है। निकायों, जिला पंचायतों और अन्य संस्थाओं की आर्थिक हालत भी बेहद खस्ता है।

नए वेतन में घाटे का पेंच

budget problem in uttarakhand 60 thousand employee seventh pay commission salary slab
money

गंभीर वित्तीय संकट की वजह से निगमों और सार्वजनिक उपक्रमों के प्रबंधन सातवें वेतनमान को लेकर फैसला लेने से हिचक रहे हैं। हालांकि निगमों में तैनात कर्मचारियों ने शासन पर लगातार दबाव बना रखा है। मगर नए वेतन की राह उन्हीं निगमों और उपक्रमों में आसान होगी जो घाटे से बाहर हैं और कमाऊ पूत माने जाते हैं। इनमें सिडकुल, पावर कारपोरेशन, पावर ट्रांसमिशन, जल विद्युत निगम, सैनिक कल्याण निगम प्रमुख हैं।

निगमों व सार्वजनिक उपक्रमों के कर्मचारियों को सातवें वेतन पर फैसला उनके निदेशक मंडलों को लेना है। वे संस्तुति करके प्रस्ताव औद्योगिक विकास निगम को भेजेंगे और इस पर शासन निर्णय लेगा।
- अमित सिंह नेगी, सचिव वित्त

निगमों की कमजोर माली हालत के लिए कुप्रबंधन जिम्मेदार है। शासन के उदासीन रुख और प्रबंधन की मनमानी के चलते निगमों व उपक्रमों की हालत सुधारने के गंभीर प्रयास नहीं हो रहे हैं। इस दिशा में गंभीर पहल करने की आवश्यकता है।
- बीएस रावत, महासचिव, राज्य निगम कर्मचारी-अधिकारी महासंघ

कर्मचारियों का धैर्य जवाब देने लगा है। दो महीने से परिवहन निगम में पगार लंबित है। कतिपय निगमों की भी यही स्थिति है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी से आंदोलन की अनुमति मांगी गई है। निदेशक मंडलों को बैठक करके सातवें वेतन की तत्काल संस्तुति करनी चाहिए।
- रवि पचौरी, महासचिव, राज्य निगम कर्मचारी महासंघ

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed