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ओबीसी में ही रहेंगे गोरखा समुदाय के ब्राह्मण-क्षत्रिय
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
Updated Sun, 29 May 2016 12:48 AM IST
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हरीश रावत
- फोटो : पीटीआई
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गोरखा समुदाय के ब्राह्मण और क्षत्रिय को ओबीसी के दायरे से हटाने के हाल के शासनादेश को सरकार ने पलट दिया है। राज्य सरकार के मंत्री इस शासनादेश को अधिकारियों के स्तर पर लिया फैसला बताकर सफाई पेश कर रहे हैं।
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शनिवार को कैबिनेट मंत्री दिनेश अग्रवाल ने रेसकोर्स स्थित अपने आवास में प्रेस कांफ्रेंस में बताया कि राज्य सरकार द्वारा 2003 में संपूर्ण गोरखा समुदाय को अन्य पिछड़ा वर्ग में शामिल किया गया था। इस बीच जून 2011 में भारत सरकार द्वारा गोरखा समुदाय के क्षत्रिय और ब्राह्मण जाति को ओबीसी से बाहर रखने की गाइड लाइन जारी हुई।
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मंत्री ने कहा कि कुछ जिला अधिकारियों ने अलग-अलग शासनादेशों से विरोधाभास की स्थिति से अवगत कराया। शासन में बैठे अधिकारियों ने अपने स्तर से ही 16 मई को केंद्र की गाइडलाइन के मुताबिक, गोरखा समुदाय के ब्राह्मण और क्षत्रिय जाति के लोगों को अन्य पिछड़ा वर्ग से बाहर करने का शासनादेश जारी किया।
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मंत्री ने निशाने पर भाजपा विधायक
मंत्री ने दावा कि मामला संज्ञान में आते ही वे मुख्यमंत्री से मिले। जिस पर 26 मई को ही मुख्यमंत्री ने 2003 को जारी शासनादेश को यथावत लागू रखने के निर्देश दिए हैं।
उन्होंने बिना नाम लिए इशारों में ही मसूरी विधायक गणेश जोशी पर मामले में राजनीति करने का आरोप लगाया। साथ ही इस मामले में केंद्र से सुधार कराने की बात कही है।
उल्लेखनीय है कि भाजपा विधायक गणेश जोशी इस मामले में राज्यपाल तक को पत्र लिखकर हस्तक्षेप करने की मांग कर चुके हैं। प्रेस कांफ्रेंस में गोरखा सुधार सभा के अध्यक्ष बीएस क्षेत्री, डीएस भंडारी, सूर्य विक्रम शाही आदि मौजूद थे।