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बोर्डिंग स्कूल गैंगरेप: पोक्सो कोर्ट का फैसला, छात्र सर्वजीत को 20 और तीन दोषियों को 9-9 साल कैद 

Mon, 03 Feb 2020 10:44 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Mon, 03 Feb 2020 10:44 PM IST
सार

  • स्कूल की निदेशक लता गुप्ता, मुख्य प्रशासनिक अधिकारी व उसकी पत्नी को हुई नौ-नौ साल की सजा 
  • तीन नाबालिग छात्रों को भी ढाई-ढाई साल की सुनाई सजा, तीन दिन के भीतर जेजे बोर्ड में होंगे पेश 
  • प्रिंसिपल को तीन साल की सजा, जमानत मिली, स्कूल प्रशासन पर लगाया कुल 10 लाख का जुर्माना 

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Boarding School Sexual assault case: Pocso Court Big Decision in dehradun
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर

विस्तार

बोर्डिंग स्कूल सामूहिक दुष्कर्म प्रकरण में विशेष पोक्सो जज रमा पांडेय की अदालत ने सोमवार को फैसला सुना दिया। प्रकरण के मुख्य आरोपी बालिग छात्र सर्वजीत को 20 साल कठोर कारावास की सजा सुनाई गई है।

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स्कूल की निदेशक लता गुप्ता, मुख्य प्रशासनिक अधिकारी दीपक मल्होत्रा उसकी पत्नी तनु को आपराधिक षडयंत्र, गर्भपात कराने आदि के दोष में नौ-नौ साल की सजा हुई। जबकि, प्रिंसिपल जितेंद्र शर्मा को आपराधिक षडयंत्र और अपराध छुपाने के दोष में तीन साल की सजा सुनाई गई है। हालांकि, उसे कोर्ट से ही जमानत मिल गई। 
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16 सितंबर 2018 में सामने आए इस प्रकरण में कुल तीन नाबालिग छात्र भी आरोपी थे। इन छात्रों को किशोर न्याय बोर्ड ने पिछले साल बरी कर दिया था। इसके खिलाफ भी अभियोजन ने पोक्सो कोर्ट में अपील की थी। इस मामले में सोमवार को कोर्ट ने फैसला सुना दिया। तीनों नाबालिगों को भी ढाई-ढाई साल की सजा सुनाई गई है।
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इनमें से 16 वर्ष से ऊपर वाले किशोर पर 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। उन्हें तीन दिन के भीतर किशोर न्याय बोर्ड में उपस्थित होना होगा। जिला शासकीय अधिवक्ता जीडी रतूड़ी ने बताया कि इस मुकदमे में कुल 18 गवाह प्रस्तुत किए गए थे। जबकि, 50 से अधिक लिखित दस्तावेजों को न्यायालय के ट्रायल के दौरान प्रस्तुत किया गया। तीन साल से अधिक सजा पाए सभी दोषियों को अदालत परिसर से हिरासत में लेकर जेल भेज दिया गया है। 

किस धारा में किसको कितनी सजा 

छात्र सरबजीत सिंह- आईपीसी की धारा 376(डी) ‘सामूहिक दुष्कर्म’ व पोक्सो6 (20 साल कठोर कारावास व 5 हजार रुपये जुर्माना)

निदेशक लता गुप्ता, मुख्य प्रशासनिक अधिकारी दीपक मल्होत्रा और उसकी पत्नी तनू मल्होत्रा 
 - आईपीसी की धारा 201 (सुबूत मिटाना), आईपीसी 34 (अपराध के लिए एक राय)- 3 साल कारावास व 20 हजार रुपये जुर्माना। 
-आईपीसी 212 (अपराध छुपाना)- 2 साल कैद और 10 हजार रुपये जुर्माना। 
-आईपीसी 313 (गर्भपात कराना)- 9 साल कैद और 40 हजार रुपये जुर्माना। 
- आईपीसी 120बी (आपराधिक षडयंत्र)- 3 साल कैद और 10 हजार रुपये जुर्माना। 
- पोक्सो 21 (नाबालिगों से अपराध) - 6 माह कैद और 2 हजार रुपये जुर्माना। 

प्रिंसिपल जितेंद्र शर्मा (तीन साल कैद होने के कारण कोर्ट से हाथोंहाथ जमानत मिल गई)
- आईपीसी 212 (अपराध छुपाना)- 2 साल कैद और 10 हजार रुपये जुर्माना। 
- पोक्सो 21 (नाबालिगों से अपराध) - 6 माह कैद और 2 हजार रुपये जुर्माना। 
- आईपीसी 120बी (आपराधिक षडयंत्र)- 3 साल कैद और 10 हजार रुपये जुर्माना। 

स्कूल प्रशासन छात्रा को देगा 10 लाख रुपये 

कोर्ट ने स्कूल प्रशासन पर 10 लाख रुपये का भारी जुर्माना लगाया है। न्यायालय ने टिप्पणी की है कि स्कूल में हुई इस घटना के कारण छात्रा को मानसिक प्रताड़ना से गुजरना पड़ा है। उसे मध्य सत्र में ही पढ़ाई छोड़नी पड़ी और तमाम मानसिक यातनाएं भी झेली हैं। लिहाजा, वह मानसिक क्षतिपूर्ति की हकदार है। 

आया मंजू बनी सरकारी गवाह और बरी हुई 

इस प्रकरण में स्कूल प्रबंधन के कुल पांच आरोपी थी। इनमें मंजू नाम की आया का नाम भी शामिल था। पुलिस ने मुकदमा दर्ज होने के 58वें दिन सभी छात्रों के अलावा प्रबंधन के इन पांचों लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। लेकिन, ट्रायल के दौरान मंजू सरकारी गवाह बन गई। इसके कारण उसे न्यायालय से राहत मिली और उसे बरी कर दिया गया। 

124 पेज में लिखा कोर्ट ने निर्णय

इस मुकदमे में कोर्ट ने 124 पेज में अपना फैसला सुनाया है। सभी आरोपियों के विषय में न्यायालय ने तीखी टिप्पणियां भी की हैं। अभियोजन ने तर्क दिया था कि किसी भी स्कूल में शिक्षक और अन्य स्टाफ ही बच्चों के अभिभावक होते हैं। बोर्डिंग स्कूल में यह जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है। लिहाजा, इस तरह का अपराध और फिर इसे छुपाना सभी बोर्डिंग स्कूलों की छवि को धूमिल करने वाला है।

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