उत्तराखंड : ब्लैक फंगस के 11 नए मरीज, दो की मौत, कुल मरीजों की संख्या 380 हुई
ब्लैक फंगस से 53 मौत देहरादून जिले में हुई हैं। नैनीताल, ऊधमसिंह नगर, उत्तरकाशी, हरिद्वार जिले में अब तक कुल 38 मरीज मिले हैं।
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प्रदेश में ब्लैक फंगस (म्यूकरमाइकोसिस) के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। शनिवार को देहरादून जिले में 11 नए मामले और दो मरीजों की मौत हुई है। ब्लैक फंगस मरीजों की कुल संख्या 380 हो गई है। जबकि 60 मरीजों की मौत हो चुकी है।
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स्वास्थ्य विभाग के हेल्थ बुलेटिन के अनुसार शनिवार को देहरादून जिले में 11 मरीजों में ब्लैक फंगस की पुष्टि हुई है। जबकि दो मरीजों ने इलाज के दौरान दम तोड़ा है। देहरादून में कुल मरीजों की संख्या 342 हो गई है।
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ब्लैक फंगस से 53 मौत देहरादून जिले में हुई हैं। नैनीताल, ऊधमसिंह नगर, उत्तरकाशी, हरिद्वार जिले में अब तक कुल 38 मरीज मिले हैं। जबकि सात मरीजों की मौत हो चुकी है।
गौरव के इलाज के लिए 3.17 लाख जुटाए
ब्लैक फंगस से अपनी एक आंख, जबड़ा और नाक की हड्डी गंवाने वाले हरिद्वार के ज्वालापुर निवासी गौरव सिंह चौहान की आर्थिक मदद के लिए क्षत्रिय समाज ने 3,17000 रुपये जुटाए हैं।
क्षत्रिय चौहान महासभा बहादराबाद के संरक्षक दयानंद बाबू ने धनराशि गौरव की मां को सौंपी। इस दौरान ठाकुर सचिन चौहान महामंत्री भेल क्षत्रिय समाज रानीपुर हरिद्वार, सुनील औरंगाबाद, संदीप जी बोंगला, सतेंद्र चौहान धीरवाली, प्रदीप, अश्वनी, सुधांशु, सागर मौजूद रहे।
स्टांप बेचकर परिवार का भरण पोषण करना वाला गौरव सिंह चौहान ब्लैक फंगस की चपेट में आने के बाद से एम्स ऋषिकेश में भर्ती हैं। उसके इलाज में आर्थिक तंगी आड़े आ रही थी। क्षत्रिय समाज की पहल पर गौरव के इलाज के लिए तीन लाख 17 हजार रुपये की धनराशि दी गई। एक लाख आठ हजार रुपये की धनराशि कुछ दिन पहले ही समाज की ओर से दी गई।
ब्लैक फंगस का इंजेक्शन न मिलने से तड़प रहे मरीज
केस वन : लक्सर निवासी 43 वर्षीय मरीज का पिछले 20 दिन से हिमालयन अस्पताल जौलीग्रांट में ब्लैक फंगस इंफेक्शन का उपचार चल रहा है। उनकी तीन-चार छोटी-छोटी सर्जरी होने के बाद एक बड़ा ऑपरेशन भी हुआ, लेकिन एम्फोटेरिसिन-बी लाइपोसोमल इंजेक्शन न मिलने के कारण उनके परिजन परेशान हैं।
केस दो : डीएवी पीजी कॉलेज में लैब कर्मचारी की पत्नी पिछले कई दिन से श्री महंत इंद्रेश अस्पताल में भर्ती हैं। वह ब्लैक फंगस इंफेक्शन से पीड़ित हैं। उन्हें लाइपोसोमल इंजेक्शन की जरूरत है, लेकिन इंजेक्शन मिल नहीं पा रहे हैं। इससे वह और पूरा परिवार चिंतित है।
ब्लैक फंगस का घातक संक्रमण लोगों के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है। परेशानी की बात यह है कि ब्लैक फंगस इंफेक्शन के इलाज में इस्तेमाल किया जाने वाला इंजेक्शन एम्फोटेरिसिन-बी लाइपोसोमल उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। इससे मरीजों और उनके परिजनों की पीड़ा बढ़ रही है।
देहरादून जिले की बात करें तो विभिन्न अस्पतालों में ब्लैक फंगस के तमाम मरीज भर्ती हैं। वह रोज लाइपोसोमल इंजेक्शन के लिए सीएमओ दफ्तर से लेकर तमाम अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन हर तरफ से मायूसी मिल रही है। ऐसे एक दो नहीं कई उदाहरण हैं, सब की एक ही मांग है कि आखिर कब सरकार इन जीवन रक्षक इंजेक्शन की उपलब्धता कराएगी।
स्वास्थ्य विभाग के पास जो इंजेक्शन हैं वह सस्ते वाले हैं। वहीं, इंजेक्शन विभाग ने फंगस इंफेक्शन के इलाज करने वाले अस्पतालों को मुहैया कराए हैं, लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि यह इंजेक्शन डायबिटीज, किडनी और उससे संबंधित अन्य रोगों से पहले से ही पीड़ित मरीजों के लिए घातक सिद्ध हो रहा है।
इससे मरीज की हालत बिगड़ सकती है और वह जानलेवा भी साबित हो सकता है। जिले के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अनूप कुमार ने बताया कि लिपोसोमल इंजेक्शन के लिए डिमांड भेजी गई है। बहुत जल्द यह इंजेक्शन उपलब्ध हो जाएंगे और अस्पतालों को भेज दिए जाएंगे।