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विधायक प्रकरण: दुष्कर्म का आरोप लगाने वाली महिला का पुलिस ने कराया मेडिकल, बाल आयोग ने भेजा समन

Tue, 15 Sep 2020 09:57 AM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Tue, 15 Sep 2020 09:57 AM IST
सार

  • महिला की शिकायत पर विधायक महेश नेगी के खिलाफ दर्ज है मुकदमा

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Bjp MLA Sexual assault case : Police done medical check up of victim Women
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

विस्तार

उत्तराखंड में विधायक महेश नेगी पर दुष्कर्म का आरोप लगाने वाली महिला का पुलिस ने सोमवार को मेडिकल कराया। मामले की जांच एसआईएस शाखा कर रही है। तीन दिन पहले पुलिस ने महिला के बयान भी दर्ज किए थे।

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महिला के खिलाफ विधायक की पत्नी ने ब्लैकमेलिंग का मुकदमा दर्ज कराया था। उसी वक्त महिला ने आरोप लगाया था कि विधायक ने उसके साथ दुष्कर्म किया है। लेकिन, महिला की शिकायत पर मुकदमा दर्ज नहीं हो सका था। इस पर महिला ने कोर्ट में शिकायत की थी। कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने पांच सितंबर को विधायक और उनकी पत्नी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। 
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मुकदमे की जांच एसआईएस शाखा कर रही है। पिछले दिनों एसआईएस ने महिला के बयान भी दर्ज किए थे। डीआईजी अरुण मोहन जोशी ने बताया कि महिला का सोमवार को मेडिकल कराया गया है। इसके आगे की प्रक्रिया जल्द पूरी करते हुए नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है।

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विधायक नेगी पर आरोप लगाने वाली महिला को बाल आयोग ने भेजा समन

देहरादून उत्तराखंड बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने द्वाराहाट विधायक महेश नेगी पर दुष्कर्म का आरोप लगाने वाली महिला को समन भेजा है। जिसमें गैर कानूनी ढंग से बच्ची का डीएनए टेस्ट कराने के मामले में जांच के लिए महिला को 19 सितंबर को आयोग में पेश होने का आदेश दिया है।

आयोग की ओर से बताया गया है कि महिला को कई बार नोटिस जारी किए गए लेकिन महिला ने उन्हें रिसीव नहीं किया। यही वजह है कि अब महिला को पुलिस के माध्यम से समन भेजा गया है। उत्तराखंड बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अनुसचिव डा.रोशनी सती की ओर से जारी समन में कहा गया है कि आयोग को सीपीसीआर अधिनियम 2005 की धारा 14 के तहत आपको समन जारी किया जाता है।

जो आपको अपना पक्ष रखने का अवसर प्रदान करता है। यदि आप बिना विधि सम्मत इसकी अवहेलना करती हैं या आयोग में उपस्थित नहीं होती हैं, तो आपके खिलाफ  कार्रवाई की जा सकती है। समन में कहा गया है कि बालिका का डीएनए टेस्ट गैरकानूनी रूप से कराने के मामले की जांच एवं कार्रवाई के लिए आपका पक्ष जानना जरूरी है। इसलिए 19 सितंबर को दोपहर 2.30 बजे वह आयोग में पेश हों। 

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