बैठक में देरी से पहुंचे सचिव, तो कैबिनेट मंत्री ने किया ऐसा कि उड़ गई अफसरों की नींद
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बैठक में सचिव के देरी से पहुंचने पर ऐसा हंगामा खड़ा हो गया कि अफसरों की नींद उड़ गई। जानिए पूरा मामला...
परिवहन मंत्री यशपाल आर्य और परिवहन सचिव डी. सेंथिल पांडियन के बीच कई दिन से चल रही तल्खी बृहस्पतिवार को खुलकर सामने आ गई। 24 जनवरी को कैबिनेट बैठक में फैसला लिया गया कि विभागीय मंत्री अपने महकमे की समीक्षा कर उपलब्धिों का बताएंगे।
इसी के तहत बृहस्पतिवार को परिवहन मंत्री की ओर से बुलाई गई बैठक में सचिव ने पहले बैठक को एक घंटा आगे बढ़ा दिया और इसके बावजूद वह खुद डेढ़ घंटे देरी से पहुंचे। इस पर परिवहन मंत्री उखड़ गए। पहले उन्होंने मुख्य सचिव उत्पल सिंह को फोन किया, ‘विभाग में ठीक नहीं चल रहा है।
अफसर तो मंत्री को कुछ समझ ही नहीं रहे हैं। अब वह दरवाजे पर पहुंचे हैं...वह काफी देर से इंतजार कर रहे हैं..या पांडियन को हटा दें या मुझे हटा दे। उनकी कार्यप्रणाली ठीक नहीं है।’ परिवहन मंत्री ने बृहस्पतिवार को विभाग की समीक्षा बैठक बुलाई थी।
फोन पर याद दिला दिए पिछले सारे विवाद
बैठक 11 बजे शुरू होनी थी, लेकिन सचिव ने कार्यक्रम में व्यस्तता के चलते इसे 12 बजे करने का अनुरोध किया, जिसे स्वीकार कर लिया गया। इसके बाद मंत्री अपने कक्ष में सचिव के आने का इंतजार करते रहे।
अनुसचिव और अपर सचिव (परिवहन) मंत्री को सफाई देते रहे कि सचिव बस पहुंचने ही वाले हैं। जब अपर सचिव ने बताया कि सचिव साहब बैठक में पहुंच गए है तो मंत्री ने कहा कि अब उन्हें इंतजार करने दे।
इसके बाद बैठक में पहुंचते ही यशपाल आर्य ने सचिव को जमकर खरीखोटी सुनाने के साथ उनके एसडीएम रहते हुए पुराने विवाद की याद भी दिलाई। कैसे तत्कालीन एनडी तिवारी सरकार के समय रुड़की के विधायक उनसे नाराज होकर विधानसभा में विशेषाधिकार हनन का मामला लाने वाले थे और तब उन्होंने (विधानसभा अध्यक्ष) रहते हुए उनके शुरुआती करियर को देखते हुए मदद की थी।
बैठक में परिवहन मंत्री का रुख देखते हुए अफसरों को सांप सूंघ गया। जब विभागीय मंत्री की नाराजगी के संबंध में परिवहन सचिव से बात करने की कोशिश की गई, तो उन्होंने किसी भी तरह की टिप्पणी से इनकार कर दिया।
इन मामलों में आमने-सामने आए थे मंत्री और सचिव
परिवहन मंत्री और परिवहन सचिव के बीच लंबे समय से गतिरोध बना हुआ है। परिवहन मंत्री की जानकारी के बगैर ही उनके आदेश पर हटाए गए एक परिवहन अधिकारी रत्नाकर सिंह को बहाल कर तैनाती दी गई थी। इसमें परिवहन मुख्यालय की भूमिका पर मंत्री ने आपत्ति जताई थी।
बताया जाता है कि 2017 में परिवहन मंत्री की जानकारी के बिना ही कर्मचारियों से जुड़ा मामला कैबिनेट बैठक में लाने की कोशिश की गई थी, जिसे परिवहन मंत्री ने खुद रोका था और नाराजगी भी जताई थी। परिवहन मुख्यालय ने नियमों को ताक पर रखकर वाहनों के रिफ्लेक्टर टेप लगाने का ठेका दिया था। इस मामले के परीक्षण में भी साबित हुआ था कि गड़बड़ी हुई थी।
इसके बावजूद परिवहन मुख्यालय के उच्चाधिकारियों के दबाव में ठेका निरस्त नहीं किया गया, जबकि परिवहन मंत्री मामले में कार्रवाई की बात कह चुके थे। इसी तरह परिवहन मिनिस्ट्रीयल कर्मचारी संघ ने डीलर प्वाइंट रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था को लेकर सवाल उठाया था। आरोप लगाया था कि इससे वाहन रजिस्ट्रेशन टैक्स कम हो रहा है।
ऐसे में परिवहन मंत्री ने मामले की पूरी जांच कर डीलर प्वाइंट डाटा एंट्री व्यवस्था को लागू करने के निर्देश दिए थे। इसके लिए बाकायदा एक पत्र भी जारी किया गया था, लेकिन मुख्यालय ने कुछ ही दिनों में व्यवस्था को लागू कर दिया। ऐसे में नाराजगी कई दिन से बनी हुई थी, जो बृहस्पविार को खुलकर सामने आ गई।