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पर्यावरण के लिए खतरा बन रहा बायोमेडिकल वेस्ट

Thu, 06 Jul 2017 11:20 AM IST
बिशन सिंह बोरा / अमर उजाला, देहरादून
बिशन सिंह बोरा / अमर उजाला, देहरादून Updated Thu, 06 Jul 2017 11:20 AM IST
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bio medical waste dangerous for environment
biomedical waste

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अस्पष्ट दिशा निर्देशों के कारण प्राईवेट अस्पतालों में बायोमेडिकल वेस्ट निस्तारण को लेकर बड़ी समस्या खड़ी हो गई है। 

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सरकारी व निजी अस्पतालों में बायोमेडिकल वेस्ट ट्रांसपोर्टेशन का जिम्मा पहल संस्था के पास है, जबकि बायोमेडिकल वेस्ट के ट्रीटमेंट के लिए एमपीसीसी (मेडिकल पॉल्यूशन कंट्रोल कमेटी) को अधिकृत किया गया है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पूर्व के दिशा निर्देशों के तहत इन दोनों संस्थाओं को ट्रांसपोर्टेशन एवं ट्रीटमेंट के लिए अधिकृत किया गया था, लेकिन दोनों संस्थाओं के बीच विवाद के कारण बायोमेडिकल वेस्ट का निस्तारण ही नहीं हो पा रहा है। इसको लेकर दून में पर्यावरण प्रदूषण बड़ी समस्या बन गई है।
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दून के कई बड़े प्राईवेट व सरकारी अस्पतालों में बायोमेडिकल वेस्ट के निस्तारण को लेकर इन दो संस्थाओं के साथ एमओयू किया जाता रहा है। मार्च 2017 में कई संस्थाओं का एमओयू रिन्यूवल होना था, लेकिन प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा अभी तक कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश न दिए जाने के कारण कुछ अस्पतालों का कहना है कि उनके  सामने बायोमेडिकल वेस्ट के लिए अधिकृत संस्थाओं को ढूंढना चुनौती बना हुआ है।
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श्री महंत इंदिरेश अस्पताल के वरिष्ठ जनसंपर्क अधिकारी भूपेंद्र रतूड़ी के मुताबिक प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड भी इस बात को लेकर स्पष्ट नहीं है कि कौन सी संस्था ट्रांसपोर्टेशन का काम करेगी और कौन सी संस्था बायोमेडिकल वेस्ट के निस्तारण का काम करेगी। अस्पताल की ओर से इसके लिए बोर्ड को पत्र लिखा गया था, लेकिन बताया गया कि जल्द ही इस बारे में पत्र लिखकर अवगत करा दिया जाएगा। 

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से इसे लेकर कोई स्पष्ट दिशा निर्देश न होने से अस्पतालों के सामने असमंजस है। स्थिति यह है कि बायोमेडिकल वेस्ट का निस्तारण कहां हो रहा है इसका किसी को पता नहीं है। अस्पतालों के एमओयू रिन्यू नहीं हो पा रहे हैं। फि लहाल पहल संस्था द्वारा अस्पतालों से बायोमेडिकल वेस्ट का उठान तो किया जा रहा है। लेकिन निस्तारण को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। बायोमेडिकल निस्तारण के लिए पूर्व में अधिकृत की गई संस्था एमपीसीसी (मेडिकल पॉल्यूशन कंट्रोल कमेटी) के सदस्यों का कहना है कि जो बायोमेडिकल वेस्ट पहल संस्था द्वारा उठाया जा रहा है, वह बायोमेडिकल वेस्ट निस्तारण के लिए हमारे पास नहीं पहुंच पा रहा है।

जो संस्था अब तक बायोमेडिकल वेस्ट का उठान कर रही थी और जो इसका निस्तारण कर रही थी, उन दोनों के बीच विवाद है। इससे इसका निस्तारण करने वाली संस्था कूड़ा उठाने वाली संस्था के साथ एग्रीमेंट नहीं कर रही है। पूर्व में उठान कर रही संस्था बोर्ड से अधिकृत नहीं है न ही उसके पास एग्रीमेंट है। इस स्थिति में निजी व सरकारी अस्पताल एमपीसीसी से रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं।

- विनोद सिंघल, सदस्य सचिव उत्तराखंड पर्यावरण संरक्षण एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड 

वर्तमान में जितने बायोमेडिकल वेस्ट का निस्तारण हो रहा है, हम उससे पांच गुना अधिक का निस्तारण कर सकते हैं। बायोमेडिकल वेस्ट के उठान के लिए हमारे पास पर्याप्त वाहन हैं, जरूरत पड़ने पर हम और वाहन बढ़ा सकते हैं, आईएमए ने इसके निस्तारण का चार साल से कोई पैसा नहीं बढ़ाया। जबकि हम सरकारी रेट से 35 फीसदी कम पर इसका निस्तारण कर रहे हैं।
- डॉ. विनय कुमार वर्मा, सचिव एमपीसीसी 

हम एमपीसीसी को बायोमेडिकल वेस्ट देने को तैयार हैं, लेकिन संस्था को चाहिए कि वह कुछ रिजनेबल रेट लगाए। उसका प्रतिनिधि इस बारे में आकर बात कर सकता है। 
- गीता खन्ना, चेयरमैन आईएमए 

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