ये भी हैं 'आसाराम', जिन्होंने भक्तों की आस्था को डिगाते हुए किया विश्वास का खून, करतूत बेहद शर्मनाक
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बुधवार को जोधपुर की अदालत से बलात्कारी बाबा आसाराम को अपने कुकर्मों की सजा उम्रकैद के रूप में मिल गई, लेकिन यहां अभी भी कई 'आसाराम' हैं, जिन्हें सजा नहीं मिली है।
दुष्कर्म का आरोपी आश्रम संचालक पुलिस की पकड़ से बाहर
काशीपुर में मासूम बच्चों के साथ यौन शोषण करने का आरोपी डेरा आश्रम संचालक तीन माह बाद भी पुलिस के हत्थे नहीं चढ़ सका है। पुलिस उसकी गिरफ्तारी के प्रयास कर रही है।
23 जनवरी 2018 को ग्राम कचनालगाजी में सुनसान स्थान पर डेरा ईशर प्रकाश आश्रम चलाने वाले प्रताप सिंह पर आश्रम के चार बच्चों के यौन शोषण का आरोप लगा था। पुलिस ने पीड़ित बच्चों का मेडिकल कराकर आरोपी संचालक के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था।
उसके बाद से ही संचालक प्रताप सिंह फरार चल रहा है। आश्रम में रहने वाले बच्चे आसपास के क्षेत्रों से आए थे। वह डेरा आश्रम में रहकर गुरमुखी पढ़ते थे। इसके अलावा वो स्कूल पढ़ने भी जाते थे। घटना के बाद महिला बाल कल्याण समिति की अध्यक्षा रजनीश बत्रा ने ग्राम कचनाल गाजी स्थित उस आश्रम का निरीक्षण कर पीड़ित बच्चों की काउंसलिंग भी की थी। इसमें पीड़ित बच्चों ने आश्रम संचालक की करतूतें बयान की थीं।
जेल में सजा काट रहा पिथौरागढ़ का आसाराम
अदालत से दोषी करार दिए गए आसाराम की तर्ज पर यहां भी एक तथाकथित बाबा ने महिला का यौन शोषण किया था। भेद खुलने के बाद आरोपी को गिरफ्तार कर मुकदमा दर्ज किया गया। फिलवक्त दुष्कर्मी बाबा जेल में 10 साल की सजा काट रहा है।
वर्ष 2013 के सितंबर में हुड़ैती स्थित कौशल्या देवी मंदिर के बाबा तरसेम सिंह उर्फ महंत तेज गिरी पर गांव की एक महिला के यौन शोषण का आरोप लगा था। बाबा ने महिला के साथ दुष्कर्म के बाद अश्लील क्लीपिंग भी बनाई थी। आरोप सामने आने के बाद पुलिस ने आरोपी बाबा के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया। इस बीच नगर से भागने की फिराक में आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया।
आरोपी बाबा के खिलाफ आईपीसी के साथ ही आईटी एक्ट में केस दर्ज किया गया। इस मामले की सुनवाई के बाद अदालत ने बाबा को दुष्कर्म का दोषी ठहराया। अदालत ने 22 फरवरी 2016 को दिए फैसले के तहत आरोपी को 10 साल कारावास की सजा सुनाई थी। फिलवक्त बाबा जेल में बंद है। आरोपी बाबा मूल रूप से हिमाचल के पांवटा साहिब का रहने वाला है। वह यहां लगभग 12 सालों से मंदिर में रह रहा था।
चंपावत में भी एक आसाराम, दुष्कर्म में काट रहा पांच साल की कैद
कथावाचक आसाराम की तरह ही चंपावत जिले में भी एक दुष्कर्मी बाबा है। जिसे अदालत ने सजा भी दी। पुलिस कार्यालय से मिली जानकारी के मुताबिक झूंसी (इलाहाबाद) का रहने वाला बाबा रामचरण दास टनकपुर में एक मठ बनाकर रहता था।
2012 में इस कथित बाबा के पास मानसिक रूप से अस्वस्थ एक लड़की को परिजन लाए। लड़की को ठीक करने के बहाने बाबा ने उसके साथ दुष्कर्म किया। अदालत ने बाबा को पांच साल की सजा सुनाई।
आसाराम की करतूत से आस्था और विश्वास का हुआ कत्ल
अंध भक्ति नहीं है धर्म: अशोक गिरि जी महाराज
चंपावत। हिंग्ला देवी मंदिर के दिगंबर 1008 अशोक गिरि जी महाराज का कहना है कि अंध भक्ति धर्म नहीं है। आस्था के बावजूद अंध भक्ति से बचते हुए विवेकपूर्ण तरीके से सही व गलत के अंतर का परीक्षण करना चाहिए।
डिगती है आस्था: महंत रमनपुरी
मानेश्वर धाम के महंत रमनपुरी महाराज का कहना है कि कथावाचक आसाराम की काली करतूत से आस्था पर चोट पहुंची है। ऐसी निंदनयी हरकत से आम लोगों की धर्म से दूरी बढ़ती है।
धर्म के चोले में काली करतूत
बाबा आदित्य दास जी कहते हैं कि आसाराम के पाप ने धर्म के चोले में काली करतूत को उजागर किया है। कथा के जरिए भक्तों को सद्मार्ग की राह बताने वाले कथावाचक को फांसी की सजा दी जानी चाहिए थी।
दुराचारियों को बेनकाब करना जरूरी: भुवन गिरि जी
देवीधार के बाबा भुवन गिरि जी महाराज कहते हैं कि ऐसे आध्यात्मिक लोग समाज के लिए भारी कलंक हैं। धर्म में घुसे ऐसे दुराचारी लोगों को बेनकाब करना जरूरी है।