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Dehradun News: कच्ची सड़क पर पर्यटक और ग्रामीण कर रहे जोखिम भरा सफर

Wed, 15 Nov 2023 11:42 PM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Wed, 15 Nov 2023 11:42 PM IST
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Asphaltization of about six kilometers has not been done
Iदो मुख्य मार्गों को जोड़ता है बिरमोऊ मोटर मार्ग, दो हजार की आबादी करती है आवागमन-
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I07 साल बाद भी मोटर मार्ग का डामरीकरण नहीं हुआI

तहसील क्षेत्र के बिरमोऊ मोटर मार्ग के करीब छह किलोमीटर हिस्से का डामरीकरण निर्माण के सात साल बाद भी नहीं हो पाया है। यह मार्ग कालसी-चकराता मोटर मार्ग और त्यूणी-चकराता-मसूरी राष्ट्रीय राजमार्ग को आपस में जोड़ता है। मोटर मार्ग से पर्यटकों के साथ करीब दो हजार की आबादी भी आवागमन करती है। उबड़-खाबड़ मार्ग पर पर्यटक और स्थानीय ग्रामीण जोखिम भरा सफर करने को मजबूर हैं।
वर्ष 2006 में त्यूणी-चकराता-मसूरी राष्ट्रीय राजमार्ग से बिरमोऊ तक चार किलोमीटर मोटर मार्ग का निर्माण किया गया था। वर्ष 2015 में मोटर मार्ग का विस्तार करते हुए कालसी-चकराता मोटर मार्ग पर स्थित लालपुल से जोड़ दिया गया। करीब सात साल बाद भी मोटर मार्ग का डामरीकरण नहीं किया गया। इस मोटर मार्ग से बिरमोऊ, बिनोऊ, बनतोऊ गांव के लोग आवागमन करते हैं। पर्यटक स्थल रामताल गार्डन, नवीन चकराता पुरोड़ी, चिरमिरी, ठाणा डांडा, चिरमिरी आदि इसी मोटर मार्ग से जुड़े हैं। दो मुख्य मार्गाें को जोड़ने वाले मोटर मार्ग से ग्रामीणों के साथ ही पर्यटक भी आवागमन करते हैं। ग्रामीण कई बार विभागीय अधिकारियों से लिखित और मौखिक रूप से मार्ग के डामरीकरण की मांग कर चुके हैं, लेकिन सुनवाई नहीं हुई है।
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Iपर्यटक अक्सर बदहाल सड़कों की शिकायत करते हैं। बिरमोऊ मोटर मार्ग पर्यटक स्थल के 10 किलोमीटर पास पड़ता है। वाया चकराता जाने में इतनी अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती है। गूगल मैप पर भी यह मोटर दर्शाया जाता है। ऐसे में पर्यटक समय बचाने के लिए मोटर मार्ग से निकलते है। कच्चे रास्ते से सफर करते हुए परेशान हो जाते हैं। सड़क का डामरीकरण बहुत जरूरी है। -वरुण सिंह, होटल व्यवसायी, नवीन चकराताI
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Iहल्की बारिश में मोटर मार्ग पर मलवा आ जाता है। इसके चलते कई बार मार्ग बंद हो जाता है। इसका खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ता है। मोटर मार्ग बंद होने से किसानों को अपनी नकदी फसलों को मंडी तक पहुंचाने के लिए वाया उपरौली होते हुए 30 किलोमीटर की अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती है। किराया भी अधिक देना पड़ता है। -खुशी राम शर्मा, ग्रामीण बनतोऊ I



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