वाइब्रेंट विलेज योजना: उत्तराखंड में चीन-नेपाल सीमा से सटे गांव होंगे गुलजार, बढ़ेगी पर्यटकों की चहलकदमी
उत्तराखंड का 658 किलोमीटर हिस्सा अंतरराष्ट्रीय सीमा से जुड़ा है। इसमें 283 किलोमीटर नेपाल व 375 किलोमीटर चीन सीमा के अधीन है। वाइब्रेंट विलेज योजना के तहत पिथौरागढ़, चमोली, उत्तरकाशी, चंपावत व ऊधमसिंह नगर जिले के 91 गांव में शामिल हैं।
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चीन-नेपाल सीमा से सटे उत्तराखंड के 91 गांवों में आधारभूत सुविधाएं विकसित होने से पर्यटकों की चहलकदमी बढ़ेगी। वाइब्रेंट विलेज योजना के तहत इन गांवों में सड़क, बिजली, नेटवर्क, स्वास्थ्य सुविधा के साथ पर्यटन को बढ़ावा देने वाली परियोजनाएं को धरातल पर उतारना प्रदेश सरकार की प्राथमिकता है।
उत्तराखंड का 658 किलोमीटर हिस्सा अंतरराष्ट्रीय सीमा से जुड़ा है। इसमें 283 किलोमीटर नेपाल व 375 किलोमीटर चीन सीमा के अधीन है। वाइब्रेंट विलेज योजना के तहत पिथौरागढ़, चमोली, उत्तरकाशी, चंपावत व ऊधमसिंह नगर जिले के 91 गांव में शामिल हैं। योजना के तहत इन मांगों में आधारभूत सुविधाएं बढ़ाई जाएंगी ताकि गांव के लोग पलायन न करे। योजना के पहले चरण में केंद्र सरकार ने 51 गांवों को शामिल किया था और दूसरे चरण में 40 गांव को योजना से जोड़ा है।
ग्राम्य विकास विभाग ने चंपावत, ऊधमसिंहनगर, पिथौरागढ़ जिले के नेपाल सीमा से सटे 40 गांवों में विकास कार्यों का प्लान कर 221 करोड़ का प्रस्ताव केंद्र को भेजा है। पर्यटन के साथ ही अन्य विभागों की ओर से विकास कार्यों की योजना तैयार की गई है।
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सरकार ने वाइब्रेंट विलेज योजना में शामिल जिलों से चयनित गांवों में पांच-पांच योजनाएं तैयार करने को कहा है, जो गांवों के समग्र विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकें। परियोजनाओं में क्षेत्र की स्थानीय आवश्यकताओं, कनेक्टिविटी, बुनियादी सुविधाओं, पर्यटन, आजीविका को शामिल किया जाएगा।
ग्राम्य विकास सचिव धीराज गर्ब्याल ने बताया कि वाइब्रेंट विलेज योजना में प्रदेश में 91 गांवों में आधारभूत सुविधाओं के विकास के लिए कार्ययोजना बनाकर केंद्र सरकार को भेजी गई। आने वाले में सीमावर्ती गांवों में पर्यटन को बढ़ावा मिलने से स्थानीय लोगों को स्वरोजगार के अवसर मिलेंगे।