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आर्मी चीफ ने बताई अपने बचपन की ऐसी बातें कि हंसकर लोटपोट हो जाएंगे आप

Sun, 10 Sep 2017 03:38 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून Updated Sun, 10 Sep 2017 03:38 PM IST
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army chief bipin rawat childhood incidents
bipin rawat in his school

देश की सीमाओं पर होने वाले विवादों के मामले में सख्त फैसले लेने के लिए स्कूल ने मुझे सख्त बनाया है। एक सवाल के जवाब में सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने यह बात कही।

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उन्होंने कहा कि स्कूल ने जो कुछ सिखाया, वह आज सबके सामने है। अनुशासन, ईमानदारी और सख्ती यहां के शिक्षकों ने सिखाई है। यहां केवल पढ़ाई ही नहीं, बल्कि छात्र का सर्वांगीण विकास होता है।
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कैंब्रियन हॉल स्कूल के 51वें स्थापना दिवस एवं वार्षिक समारोह में बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे जनरल बिपिन रावत ने यह बात कही। इस दौरान वह स्कूल में बिताए अपने पुराने दिनों की यादों में खोए नजर आए।

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स्कूल में कुछ ऐसे थे आर्मी चीफ

army chief bipin rawat childhood incidents
genral bipin rawat in dehradun
जनरल रावत ने कहा कि उनका कैंब्रियन हॉल एक ऐसा स्कूल है, जो छात्र की पूरी पर्सनालिटी का विकास करता है। हमेशा यहां स्टडी हार्ड की नसीहत मिली। हम लगातार अपना होमवर्क समय से पूरा करते थे।

परीक्षा की तैयारी करते थे, जिसका आज यह नतीजा है। मुझे खुशी हुई यह देखकर कि आज भी स्कूल अपने पैटर्न पर कायम है। उन्होंने कहा कि खेल गतिविधियां बेहद जरूरी हैं। हमारी स्पोर्ट्स टीमें बेहद अच्छी थी।

हम लखनऊ, कोलकाता के अलावा दून में फुटबॉल, बास्केटबॉल सहित तमाम प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेते थे। कई बार तो दून स्कूल और आरआईएमसी जैसी टीमों को हम कड़ी टक्कर देते थे। एथलेटिक्स, क्रॉस कंट्री सहित तमाम खेलों में हम आगे रहते थे। मुझे याद है कि एक बार हमने स्कूली दिनों में हमने सीधे आरआईएमसी को चैलेंज दिया था।
 

स्कूल के अनुशासन ने इस मुकाम तक पहुंचाया

army chief bipin rawat childhood incidents
स्कूल ने हमेशा आगे बढ़ने की प्रेरणा दी - फोटो : SELF
हम बीमार होते थे, लेकिन स्कूल में जो सिस्टर रहती थी, वह नहाने को इंतजार करती थी। हम कई बार बचने की कोशिश करते थे, लेकिन बच नहीं पाते थे। यह स्कूल का अनुशासन ही था, जिसने आज इस मुकाम तक पहुंचाया।

स्कूल ने हमेशा आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। कठिन कार्य करने की प्रेरणा दी। आज मैं केवल यह कह सकता हूं कि आप कैंब्रियन हॉल में ‘शिक्षार्थ आइए और सेवार्थ जाइए’। याद रखो, आपके टीचर आपके लिए आपके अभिभावकों की तरह ही अहम हैं। कैंब्रियन हॉल ने मुझे काफी कुछ दिया। 

सेना प्रमुख अपने स्कूल पहुंचने से पहले क्लेमेंटटाउन स्थित सेना की डिविजन में पहुंचे। यहां कई अहम मुद्दों पर उन्होंने चर्चा की। उन्होंने बताया कि इस बहाने अपने स्कूल में आया तो इससे ज्यादा खुशी की बात नहीं हो सकती। 

जनरल बिपिन रावत ने बताया कि उन्होंने कक्षा दो तक की पढ़ाई कांवेंट ऑफ जीसस एंड मैरी स्कूल से की है। तब उनके साथ कोई लिंगभेद नहीं हुआ था। आज वह स्कूल केवल छात्राओं के लिए ही है। तब भी छात्राओं के लिए ही था लेकिन उन्हें कोई प्रॉब्लम नहीं आई।
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