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इस टैक्नीक से कंप्यूटर के सीपीयू को काजल की डिब्बी के बराबर बनाना चाहते थे मिसाइलमैन

Sun, 15 Oct 2017 07:13 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, देहरादून
टीम डिजिटल/अमर उजाला, देहरादून Updated Sun, 15 Oct 2017 07:13 PM IST
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Apj abdul kalam research on nano technique for computer cpu

डॉ अब्दुल कलाम ने कंप्यूटर के सीपीयू को एक काजल की डिब्बी के बराबर बनाने की टैक्नीक पर रिसर्च की थी। आइए जानते हैं क्या है ये टैक्नीक...

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पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने कुमाऊं विवि से नैनो तकनीक पर कार्य करने तथा इसे अध्ययन का मुख्य केंद्र बनाने का आह्वान किया था। उनका कहना था  कि कल्पना कीजिए उस संसार की जहां कंप्यूटर का सीपीयू एक काजल की डिब्बी के बराबर हो और वर्तमान से सैकड़ों गुना ज्यादा क्षमता वाला हो, मकान की छत ही बिजलीघर के रूप में काम करे, दवा का असर खाने के साथ ही हो जाय और गंभीर रोग भी तत्काल ठीक हो जाए।
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पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने 2011 में ऐसे चमत्कारिक कार्य संभव कर सकने वाली तकनीक नैनो पर कार्य करने तथा इसे अध्ययन का मुख्य केंद्र बनाने का आह्वान कुमाऊं विवि से किया था। विवि ने अब इस पर कार्य प्रारंभ कर दिया है तथा इसके बेहतरीन परिणाम आने की पूरी संभावना है।

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नैनो टेक्नोसेंटर में 12 विद्यार्थी कर रहे शोध

Apj abdul kalam research on nano technique for computer cpu

कुमाऊं विश्वविद्यालय परिसर में डा. कलाम ने 10 अगस्त 2011 को विवि के दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए नैनो टेक्नोलॉजी की संभावनाओं पर विस्तृत व्याख्यान देते हुए इस पर कार्य करने का सुझाव दिया था।

इसके बाद विवि ने इस पर काम भी शुरु कर दिया था। 23 फरवरी 2015 को यहां नैनो साइंस एंड नैनो टेक्नोसेंटर की शुरुआत की गई। जिसमें एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. एनजी साहू के निर्देशन में 12 विद्यार्थी नैनो साइंस पर शोध कर रहे हैं।
 

ये है वो टैक्नीक

Apj abdul kalam research on nano technique for computer cpu

प्रो. धामी के अनुसार ग्राफीन का निर्माण होने से सोलर एनर्जी, दूरसंचार, कंप्यूटर, मेडिकल आदि के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव आएंगे, जिनका लाभ विवि को मिलेगा। उन्होंने बताया कि इलेक्ट्रोनिक्स में वर्तमान में  प्रयुक्त होने वाली सिलिकॉन आधारित प्रणाली 15 वर्षों के भीतर पूरी तरह ग्राफिन आधारित हो जाएगी।

नैनो टैक्नोलाजी विभाग के अध्यक्ष डॉ. साहू ने बताया कि 2007 में हंगरी के वैज्ञानिक आंद्रेजीन तथा एके नोबासोलो ने ग्राफिन मैटीरियल की खोज की थी, जिसके लिए उन्हें नोबल पुरस्कार भी मिला था।

यह मैटीरियल इतना मजबूत है कि फुलस्कैप कागज की मोटाई व आकार का इसका टुक ड़ा दस हजार हाथियों का वजन संभाल सकता है। इलेक्ट्रोनिक्स में इसके प्रयोग से सीपीयू का आकार एक हजार गुना छोटा आर क्षमता कई गुनी बढ़ जाएगी।

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