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डर को हराकर बहादुरी से प्रीत लगा ‘सिकंदर’ बन गई राखी, गुलदार से भिड़कर बचाई थी भाई की जान

Thu, 02 Jan 2020 02:21 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Thu, 02 Jan 2020 02:21 PM IST
सार

  • गुलदार के खूंखार पंजों से अपने भाई को बचाने वाली 11 वर्षीय बहादुर राखी को अमर उजाला ने किया सम्मानित 
  • अमर उजाला के अपराजिता कार्यक्रम में बहादुर राखी ने बताई अपने साहस की कहानी
  • कार्यक्रम में पहुंचे राखी के हमउम्र बच्चों ने तालियां बजाकर किया राखी का सम्मान  

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Amar Ujala will honor brave Rakhi who saved brother by fighting Guldar
राखी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

‘मत थर-थर-थर-थर कांपों तुम, इस अवसर को अब भांपों तुम, ये वक्त तुम्हें है पुकार रहा..., है वही सिकंदर जीवन का, बहादुरी से जिसकी प्रीत है, ज्ञान यही है जीवन का कि डर के आगे ही जीत है।’ यह कविता कोटद्वार के दूरस्थ गांव देव कुंडई की बहादुर राखी के जीवन पर सटीक बैठती हैं।

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यह वही राखी है, जिसने नन्हें हाथों से गुलदार के खूंखार पंजों को मात देकर अपने भाई का जीवन बचा लिया। बुधवार को अपने भाई राघव के साथ अमर उजाला कार्यालय पहुंची बहादुर राखी को अपराजिता कार्यक्रम में सम्मानित किया गया। बहादुर राखी को इस साल के नेशनल ब्रेवरी अवार्ड के लिए चुना गया है। गणतंत्र दिवस पर भारत के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद नेशनल ब्रेवरी अवार्ड से सम्मानित करेंगे।   
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कार्यक्रम के दौरान राखी ने चार माह पहले घटित हुए साहसपूर्ण वाकये के बारे में भी बताया। 11 वर्षीय राखी घटना को याद कर आम आदमी की तरह सहमती नहीं हैं। बल्कि, बेबाक तरीके से बयां करती हैं। राखी ने कहा कि मैं उस दिन बिल्कुल भी नहीं डरी।
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मेरी पीठ पर भाई था, जिसे बचाने को मैं उसकी ढाल बन गई। गुलदार ने मुझ पर काफी देर तक वार किए, लेकिन मैंने भाई को एक खरोंच तक नहीं आने दी। गांव वालों के शोर मचाने पर जब गुलदार भागा तो मैं बेहोश हो गई।

बेटी के साहस को देखकर हर कोई हतप्रभ

राखी की बहादुरी की कहानी को सुनकर कार्यक्रम में आईं उसकी हमउम्र बच्चियों ने तालियां बजाकर उसका उत्साहवर्धन भी किया। गुलदार के हमले में घायल राखी के सिर और पीठ पर कुल 45 टांके आए थे। वर्तमान में वह पूरी तरह ठीक है।

कार्यक्रम के दौरान राखी की दादी विमला देवी भी मौजूद थीं। उन्होंने अपने गांव और आसपास में गुलदार की दहशत के बारे में भी बताया। इस परिचर्चा में उन्होंने ऐसे खूंखार जानवरों को मारने के संबंध में बने कानूनों की निंदा भी की।

उन्होंने बताया कि किस कदर क्षेत्र में गुलदार के नाम से ही लोग सहम जाते हैं, लेकिन उनकी पोती ने जो किया वह पहाड़ वासियों ही नहीं बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणादायक है।

गुलदार को मारो, जेल मैं जाऊंगी : विमला 

ऐसे में अब सरकार को सोचना चाहिए कि वन्य जीवों और मानव के बीच बढ़ते संघर्ष को रोकने के लिए कुछ ठोस कदम उठाए जाएं। इस अवसर पर साक्षी नेगी, शगुन नेगी, स्वास्तिका सती, अनवी सती, गुंजन भटराई, गौरी शर्मा, अतान्या, अनवी, श्रेया शर्मा बच्चियां भी उपस्थित रहीं। 

राखी की दादी 70 वर्षीय विमला देवी ने कहा कि गुलदारों की संख्या इतनी बढ़ गई है कि अब उन्हें मारने पर सजा नहीं होनी चाहिए। यदि ऐसी बात भी है तो उस गुलदार को मारो और यदि जेल भी जाना पड़ा तो मैं जाऊंगी। कम से कम किसी मां की गोद से बच्चे को तो वह निवाला नहीं बनाएगा।

हर कोई राखी जैसा बहादुर और राघव सा भाग्यशाली नहीं

गुलदार के दहशत से सहमे लोगों का कहना है कि हर कोई न तो राखी जैसा बहादुर है और न ही राघव सा भाग्यशाली। किसी के घर के आंगन से खेलता बच्चा गायब हो जाता है तो कोई मां बच्चे के लिए बिलखती रह जाती है। यह सब घटनाएं अब आम हो गईं हैं। कारण है कि बीते दो सालों से गुलदारों के हमले बढ़ गए हैं। शाम के वक्त से ही लोग घरों में कैद हो जाते हैं। 

दरअसल, जिन घरों में पहले हंसते खेलते परिवार रहते थे वे खाली घर इस खूंखार जानवर का ठिकान बन गए हैं। गांवों के आसपास उगी लैंटाना झाड़ियों में छुपकर गुलदार घात लगाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पलायन और प्रशासन की लापरवाही के चलते ही यह संघर्ष हो रहा है।

पहले जिला प्रशासन गांवों के आसपास लैंटाना की झाड़ियों को काटकर हर साल सफाई कराता था, लेकिन अब ऐसा नहीं होता है। पहले गुलदार रात या शाम के समय हमला करता था, लेकिन अब वह दिन में भी दिख जाता है।

भरी दोपहरी लोगों को और पालतू जानवरों को शिकार बना रहा है। सरकार इसका कुछ हल निकालने के बजाय अब गांव वालों को प्रशिक्षण देने की बात कर ही है, जिससे कि उन्हें यह सिखाया जा सके कि गुलदार को कैसे भगाया जा सके। 

‘जब बेटे की चप्पल हाथों में लिए बिलखती रही मां’

राखी की दादी अपने गांव की एक और घटना बताती हैं। उन्होंने बताया कि पिछले साल एक बच्चा अपने आंगन में खेल रहा था। उसकी मां किसी काम में लगी थी। कुछ देर बाद उसने आंगन में बच्चे की चप्पल देखी तो उसे आवाज लगाने लगी। उसे लगा कि शायद खेलते-खेलते में बच्चा कहीं चला गया, लेकिन शाम के वक्त गांव से कुछ दूरी पर एक खेत में बच्चे का क्षत-विक्षत शव पड़ा मिला। पता चला कि उसे आंगन से ही गुलदार उठाकर ले गया था। 

किसी भी मुश्किल में डरने की जरूरत नहीं 
अपराजिता कार्यक्रम में आए बच्चों ने राखी की कहानी से सीख भी ली। अवनी, स्वास्तिका, गौरी आदि बच्चियों ने राखी की कहानी सुनकर कहा कि इससे पता चलता है कि हमें किसी भी परेशानी या मुश्किल से डरने की जरूरत नहीं है। बल्कि उसका डटकर मुकाबला किया जाए तो खूंखार से खूंखार जानवर को भी मात दी जा सकती है।  

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