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1971 जंग भारत ने जीती, लेकिन कुर्बानी कश्मीरी पंडितों ने दी, अमेरिका पर लगाए संगीन इल्जाम

Sat, 25 Jan 2020 09:00 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Sat, 25 Jan 2020 09:00 PM IST
सार

  • कश्मीरी पंडित बोले-1971 की भारत-पाकिस्तान जंग के बाद पाकिस्तान ने रचनी शुरू की साजिश
  • 1989-90 में कश्मीरी पंडित बेघर हुए तो तब उठा साजिश से पर्दा, बोले-सरकार को भनक क्यों नहीं लगी?

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amar ujala samvad : kashmiri pandits painful stories
संवाद के दौरान मौजूद कश्मीरी पंडित - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

1971 में हुई भारत-पाक जंग में भले ही भारत ने बांग्लादेश विभाजन के रूप में ऐतिहासिक कामयाबी हासिल की हो, लेकिन इस जंग के बदले कश्मीरी पंडितों को कुर्बानी देनी पड़ी है। कश्मीरी पंडित तो कुछ ऐसा ही मानते हैं।

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उनका मानना है कि इस युद्ध में बुरी हार के बाद पाकिस्तान ने कश्मीरी पंडितों को निशाना बनाना शुरू किया। इस साजिश को न भारत सरकार समझ सकी न कश्मीरी पंडित। 1989-90 में जब कश्मीरी पंडितों को बेघर किया तो तब जाकर यह साजिश मालूम हुई। आखिर उनका क्या कसूरा था?
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उस दर्दनाक दृश्यों को बयां कर भावुक हुए कश्मीरी पंडितों ने कहा कि 1971 की जंग के बाद पाकिस्तान साजिश रचता रहा, भारत सरकार को इसकी जानकारी क्यों नहीं लगी? कश्मीरी पंडितों को धमकाया जाना शुरू हो गया था। घरों से बाहर आओ तो कश्मीर छोड़ने की धमकी भरे पोस्टर नजर आते थे।

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अमेरिका ने दिए थे हथियार

 दिन-दोपहरी में कश्मीरी पंडितों को मौत के घाट उतार दिया जाता था। सब कुछ खुलेआम होता था, लेकिन कोई उनके बचाव में नहीं आता था। उन्होंने कहा कि इस साजिश से कश्मीरी पंडित पूरी तरह अंजान थे। 1989-90 में पाकिस्तान की साजिश से पर्दा उठा, जब कश्मीरी पंडितों के घर उजाड़ दिए गए। कहा कि उनके साथ अन्याय होता रहा, लेकिन राज्य सरकार मूक दर्शक बनी रही। इससे बड़ा अन्याय और क्या हो सकता है?

 कश्मीरी पंडितों ने कहा कि इस साजिश को अंजाम देने में अमेरिका की भी अहम भूमिका रही। 1971 के युद्ध में पाकिस्तान की मदद व तालिबान को बढ़ावा देने के लिए अमेरिका ने बड़ी मात्रा में हथियार मुहैया कराए। पाकिस्तान ने इन्हीं हथियारों का इस्तेमाल भारत के खिलाफ किया। कहा कि उन दिनों हथियारों की कोई कमी नहीं थी। हथियारों के बल पर कश्मीरी पंडितों के घर उजाड़ दिए।

रोजगार और सुरक्षा मिले तो घर वापसी को तैयार 

अपने घर की याद किसे नहीं आती। आज भी उनके जहन में बचपन में कश्मीर में बिताए पलों की यादें ताजा हैं। वो कश्मीर में अपने घर लौटने को बेताब तो हैं, लेकिन मौजूदा हालातों में यह मुमकिन नहीं। अगर केंद्र सरकार उन्हें रोजगार और सुरक्षा की गारंटी दे तो वे घर वापसी को तैयार हैं।

 

कश्मीर पंडितों ने कहा कि वे जल्दबाजी में घर वापसी नहीं करना चाहते हैं। वो आज भी उस दर्दनाक मंजर को भुला नहीं पाए हैं। उस समय वो साजिश से अंजान थे, उन्हें इस मंजर का अंदाजा नहीं था, लेकिन आज उन्होंने कई सबक सीखे हैं। उन्होंने मांग की है कि सरकार को कश्मीरी पंडितों की घर वापसी के लिए अहम कदम उठाने चाहिए। 

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