पढ़ाई के लिए इन बच्चों में ऐसा जुनून कि छू लिया आसमान
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अमर उजाला मेधावी छात्र सम्मान पाने वाले यह छात्र विपरीत परिस्थितियों में भी नहीं घबराए। कई बाधाएं पार कर वह यहां तक पहुंचे। छात्रों से बात करने पर पता चला कि किस तरह से पढ़ाई के लिए उन्होंने जान तक की परवाह नहीं की तो किसी ने परिवार की समस्या समझते हुए समझौता किया फिर भी अव्वल रहे।
रूद्रप्रयाग निवासी सौरभ कांडपाल ने राज्य में टॉप-12 में स्थान बनाया। सौरभ ने बताया कि घर से तीन किमी दूर गदेरे पार कर स्कूल जाते थे। बताया कि बरसात में गदेरे पूरी तरह से भर जाते। घर वाले भी इससे बुरी तरह से डर जाते थे और उसको स्कूल भेजने से मना कर देते थे। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। तीन गदेरे पार कर स्कूल गए पढ़ाई की और आज इस लायक बने कि अमर उजाला की ओर से उन्हें यह सम्मान दिया गया।
एक ओर जहां कई बच्चे सफलता के लिए विशेष सुविधा का सहारा लेते हैं, सुविधाओं की डिमांड करते हैं। वहीं हरिद्वार की मेघा ने परिवार संग एक कमरे में रहते हुए टॉपर लिस्ट में नाम दर्ज करवाया। मेघा ने बताया कि संयुक्त परिवार में उनके पास सिर्फ एक कमरा था। जहां घर वाले टीवी भी देखते, रिश्तेदारों के बच्चे भी हल्ला मचाते। कई बार तो गुस्सा भी आ जाता था। लेकिन किस-किस को मना करती। अभिभावकों ने समझाया कि जो भी परिस्थितियां हैं, तुम्हारे सामने है। इनसे लड़ो चाहे भागो, बहाने तुम भी बना सकती हो। यह सुनकर मेघा ने ठान लिया कि अब तो हर हाल में टॉप करना है। अमर उजाला के इस सम्मान के लिए उन्होंने विशेष आभार भी जताया।
हर मुश्किल का किया सामना
अल्मोड़ा निवासी कमलेश उप्रेती ने बताया कि पिता जनरल स्टोर और दुकान चलाते हैं। पिता पर अकेले ही काम का बोझ है। ऐसे में पिता की मदद के लिए कमलेश को अक्सर दुकान पर बैठना पड़ता था। दुकान में बैठकर ही कमलेश ने अपनी 10वीं की पढ़ाई की और टॉप-21 का दर्जा हासिल किया।
हरिद्वार निवासी स्वालेहा ने बताया कि पिता इलेक्ट्रीशियन की दुकान चलाते हैं। पांच भाई-बहन होने के कारण पारिवार की आर्थिक स्थिति भी सही नहीं है। 11वीं कक्ष में जब उन्होंने स्कूल में टॉप किया तो स्कॉलरशिप मिली। इसके बलबूते आगे की पढ़ाई हुई। साइकिल पर चार किमी स्कूल जाने वाली स्वालेहा ने 12वीं में टॉप-5 में स्थान हासिल किया।
दून के धर्मपुर निवासी वैभव थपलियाल के पिता शिक्षक हैं। वैभव ने बताया कि पिता ने उनके साथ पूरी मेहनत की। घर पर पढ़ाई कराई। नियमित पांच से सात घंटे पढ़ाई और पिता के मार्गदर्शन की वजह से ही वैभव ने 12वीं में सातवीं रैंक हासिल की।
विकासनगर निवासी हेमा मलिक ने बताया कि पिता पेंटिंग की दुकान चलाते हैं। मां घर पर ही ट्यूशन देती हैं। मां की ही मेहनत का नतीजा है कि वह 10वीं में टॉप-3 रैंक ला सकी। हेमा ने बताया कि मां 12वीं पास है। मां की मेहनत से बड़ी बहनें टॉपर रह चुकी हैं। मां ने उसे भी खुद ही ट्यूशन पढ़ाई।
चमोली से आए सचिन कंडारी ने बताया कि पिता नहीं है। मां एक प्राइवेट स्कूल में पढ़ाती हैं। उसी स्कूल में मुझे भी दाखिला मिला। मां स्कूल के साथ घर पर भी पढ़ाई पर पूरा ध्यान देती हैं। मां की मेहनत की वजह से ही वह 10वीं में टॉपर रहे।
घर टूट गया लेकिन पढ़ाई नहीं छोड़ी
हल्द्वानी निवासी कविता पंत ने बताया कि लालकुआं में बनने वाले फोर लेन हाईवे में उनका घर भी टूट रहा है। पिता प्राइवेट टीचर हैं। घर की आर्थिक स्थिति भी खास अच्छी नहीं है। घर टूटने की टेंशन के बीच पढ़ाई पर ध्यान लगाना बेहद मुश्किल था। बहरहाल माता-पिता ने हौसला दिया और संघर्ष के बावजूद टॉप-18 में जगह मिली।
पिथौरागढ़ निवासी राजीव लोचन ने बताया कि स्कूल घर से दूर था तो आने-जाने में काफी समय बीत जाता था। घर में पढ़ाई करने का समय नहीं मिल पाता था। ऐसे में कभी स्कूल में तो कभी रास्ते में ही पढ़ाई करने लग जाते थे। पिता और शिक्षकों के साथ की वजह से कुमाऊं में टॉप-5 रैंक हासिल की।
डाकपत्थर निवासी मनीष ने दादी की सेवा करते हुए 10वीं में टॉप-18 में नाम दर्ज कराया। बताया कि पिता की इलेक्ट्रिशियन की दुकान है। परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है। दादी भी बिस्तर पर हैं। अभाव के बावजूद पढ़ाई पर ध्यान लगाया। दादी की सेवा की, उनके आशीर्वाद से ही यह स्थान पाया।
रुद्रप्रयाग निवासी नेहा मैठाणी ने बताया कि पेपरों के समय छोटा भाई बीमार हो गया था। भाई को अस्पताल में भर्ती कराया गया। भाई की हालत देख दिमाग बिल्कुल भी पढ़ाई में नहीं लग रहा था। पिता के समझाने पर मुझे हौसला मिला। अस्पताल से घर आने-जाने के दौरान पढ़ाई करने की ठानी। मौका मिलने पर अस्पताल में ही पढ़ कर पढ़ाई की। इसके बावजूद जिले में तीसरा स्थान हासिल किया।
गुप्तकाशी निवासी शार्दुल बेंजवाल ने राज्य में 19वीं रैंक हासिल की। शार्दुल बताया कि पिता के सहयोग की वजह से इस मुकाम पर पहुंच पाए। पिता ने हमेशा पढ़ाई करने पर जोर दिया। जब हम पढ़ाई से जी चुराते तो वह समझाते कि पढ़ाई का जीवन में क्या महत्व है।