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Amar Ujala Aparajita: कभी कलम को रोका गया था...आज लेखन में दिख रही मातृशक्ति की प्रतिभा

Thu, 31 Aug 2023 01:32 AM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Thu, 31 Aug 2023 01:32 AM IST
सार

कार्यक्रम में महिलाओं ने कहा कि आज लेखन के क्षेत्र में महिलाएं आगे आ रहीं हैं। महिलाओं को लिखने का मौका मिला तो उन्होंने अपनी लेखनी से साबित किया है कि उनकी प्रतिभा सौंदर्य तक सीमित नहीं है।

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Amar ujala Aprajita Sanwad In Dehradun On Women in field of Hindi writing
अमर उजाला अपराजिता संवाद में महिलाएं - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

महिलाएं लेखन क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं, लेकिन कुछ लोगों ने महिलाओं की कलम को रोका था। इसके बाद भी महिलाओं की कलम नहीं रुकी। जो लेखन केवल महिलाओं के सौंदर्य तक सीमित था वो अब उनकी प्रतिभा को दिखा रहा है। जिसे महिला साहित्यकारों ने ही तोड़ा है। आगे बढ़ने के लिए महिलाओं को अपनी लड़ाई खुद ही लड़नी होगी। यह बात डॉ. क्षमा कौशिक ने पटेल नगर स्थित अमर उजाला कार्यालय में बुधवार को अपराजिता अभियान के तहत आयोजित संवाद कार्यक्रम में कही। उन्होंने महिलाओं के बारे में कहा, कोई नहीं छल सकता तुमको यदि तुम खुद को छलना छोड़ दो।

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कार्यक्रम का मुख्य विषय लेखन के क्षेत्र में महिलाओं की भूमिका रहा। इस दौरान प्रदेश के अलग-अलग जिलों से आईं कवियित्री, लेखिका, साहित्यकार और समाज सेविकाओं ने अपनी लेखन की प्रतिभा को बखूबी दिखाया। इसके साथ ही कुछ नई लड़कियां भी कार्यक्रम में शामिल हुईं जिन्होंने लेखन कार्य शुरू किया है। महिलाओं ने अपनी लिखी कविताओं और गाने सुनाकर सभी का दिल जीत लिया।
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कार्यक्रम में महिलाओं ने कहा कि आज लेखन के क्षेत्र में महिलाएं आगे आ रहीं हैं। महिलाओं को लिखने का मौका मिला तो उन्होंने अपनी लेखनी से साबित किया है कि उनकी प्रतिभा सौंदर्य तक सीमित नहीं है। लेकिन, आज जो नई पीढ़ी है उसे लिखने से पहले उस लेखक वाले दर्द से गुजरना होगा। उन्हें नदी के बहाव, तारों की टिमटिमाहट, सूरज की रोशनी, चंदा की रोशनी और हवा की सरसराहट को महसूस करना होगा। अच्छा लेखक वही बन सकता है जिसने चोट खाई है। दर्द को महसूस किया है।

महिला का लेखन सिर्फ डायरी तक सीमित नहीं

महिलाओं ने कहा कि पहाड़ की महिलाओं की हालत अब भी बेहतर नहीं है। आज भी वह किसी कार्य में रुचि लेती हैं तो उन्हें आगे नहीं बढ़ने दिया जाता है। कुछ महिलाओं ने यह भी बताया कि उनके ससुराल में लेखन कार्य बंद करवा दिया गया था जबकि वह बड़े समाचार पत्रों के लिए लिखती थीं। वहीं, आज भी कुछ पुरुष लेखक हैं जो महिलाओं को सिर्फ सौंदर्य की चीज समझकर लेखन कार्य कर रहे हैं। लेकिन आज महिला की लेखन कला सिर्फ डायरी तक ही सीमित नहीं है वह अपनी बात को सोशल मीडिया पर भी प्रमुखता से रख रही हैं। वर्तमान स्थितियों पर महिलाओं की कलम समाज में बदलाव ला सकती है।

महिलाओं को समझना होगा कि वह क्या करना चाहती हैं। अपनी बात को समाज में लाने के लिए लेखन का सहारा लेना होगा जिससे वह अपने जीवन के अनुभव को बता सकें।
झरना माथुर

महिलाओं के रास्ते में उनके अपने अलावा और कोई नहीं खड़ा है। हमें यह बात समझने की जरूरत है।
सीमा शफक

जब तक महिलाएं तमाम कुरीतियों को नहीं तोड़ेंगीं तब तक बदलाव नहीं आएगा। खुद में बदलाव करने की जरूरत है। लोग कहते हैं कि तुम क्या लाए थे जो साथ ले जाओगे। मैं कहती हूं कि जीवन की खाली किताब लाए थे उसमें अपने कर्मों का हिसाब ले जाएंगे।
सिमरन दिवाकर

महिलाओं को अपनी लड़ाई खुद लड़नी होगी। शिक्षा ही इसका सबसे सशक्त माध्यम है। एक शिक्षित महिला समाज को शिक्षित कर सकती है।
डॉ. सीमा गुप्ता

ये भी रहीं मौजूद

प्रिया देवली, सुप्रिया सकलानी, सीमा थापा, मीना जोशी, शांति बिंजोला, पल्लवी रस्तोगी, कमलेश्वरी मिश्रा, विनीता मैठाणी, पूजा ध्यानी अमोली, रक्षा बौड़ाई, प्रो. ऊषा, महेश्वरी कनेरी

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