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देहरादून बार एसोसिएशन चुनाव: कंडवाल-चीनी का तिलिस्म टूटा तो बंटू बन गए सिरमौर, पढ़ें कैसे बदला समीकरण
Thu, 29 Feb 2024 04:24 PM IST
देहरादून ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
Published by: देहरादून ब्यूरो
Updated Thu, 29 Feb 2024 04:24 PM IST
सार
अधिवक्ता मनमोहन कंडवाल अपनी एक अलग पहचान रखते हैं। यही कारण है कि उन्हें अधिवक्ताओं ने एक-दो बार नहीं बल्कि नौ बार अपना अध्यक्ष चुना था।
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बार एसोसिएशन चुनाव
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
लंबे समय बाद कचहरी से कंडवाल और चीनी का तिलिस्म टूट गया। एक साल के गैप के बाद जब कंडवाल अध्यक्ष पद पर लड़ने के लिए आए तो खेमे के वोट दो भागों में बंट गए। इसका सीधा फायदा लगातार कई वर्षों से मैदान में उतरने वाले राजीव शर्मा उर्फ बंटू को मिल गया। बंटू का निश्चित वोट बैंक नहीं बिखरा और पिछले साल से 20 वोट कम पाकर भी वह बार एसोसिएशन देहरादून के सिरमौर बन गए।
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कचहरी में अधिवक्ता मनमोहन कंडवाल अपनी एक अलग पहचान रखते हैं। यही कारण है कि उन्हें अधिवक्ताओं ने एक-दो बार नहीं बल्कि नौ बार अपना अध्यक्ष चुना। हालांकि, इसमें दो बार का समयकाल कोविड का भी रहा जब चुनाव नहीं हुए। लगातार पांच वर्षों तक कंडवाल और अनिल शर्मा चीनी क्रमश: अध्यक्ष व सचिव पद पर रिकॉर्ड बनाने वाले अधिवक्ता थे। पिछले साल नामांकन के दिन ही कचहरी का माहौल बदल गया। एकाएक कंडवाल ने अपना नाम पीछे खींच लिया और चुनाव न लड़ने का फैसला लिया।
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इसका सीधा असर यह हुआ कि कंडवाल खेमे का सारा वोट अनिल शर्मा उर्फ चीनी के खाते में गया। अनिल शर्मा अधिवक्ताओं के चेंबर निर्माण की भूमि की लीज कराने में कामयाब रहे। इस बात को उन्होंने भुनाने का प्रयास किया लेकिन एकाएक मैदान में उतरे अधिवक्ता मनमोहन कंडवाल ने जैसे पूरी बाजी ही पलट दी।
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नामांकन के दिन से ही कचहरी में चर्चाएं थीं कि इस बार कंडवाल खेमे का वोट बिखरेगा। हुआ भी यही। पिछले साल कंडवाल के न लड़ने के कारण अकेले अनिल शर्मा को 1237 वोट मिले थे। लेकिन, इस बार अनिल शर्मा को केवल 720 वोटों से संतोष करना पड़ा जबकि कंडवाल 865 वोट ले गए। कुल मिलाकर देखें तो इस बार कंडवाल खेमे के 1585 वोट दो भागों में बंट गए। जबकि दूसरी ओर राजीव शर्मा उर्फ बंटू भाई अपने निश्चित जनाधार के बूते ही जीत हासिल कर गए। उन्हें पिछले साल 951 मत पड़े थे। इस बार भी उन्हें इसके आसपास 931 मत मिले। इस तरह 20 वोट कम पाकर भी वह अध्यक्ष बन गए। उधर, सचिव पद भी गणित कुछ इसी तरह से रहा।
बीते कई वर्षों से चुनाव लड़ रहे प्रकाश टी पाल को इस बार भी दूसरे नंबर से संतोष करना पड़ा। उन्हें पिछले साल से करीब 150 वोट अधिक पड़े। लेकिन, निवर्तमान सचिव राजबीर बिष्ट का जनाधार लगभग 300 वोटों से बढ़ गया और वह लगातार दूसरे साल सचिव चुने गए।