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दस दिन में 31 अकाल मौतें, वजह सिर्फ एक

Tue, 20 May 2014 09:34 PM IST
Updated Tue, 20 May 2014 09:34 PM IST
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accident in chamoli

उत्तराखंड का चमोली जिला, जो लगातार हो रही मौतों की वजह से चर्चा में है। दस दिनों में 31 मौतों से लोग सहमे हुए हैं।

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जिले में दस दिनों में पांच वाहन दुर्घटनाएं हुईं जिसमें 31 लोगों की मौत और 14 लोग घायल हो चुके हैं। वाहन दुर्घटनाओं का यह सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। एक के बाद एक हो रही दुर्घटनाओं से जिले के लोग सकते में हैं।

10 मई को घाट में हुई बस दुर्घटना से जिले में दुर्घटनाओं का सिलसिला शुरू हुआ था। इसके बाद लगातार दुर्घटनाएं होती रहीं। इन दुर्घटनाओं में चार शिक्षकों की मौत हो चुकी है।
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मंगलवार 20 मई को बदरीनाथ हाईवे पर पाखी के समीप एक परिवार कार दुर्घटना में काल के गाल में समा गया है।

जानिए कहां पर हो रहा दुर्घटनाएं

accident in chamoli

चमोली के पुलिस कप्तान सुनील कुमार मीणा का कहना है कि ऐसी जगहों पर वाहन दुर्घटनाएं हो रही हैं, जहां पर दुर्घटनाओं की संभावनाएं शून्य हैं। लोगों को वाहन चलाने में सावधानी बरतनी चाहिए।
 
10 दिनों में हुईं पांच दुर्घटनाएं
10 मई- घाट में बस दुर्घटनाग्रस्त, 20 की मौत, तीन घायल।
11 मई- बदरीनाथ हाईवे पर तीर्थयात्रियों से भरा टेंपो हाईवे पर पलटा, नौ तीर्थयात्री घायल।
11 मई- देवाल ल्वाणी में कार दुर्घटनाग्रस्त, दो की मौत, दो घायल।
19 मई- नौटी सड़क पर मारुति कार दुर्घटनाग्रस्त, छह की मौत।
20 मई- बदरीनाथ हाईवे पर पाखी के पास कार दुर्घटना, एक ही परिवार चार लोगों की मौत।

नींद बनी हादसे का कारण

accident in chamoli

मंगलवार को बदरीनाथ हाईवे पर हुए हादसे का कारण नींद की झपनी आना माना जा रहा है। मंगल सिंह घनसाली से अपने पैतृक गांव लाता (तपोवन) जा रहे थे।

बताया जा रहा है कि वह सुबह से ही ड्राइविंग कर रहे थे। सुबह ग्यारह बजे वह पीपलकोटी पहुंचे।

कयास लगाए जा रहे हैं कि निचले क्षेत्रों में पड़ रही गर्मी के बाद पाखी में ठंडी हवा लगने से उन्हें नींद की झपकी आ गई और वाहन अनियंत्रित होकर खाई में जा गिरा।

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मां से किया था 20 मई को आने का वादा

accident in chamoli

लाता गांव में संचार सुविधा न होने से मंगल सिंह और पोता-पोती के आने के इंतजार में उनके पिता केशर सिंह और माता बाली देवी एक-एक दिन गिन रहे थे।

मंगल सिंह जब 13 अप्रैल को बैसाखी मेले में घर आए थे तो उसी दिन उन्होंने अपनी मां से 20 मई को घर आने का वादा किया था, लेकिन शाम को जैसे ही मंगल सिंह के मां और पिता को जैसे ही दुर्घटना की सूचना मिली तो वे बेहोश हो गए।

मंगल सिंह चार भाइयों में तीसरे नंबर के थे। उनका सबसे बड़ा भाई श्याम सिंह रेलवे में, दूसरा तेज सिंह सेंट्रल स्कूल देहरादून में शिक्षक और चौथा भाई वन विभाग में नौकरी करता है।

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