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अशासकीय कॉलेजों का अनुदान रोकने के विरोध में उतरी एबीवीपी
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देहरादून। प्रदेश के अशासकीय कॉलेजों का अनुदान खत्म करने के सरकार के फैसले के विरोध में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) भी उतर आई है। एबीवीपी के पदाधिकारियों ने कहा कि अशासकीय कॉलेज सरकार पर बोझ नहीं हैं। इन कॉलेजों में ही सबसे अधिक छात्र संख्या है।
एबीवीपी के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. कौशल कुमार की अध्यक्षता में मंगलवार को आयोजित बैठक में डॉ. हरबीर सिंह रंधावा ने उत्तर प्रदेश विश्वविद्यालय अधिनियम 1973 पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि अधिनियम के तहत शिक्षकों का वेतन और अनुदान मिलता है। अशासकीय कॉलेजों के शिक्षकों पर सरकार को केवल वेतन का खर्च उठाना पड़ता है जबकि अन्य कॉलेजों में वेतन व बिल्डिंग और जमीन का भी खर्च उठाना पड़ता है। डॉ. जीपी डंग ने कहा कि सरकार को छात्रों के हितों का ख्याल रखना चाहिए। एबीवीपी के जिला प्रमुख डॉ. पुष्पेंद्र कुमार शर्मा ने कहा कि अनुदान रोकना सरासर गलत है। इसके लिए संगठन अपने स्तर पर मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री से वार्ता करेगा। वहीं एबीवीपी से जुडे़ सभी शिक्षकों ने सरकार के इस फैसले का विरोध किया है। इस मौके पर डॉ. अनूप कुमार मिश्रा, डॉ. अखिलेश बाजपेयी, डॉ. विनोद गुप्ता, डॉ. राजेश रावत, डॉ. सुजाता गुप्ता, डॉ. रविशरण दीक्षित भी मौजूद रहे।
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एबीवीपी के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. कौशल कुमार की अध्यक्षता में मंगलवार को आयोजित बैठक में डॉ. हरबीर सिंह रंधावा ने उत्तर प्रदेश विश्वविद्यालय अधिनियम 1973 पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि अधिनियम के तहत शिक्षकों का वेतन और अनुदान मिलता है। अशासकीय कॉलेजों के शिक्षकों पर सरकार को केवल वेतन का खर्च उठाना पड़ता है जबकि अन्य कॉलेजों में वेतन व बिल्डिंग और जमीन का भी खर्च उठाना पड़ता है। डॉ. जीपी डंग ने कहा कि सरकार को छात्रों के हितों का ख्याल रखना चाहिए। एबीवीपी के जिला प्रमुख डॉ. पुष्पेंद्र कुमार शर्मा ने कहा कि अनुदान रोकना सरासर गलत है। इसके लिए संगठन अपने स्तर पर मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री से वार्ता करेगा। वहीं एबीवीपी से जुडे़ सभी शिक्षकों ने सरकार के इस फैसले का विरोध किया है। इस मौके पर डॉ. अनूप कुमार मिश्रा, डॉ. अखिलेश बाजपेयी, डॉ. विनोद गुप्ता, डॉ. राजेश रावत, डॉ. सुजाता गुप्ता, डॉ. रविशरण दीक्षित भी मौजूद रहे।
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