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देवभूमि में स्टेट कैंसर सेंटर बनाने की वकालत
Updated Fri, 06 Jul 2018 02:08 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला/ देहरादून।
केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण की संसदीय स्थायी समिति ने राज्य में इलाज की उच्च स्तरीय सुविधाओं के लिए अधिक से अधिक ‘टर्सरी केयर सेंटर’ खोलने की वकालत की है। इसके अलावा समिति ने विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी दूर करने, आयुष्मान योजना और एनएचएम की योजनाओं के क्रियान्वयन पर भी जोर दिया है। यह बातें बृहस्पतिवार को केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण की संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष प्रो. रामगोपाल यादव के साथ मुख्य सचिव समेत स्वास्थ्य विभाग के अफसरों के साथ हुए बैठक में निकल कर सामने आईं।
बता दें, केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण की संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष प्रो. रामगोपाल यादव की अगुवाई में आठ सदस्यीय दल बुधवार को राज्य में एम्स ऋषिकेश, जौलीग्रांट समेत कई अस्पतालों का दौरा किया था। इसी क्रम में बृहस्पतिवार को मुख्य सचिव समेत स्वास्थ्य विभाग के आला अफसरों के साथ बैठक कर राज्य में स्वास्थ्य से संबंधित कई मुद्दों पर चर्चा की गई और संभावनाओं पर मंथन किया गया। बोर्ड के सदस्यों ने राज्य में ‘स्टेट कैंसर सेंटर’ बनाने की वकालत के साथ इलाज में सूचना प्रौद्योगिकी के अधिकतम इस्तेमाल की जरूरत जताई। इस दौरान सदस्योें ने विशेषज्ञ व सामान्य डॉक्टरों, पैरा मेडिकल स्टाफ की उपलब्धता की जानकारी ली। इसके बाद कमेटी ने राज्य में स्पेशलिस्ट व सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टरों को उनके ही जिलों या आसपास के जिलों में नियुक्ति देने का सुझाव दिया। समिति ने कैंसर मरीजों के लिए अन्य राज्यों की तर्ज पर उत्तराखंड में भी नए ‘स्टेट कैंसर सेंटर’ खोलने की जरूरत बताई। इसके अलावा गंभीर मरीजों के इलाज में इंतजार की अवधि और दवाओं की गुणवत्ता के प्रति अपनाई जाने वाली प्रक्रिया की जानकारी ली। मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह व सचिव चिकित्सा नितेश कुमार झा ने समिति को बेहतर इलाज की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। इस दौरान संसदीय समिति के सदस्यों ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत संचालित विभिन्न कार्यक्रमों की विस्तृत समीक्षा की और मातृ-शिशु मृत्यु दर में कमी लाने की हिदायत दी। बैठक में मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह, अपर मुख्य सचिव ओमप्रकाश, सचिव नितेश कुमार झा, अपर सचिव अरुणेंद्र सिंह चौहान, स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. टीसी पंत, एनएचएम के राज्य परियोजना निदेशक जुगल किशोर पंत, अपर निदेशक बंशीधर तिवारी, मिशन निदेशक डॉ. अंजली नौटियाल आदि उपस्थित रहे।
बैठक में शामिल हुए मुख्यमंत्री
संसदीय बोर्ड कमेटी की बैठक में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत भी शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने कमेटी को राज्य सरकार की ओर से स्वास्थ्य सेवाओं के लिए उठाए गए कदमों के बारे में जानकारी दी। बैठक में हिस्सा लेने के बाद मीडिया से रूबरू मुख्यमंत्री रावत ने कहा कि समिति के सदस्यों ने स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर जो जरूरतें जाहिर की हैं उन्हें दूर करने का प्रयास किया जाएगा। वहीं बैठक में मुख्यमंत्री के शामिल होने पर संसदीय बोर्ड के चेयरमैन प्रो. रामगोपाल यादव ने अच्छी पहल बताई है। बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने प्रोफेसर रामगोपाल यादव को गेट तक छोड़ने भी गए।
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क्या है टर्सरी केयर सेंटर ?
चिकित्सा विशेषज्ञों के मुताबिक टर्सरी केयर सेंटर इलाज की वे चिकित्सकीय इकाई हैं जहां मरीजों को विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा हार्ट अटैक समेत कई गंभीर मरीजों का इलाज किया जा सकता है। ये रेफरल सेंटर होते हैं जहां पीएचसी पर प्राथमिक उपचार के बाद मरीजों को रेफर कर दिया जाता है।
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केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण की संसदीय स्थायी समिति ने राज्य में इलाज की उच्च स्तरीय सुविधाओं के लिए अधिक से अधिक ‘टर्सरी केयर सेंटर’ खोलने की वकालत की है। इसके अलावा समिति ने विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी दूर करने, आयुष्मान योजना और एनएचएम की योजनाओं के क्रियान्वयन पर भी जोर दिया है। यह बातें बृहस्पतिवार को केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण की संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष प्रो. रामगोपाल यादव के साथ मुख्य सचिव समेत स्वास्थ्य विभाग के अफसरों के साथ हुए बैठक में निकल कर सामने आईं।
बता दें, केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण की संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष प्रो. रामगोपाल यादव की अगुवाई में आठ सदस्यीय दल बुधवार को राज्य में एम्स ऋषिकेश, जौलीग्रांट समेत कई अस्पतालों का दौरा किया था। इसी क्रम में बृहस्पतिवार को मुख्य सचिव समेत स्वास्थ्य विभाग के आला अफसरों के साथ बैठक कर राज्य में स्वास्थ्य से संबंधित कई मुद्दों पर चर्चा की गई और संभावनाओं पर मंथन किया गया। बोर्ड के सदस्यों ने राज्य में ‘स्टेट कैंसर सेंटर’ बनाने की वकालत के साथ इलाज में सूचना प्रौद्योगिकी के अधिकतम इस्तेमाल की जरूरत जताई। इस दौरान सदस्योें ने विशेषज्ञ व सामान्य डॉक्टरों, पैरा मेडिकल स्टाफ की उपलब्धता की जानकारी ली। इसके बाद कमेटी ने राज्य में स्पेशलिस्ट व सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टरों को उनके ही जिलों या आसपास के जिलों में नियुक्ति देने का सुझाव दिया। समिति ने कैंसर मरीजों के लिए अन्य राज्यों की तर्ज पर उत्तराखंड में भी नए ‘स्टेट कैंसर सेंटर’ खोलने की जरूरत बताई। इसके अलावा गंभीर मरीजों के इलाज में इंतजार की अवधि और दवाओं की गुणवत्ता के प्रति अपनाई जाने वाली प्रक्रिया की जानकारी ली। मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह व सचिव चिकित्सा नितेश कुमार झा ने समिति को बेहतर इलाज की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। इस दौरान संसदीय समिति के सदस्यों ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत संचालित विभिन्न कार्यक्रमों की विस्तृत समीक्षा की और मातृ-शिशु मृत्यु दर में कमी लाने की हिदायत दी। बैठक में मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह, अपर मुख्य सचिव ओमप्रकाश, सचिव नितेश कुमार झा, अपर सचिव अरुणेंद्र सिंह चौहान, स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. टीसी पंत, एनएचएम के राज्य परियोजना निदेशक जुगल किशोर पंत, अपर निदेशक बंशीधर तिवारी, मिशन निदेशक डॉ. अंजली नौटियाल आदि उपस्थित रहे।
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बैठक में शामिल हुए मुख्यमंत्री
संसदीय बोर्ड कमेटी की बैठक में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत भी शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने कमेटी को राज्य सरकार की ओर से स्वास्थ्य सेवाओं के लिए उठाए गए कदमों के बारे में जानकारी दी। बैठक में हिस्सा लेने के बाद मीडिया से रूबरू मुख्यमंत्री रावत ने कहा कि समिति के सदस्यों ने स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर जो जरूरतें जाहिर की हैं उन्हें दूर करने का प्रयास किया जाएगा। वहीं बैठक में मुख्यमंत्री के शामिल होने पर संसदीय बोर्ड के चेयरमैन प्रो. रामगोपाल यादव ने अच्छी पहल बताई है। बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने प्रोफेसर रामगोपाल यादव को गेट तक छोड़ने भी गए।
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क्या है टर्सरी केयर सेंटर ?
चिकित्सा विशेषज्ञों के मुताबिक टर्सरी केयर सेंटर इलाज की वे चिकित्सकीय इकाई हैं जहां मरीजों को विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा हार्ट अटैक समेत कई गंभीर मरीजों का इलाज किया जा सकता है। ये रेफरल सेंटर होते हैं जहां पीएचसी पर प्राथमिक उपचार के बाद मरीजों को रेफर कर दिया जाता है।