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बड़े प्राइवेट अस्पतालों के संचालक तलब
Updated Sat, 05 May 2018 02:16 AM IST
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बड़े प्राइवेट अस्पतालों के संचालक तलब
ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत राजधानी के बड़े निजी अस्पतालों में बच्चों को मुफ्त इलाज की सुविधा नहीं दिए जाने के संबंध में एनएचएम के राज्य परियोजना निदेशक जुगल किशोर पंत ने अस्पतालों के निदेशकों और संचालकों को स्वास्थ्य निदेशालय तलब किया और स्पष्टीकरण मांगा।
बैठक में अस्पतालों के प्रतिनिधियों ने मिशन के तहत बच्चों के इलाज में किसी भी तरह की लापरवाही से इनकार कर दिया। श्री गुरु राम राय मेडिकल कॉलेज के चिकित्सा अधीक्षक डॉक्टर केके गर्ग ने बताया कि उनके अस्पताल की तरफ से बच्चों के इलाज में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं बरती जा रही है। फोर्टिस अस्पताल के डॉक्टरों ने बताया कि उनके अस्पताल में चार बच्चों का इलाज किया जा रहा है जो दून, रुड़की और टिहरी से रेफर होकर आए हैं।
मिशन निदेशक युगल किशोर ने कहा कि राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य मिशन केंद्र और राज्य सरकार की प्राथमिकताओं में है। ऐसे में बच्चों के इलाज में लापरवाही न बरती जाए। लापरवाही बरतने पर संबंधित अस्पतालों के खिलाफ न कार्रवाई की जाएगी। साथ ही उनका एमओयू भी निरस्त किया जाएगा।
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विभाग की निदेशक डॉक्टर अंजली नौटियाल ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2017-18 में पूरे राज्य में 309 बच्चों का आरबीएस के कार्यक्रम के तहत इलाज किया गया। कार्यक्रम के तहत एमओयू की शर्तों में भी संशोधन कर दिया गया है। अब विभाग और सरकारी अस्पतालों के बीच एक साल की बजाए तीन साल का अनुबंध किया जाएगा। बैठक में डॉ. अमित शुक्ला, जेसी शुक्ला समेत कई अधिकारी उपस्थित थे।
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ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत राजधानी के बड़े निजी अस्पतालों में बच्चों को मुफ्त इलाज की सुविधा नहीं दिए जाने के संबंध में एनएचएम के राज्य परियोजना निदेशक जुगल किशोर पंत ने अस्पतालों के निदेशकों और संचालकों को स्वास्थ्य निदेशालय तलब किया और स्पष्टीकरण मांगा।
बैठक में अस्पतालों के प्रतिनिधियों ने मिशन के तहत बच्चों के इलाज में किसी भी तरह की लापरवाही से इनकार कर दिया। श्री गुरु राम राय मेडिकल कॉलेज के चिकित्सा अधीक्षक डॉक्टर केके गर्ग ने बताया कि उनके अस्पताल की तरफ से बच्चों के इलाज में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं बरती जा रही है। फोर्टिस अस्पताल के डॉक्टरों ने बताया कि उनके अस्पताल में चार बच्चों का इलाज किया जा रहा है जो दून, रुड़की और टिहरी से रेफर होकर आए हैं।
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मिशन निदेशक युगल किशोर ने कहा कि राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य मिशन केंद्र और राज्य सरकार की प्राथमिकताओं में है। ऐसे में बच्चों के इलाज में लापरवाही न बरती जाए। लापरवाही बरतने पर संबंधित अस्पतालों के खिलाफ न कार्रवाई की जाएगी। साथ ही उनका एमओयू भी निरस्त किया जाएगा।
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विभाग की निदेशक डॉक्टर अंजली नौटियाल ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2017-18 में पूरे राज्य में 309 बच्चों का आरबीएस के कार्यक्रम के तहत इलाज किया गया। कार्यक्रम के तहत एमओयू की शर्तों में भी संशोधन कर दिया गया है। अब विभाग और सरकारी अस्पतालों के बीच एक साल की बजाए तीन साल का अनुबंध किया जाएगा। बैठक में डॉ. अमित शुक्ला, जेसी शुक्ला समेत कई अधिकारी उपस्थित थे।