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निगम को लगी 2.38 करोड़ की लगी चपत
Updated Thu, 15 Jun 2017 10:31 PM IST
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रतनमणी डोभाल
हरिद्वार।
नगर निगम बोर्ड की कार्यकारिणी ने होटल स्वामियों को टैक्स में दी गई भारी छूट से नगर निगम को 2.38 करोड़ रुपये की चपत लगी है। इसका खुलासा महालेखा परीक्षा की रिपोर्ट से हुआ है। नगर आयुक्त को भेजी रिपोर्ट में बताया गया है कि लेखा परीक्षा वर्ष अप्रैल 2013 से मार्च 2014 तक का लेखा परीक्षा 26 मई से 24 जून 2014 किया गया। जिसमें पाया गया कि होटल कारोबारियों के टैक्स निर्धारण में न्याय संगत नीति न अपनाने तथा असमान छूट देने से नगर निगम 2.38 करोड़ की संभाव्य आय से वंचित रह गया।
मेयर मनोज गर्ग की अध्यक्षता में बोर्ड की कार्यकारिणी ने होटलों का टैक्स निर्धारिण करने में अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर होटल स्वामियों को 70 से 90 प्रतिशत की रिकार्ड तोड़ छूट दी गई थी। कई पार्षदों ने इसका विरोध भी किया था, परंतु उनकी एक नहीं सुनी गई। चूंकि नगर निगम बोर्ड की कार्यकारिणी में मेयर सहित कई पार्षद भी होटल कारोबारी अथवा हिस्सेदार थे। ऐसे में उन्होंने नियमों को ताक पर रख दिए। यही वजह है कि इस प्रकार की धांधलियों के प्रकाश में आने के बाद शासन ने कार्यकारिणी से टैक्स निर्धारण का अधिकार छीन कर नगर आयुक्त को सुनवाई तथा कर निर्धारण का अधिकार दे दिया था। इसके बाद शासन ने फिर स्वकर प्रणाली लागू की थी।
तहबाजारी से भी 48 लाख रुपये की चपत
लेखा परीक्षा रिपोर्ट में तहबाजारी का ठेका नही देने का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि इससे 48 लाख रुपये की आय से नगर निगम वंचित हुआ है। रिपोर्ट में बताया गया है कि नगर निगम प्राधिकारियों की शिथिलता से टाउन वेंडिंग कमेटी का गठन न होने से फेरी नीति का कार्यान्वयन नहीं हुआ। तहबाजारी का ठेका भी नहीं देने से यह नुुकसान हुआ है। अभी भी टाउन वेंडिंग कमेटी का गठन नहीं हो पाया है। नगर निगम बोर्ड ने टाउन वेंडिंग कमेटी का गठन तथा वेंडिंग जोन की स्थापना होने तक पूर्व की भांति तहबाजारी शुल्क की वसूली करते रहने का प्रस्ताव पारित किया था, परंतु तत्कालीन नगर आयुक्त ने बोर्ड के प्रस्ताव को क्रियान्वित नहीं किया और अभी भी स्थिति नहीं बदली है।
हरिद्वार।
नगर निगम बोर्ड की कार्यकारिणी ने होटल स्वामियों को टैक्स में दी गई भारी छूट से नगर निगम को 2.38 करोड़ रुपये की चपत लगी है। इसका खुलासा महालेखा परीक्षा की रिपोर्ट से हुआ है। नगर आयुक्त को भेजी रिपोर्ट में बताया गया है कि लेखा परीक्षा वर्ष अप्रैल 2013 से मार्च 2014 तक का लेखा परीक्षा 26 मई से 24 जून 2014 किया गया। जिसमें पाया गया कि होटल कारोबारियों के टैक्स निर्धारण में न्याय संगत नीति न अपनाने तथा असमान छूट देने से नगर निगम 2.38 करोड़ की संभाव्य आय से वंचित रह गया।
मेयर मनोज गर्ग की अध्यक्षता में बोर्ड की कार्यकारिणी ने होटलों का टैक्स निर्धारिण करने में अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर होटल स्वामियों को 70 से 90 प्रतिशत की रिकार्ड तोड़ छूट दी गई थी। कई पार्षदों ने इसका विरोध भी किया था, परंतु उनकी एक नहीं सुनी गई। चूंकि नगर निगम बोर्ड की कार्यकारिणी में मेयर सहित कई पार्षद भी होटल कारोबारी अथवा हिस्सेदार थे। ऐसे में उन्होंने नियमों को ताक पर रख दिए। यही वजह है कि इस प्रकार की धांधलियों के प्रकाश में आने के बाद शासन ने कार्यकारिणी से टैक्स निर्धारण का अधिकार छीन कर नगर आयुक्त को सुनवाई तथा कर निर्धारण का अधिकार दे दिया था। इसके बाद शासन ने फिर स्वकर प्रणाली लागू की थी।
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तहबाजारी से भी 48 लाख रुपये की चपत
लेखा परीक्षा रिपोर्ट में तहबाजारी का ठेका नही देने का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि इससे 48 लाख रुपये की आय से नगर निगम वंचित हुआ है। रिपोर्ट में बताया गया है कि नगर निगम प्राधिकारियों की शिथिलता से टाउन वेंडिंग कमेटी का गठन न होने से फेरी नीति का कार्यान्वयन नहीं हुआ। तहबाजारी का ठेका भी नहीं देने से यह नुुकसान हुआ है। अभी भी टाउन वेंडिंग कमेटी का गठन नहीं हो पाया है। नगर निगम बोर्ड ने टाउन वेंडिंग कमेटी का गठन तथा वेंडिंग जोन की स्थापना होने तक पूर्व की भांति तहबाजारी शुल्क की वसूली करते रहने का प्रस्ताव पारित किया था, परंतु तत्कालीन नगर आयुक्त ने बोर्ड के प्रस्ताव को क्रियान्वित नहीं किया और अभी भी स्थिति नहीं बदली है।
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