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जलवायु परिवर्तन दुनिया के लिए बड़ा खतरा
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जलवायु परिवर्तन दुनिया के लिए बड़ा खतरा
ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। ‘एकेडमी ऑफ फॉरेस्ट एंड एनवायरमेंट साइंसेज’ और केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की ओर से आयोजित तीन दिवसीय कार्यशाला में विशेषज्ञों ने देश-दुनिया में तेजी से हो रहे जलवायु परिवर्तन के खतरों से आगाह किया। खतरों का जिक्र करते हुए कहा कि यदि समय रहते दुनिया के सभी देशोें ने मिलजुल कर कदम नहीं उठाए तो वह दिन दूर नहीं जब पूरी दुनिया को इसके गंभीर नतीजे भुगतने होंगे।
सेमिनार में वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. वीआरएस रावत ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के चलते तापमान में साल दर साल बढ़ोतरी हो रही है। इसके चलते दुनियाभर में ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं और समुद्र का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। समुद्र का जलस्तर बढ़ने से आने वाले समय में दुनिया में बहुत बड़ी आबादी को दूसरे देशों में शरण लेनी होगी, जिससे कई देशों में अराजकता का माहौल पैदा होगा। सोमालिया जैसे देशों की समस्या के लिए जलवायु परिवर्तन ही जिम्मेदार है। कहा कि शहरीकरण व औद्योगीकरण का सीधा असर जलवायु परिवर्तन पर पड़ा है।
उत्तराखंड के पूर्व प्रमुख वन संरक्षक डॉ. आरबीएस रावत ने वनों के संरक्षण पर जोर देते हुए कहा कि जन सहभागिता के जरिये ही जंगलों को बचाया जा सकता है। जंगलों से जुड़े स्थानीय समुदायाें को आर्थिक तौर पर सशक्त करके वनों का संरक्षण किया जा सकता है। मुख्य वन संरक्षक डॉ. कपिल जोशी ने वन नीतियों व वन कानूनों पर विस्तार से प्रकाश डाला। कहा कि उत्तराखंड जैसे राज्यों में वनों का समुचित दोहन कर पर्वतीय इलाकों में गरीबी को काफी हद तक दूर किया जा सकता है। उत्तराखंड में अपार प्राकृतिक संपदा हैं जिनके समुचित दोहन की जरूरत है। इसके लिए उचित नीतियां बनानी होंगी। कार्यशाला में पूर्व प्रमुख वन संरक्षक दिनेश खंडूरी, डॉ. एमएन झा, डॉ. मीनाक्षी जोशी आदि उपस्थित थे। संचालन पूर्व प्रमुख वन संरक्षक दिनेश खंडूरी ने किया।
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ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। ‘एकेडमी ऑफ फॉरेस्ट एंड एनवायरमेंट साइंसेज’ और केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की ओर से आयोजित तीन दिवसीय कार्यशाला में विशेषज्ञों ने देश-दुनिया में तेजी से हो रहे जलवायु परिवर्तन के खतरों से आगाह किया। खतरों का जिक्र करते हुए कहा कि यदि समय रहते दुनिया के सभी देशोें ने मिलजुल कर कदम नहीं उठाए तो वह दिन दूर नहीं जब पूरी दुनिया को इसके गंभीर नतीजे भुगतने होंगे।
सेमिनार में वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. वीआरएस रावत ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के चलते तापमान में साल दर साल बढ़ोतरी हो रही है। इसके चलते दुनियाभर में ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं और समुद्र का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। समुद्र का जलस्तर बढ़ने से आने वाले समय में दुनिया में बहुत बड़ी आबादी को दूसरे देशों में शरण लेनी होगी, जिससे कई देशों में अराजकता का माहौल पैदा होगा। सोमालिया जैसे देशों की समस्या के लिए जलवायु परिवर्तन ही जिम्मेदार है। कहा कि शहरीकरण व औद्योगीकरण का सीधा असर जलवायु परिवर्तन पर पड़ा है।
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उत्तराखंड के पूर्व प्रमुख वन संरक्षक डॉ. आरबीएस रावत ने वनों के संरक्षण पर जोर देते हुए कहा कि जन सहभागिता के जरिये ही जंगलों को बचाया जा सकता है। जंगलों से जुड़े स्थानीय समुदायाें को आर्थिक तौर पर सशक्त करके वनों का संरक्षण किया जा सकता है। मुख्य वन संरक्षक डॉ. कपिल जोशी ने वन नीतियों व वन कानूनों पर विस्तार से प्रकाश डाला। कहा कि उत्तराखंड जैसे राज्यों में वनों का समुचित दोहन कर पर्वतीय इलाकों में गरीबी को काफी हद तक दूर किया जा सकता है। उत्तराखंड में अपार प्राकृतिक संपदा हैं जिनके समुचित दोहन की जरूरत है। इसके लिए उचित नीतियां बनानी होंगी। कार्यशाला में पूर्व प्रमुख वन संरक्षक दिनेश खंडूरी, डॉ. एमएन झा, डॉ. मीनाक्षी जोशी आदि उपस्थित थे। संचालन पूर्व प्रमुख वन संरक्षक दिनेश खंडूरी ने किया।
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